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चाचा कलाम ने बच्चों को दीं कई नेक सलाह
दीप सिंह/लख्ानऊ
Updated Sat, 07 Dec 2013 09:25 PM IST
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किताबों से प्यार करो। सभी अपने घर में एक लाइब्रेरी जरूर बनाओ। ये किताबें बहुत आगे तक ले जाएंगी।
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इसके अलावा भी और नॉलेज चाहिए तो अपने दादा-दादी और नाना-नानी से कहानियां सुनो।
इससे आपको अपने परिवार और पूर्वजों का महत्व पता चलेगा। वहीं आपकी भी एक सोच बनेगी। फिर उसे लिखना शुरू कर दो। महात्मा गांधी की तरह रोज एक पेज लिखना शुरू कर दो।
लखनऊ लिटरेचर कार्निवाल में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने बातों ही बातों में कई बड़ी बातें बताईं। बच्चों से उन्होंने सीधे संवाद किया तो बड़ों को भी सीख दे गए कि वे बच्चों के लिए होम लाइब्रेरी जरूर बनाएं।
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अपने रोचक अंदाज में उन्होंने सभी को शपथ भी दिलाई, ‘वे आज से ही इसकी शुरुआत करेंगे। कम से कम 20 किताबें खरीदेंगे और उनमें से 10 किताबें बच्चों की होंगी’।
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कहानी से शुरू की बात
इस शपथ को सभागार में सभी ने दोहराया। अपनी बातचीत की शुरुआत उन्होंने एक कहानी से की। उन्होंने बताया कि मेरे गार्डेन में 105 साल पुराना पेड़ है। मैंने आज उस पेड़ से बातें कीं और पूछा कि उसके जीवन का मकसद क्या है? उसने मुझे बताया कि मुझे दूसरों को कुछ देने में खुशी मिलती है।
मैंने सबको कुछ न कुछ दिया और मैं भी खुश रहा। फिर बात किताबों की आई तो उन्होंने शारजाह में लगे दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक मेले के बारे में बताया।
होम लाइब्रेरी बना सकते हैं
उन्होंने कहा कि उस देश के शासक शेख डॉक्टर सुल्तान मेले में घूम रहे थे और कई किताबें खरीदीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 250 किताबें खरीदी हैं और एक होम लाइब्रेरी बनाई है जिसमें आधी अरबिक और आधी दूसरी भाषाओं की हैं। वहीं से मेरे मन में यह खयाल आया कि क्यों नहीं सभी इस तरह की होम लाइब्रेरी बना सकते हैं।
डॉ. कलाम ने बच्चों से कहा कि ‘लाइट फ्रॉम मेनी लैंप्स’ मैंने 15 साल की उम्र में पढ़ी थी। इसे आप भी जरूर पढ़ें। महान किताबें, महान मस्तिष्क तैयार करती हैं।
जीवन में एक्सीलेंस जरूरी
उन्होंने कहा कि जीवन में एक्सीलेंस जरूरी है। एक्सीलेंस महज एक्सीडेंट नहीं है। यह एक प्रक्रिया है। अपने जीवन में लक्ष्य तय करो और सपने देखो। उन्होंने बताया कि मैं अब तक संवाद के जरिए एक करोड़ 60 लाख बच्चों से मिल चुका हूं। मैंने देखा कि हर बच्चे की एक कहानी होती है। ये कहानियां मुझे कुछ न कुछ देकर जाती हैं।