6,645 एलटी शिक्षक भर्ती की तैयारी पूरी
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राजकीय इंटर कॉलेजों में 6,645 प्रशिक्षित शिक्षकों (एलटी) की भर्ती प्रक्रिया निर्धारित समय के अंदर करने का निर्देश मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को दिया गया है।
प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को शिक्षा निदेशालय में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों के साथ बैठक करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया के लिए निर्धारित कार्यक्रम का पालन किया जाए।
इसमें कोई लापरवाही नहीं चलेगी। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने बताया कि एलटी शिक्षकों की भर्ती के लिए निदेशक 21 सितंबर को मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को विस्तृत निर्देश देंगे।
इसके आधार पर मंडल स्तर पर 29 सितंबर को विज्ञापन जारी किए जाएंगे और 30 अक्तूबर तक आवेदन लिए जाएंगे।
28 नवंबर को जारी होगी मेरिट
प्राप्त आवेदनों के आधार पर 28 नवंबर तक मेरिट तैयार कर ली जाएगी और 15 दिसंबर तक काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करते हुए 23 दिसंबर तक नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाएंगे।
प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी जाएं ताकि समय से शिक्षकों का चयन हो सके।
रुक सकती है शारीरिक शिक्षकों की भर्ती
राजकीय इंटर कॉलेजों में 6,645 पदों पर होने वाली शिक्षकों की भर्ती में शारीरिक शिक्षकों की भर्ती लटक सकती है। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि शारीरिक शिक्षकों की भर्ती के संबंध में कुछ मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं।
इसलिए शारीरिक शिक्षकों की भर्ती के पद चिह्नित कर लिए जाएं। इस बारे में शासन स्तर से जल्द ही दिशा-निर्देश जारी किया जाएगा।
संस्कृत शिक्षकों को जल्द कार्यभार ग्रहण कराएं
प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने चार मंडलों फैजाबाद, देवीपाटन, गोरखपुर व बस्ती के संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बहाल किए गए संस्कृत शिक्षकों को जल्द ही कार्यभार ग्रहण करा दिया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इन संस्कृत शिक्षकों का जो भी बकाया बनता है उसका पूरा हिसाब कर दिया जाए।
गौरतलब है कि प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में पहले ही शासनादेश जारी कर दिया है।
प्रदेश में पहली बार वर्ष 2009 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (संस्थाओं के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थाओं के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तें) नियमावली तैयार की गई।
सरकार बदलने से रद्द हुईं थी भर्तियां
नियमावली के आधार पर वर्ष 2011 में मंडल स्तर पर संस्कृत विद्यालयों के लिए प्रधानाचार्य और अध्यापक पद के लिए साक्षात्कार लेते हुए चयन प्रक्रिया पूरी की गई। जिस समय इनकी नियुक्तियां हुईं, उस समय प्रदेश में बसपा सरकार थी। चुनाव के बाद सत्ता बदलने के साथ ही बासुदेव यादव को माध्यमिक शिक्षा का निदेशक बनाया गया।
उन्होंने संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और अध्यापकों में नियुक्ति में धांधली का अंदेशा जताते हुए आजमगढ़ मंडल की खुद जांच कर 25 जून 2012 को वहां की सभी नियुक्तियां निरस्त कर दीं।
इसके बाद अपर निदेशक से बाकी चार मंडलों की जांच कराते हुए 18 सितंबर 2012 को फैजाबाद व देवीपाटन तथा 29 मई 2013 को गोरखपुर और बस्ती मंडल में हुई नियुक्तियों को निरस्त कर दिया। आजमगढ़ के शिक्षकों ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद 16 दिसंबर 2013 को आजमगढ़ के शिक्षकों को सेवा में ले लिया गया। इसी तरह इन चार मंडलों के शिक्षकों को भी अब सेवा में लेने का शासनादेश प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने जारी किया है।