अपना दल: अनुप्रिया पटेल से छिना राष्ट्रीय महासचिव का पद
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अपना दल में चल रहा खींचतान चरम पर पहुंच गया है। सोमवार को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने बेटी अनुप्रिया पटेल को राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया।
उन्होंने कहा कि अनुप्रिया व उनके पति आशीष कुमार सिंह की महत्वाकांक्षाओं के चलते ही पार्टी आज चौराहे पर खड़ी है। अनुप्रिया ने न सिर्फ अनुशासनहीनता की है बल्कि उनके असंवैधानिक कार्यों से पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है।
कृष्णा पटेल ने कहा कि अनुप्रिया के विधायक बनते ही उसका तानाशाही रवैया शुरू हो गया था। वह अपने आपको राष्ट्रीय महासचिव की जगह राष्ट्रीय प्रधान महासचिव लिखने लगी।
इस कारण दल के अन्य राष्ट्रीय महासचिव असहज महसूस करने लगे थे। हालांकि उन्होंने कहा कि दल में अविश्वास व टूटने जैसी कोई स्थिति नहीं है। इतना जरूर है कि अनुप्रिया व उनके पति ने दल को काफी कमजोर कर दिया है।
जिद के कारण लड़ाया था लोकसभा चुनाव
कृष्णा पटेल ने कहा कि अनुप्रिया लोकसभा चुनाव लड़ने की जिद पर अड़ गई थीं। अनुप्रिया ने कहा था कि यदि उसे चुनाव लड़ने से रोका गया तो वह दल का भाजपा में विलय कर देगी। उसकी जिद के कारण ही तमाम कार्यकर्ताओं की भावनाओं का गला घोंटकर उसे चुनाव लड़ाया गया।
रोहनिया उपचुनाव में भी वह अपने पति आशीष कुमार सिंह को चुनाव लड़ाना चाहती थी। कृष्णा पटेल ने कहा कि कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुरूप उन्होंने खुद चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
बेटी-दामाद ने हरवाया रोहनिया उपचुनाव
कृष्णा पटेल ने आरोप लगाया कि उन्हें रोहनिया उपचुनाव हराने में भी अनुप्रिया व उनके पति आशीष कुमार सिंह की मुख्य भूमिका थी। उन्होंने कहा कि अनुप्रिया ने साजिश के तहत 20 अक्टूबर को लखनऊ में उनके कार्यालय सचिव की अनुपस्थिति में एक बैठक कर उनके सभी अधिकार खुद प्राप्त कर लिए।
प्रदेश अध्यक्ष छोटे लाल मौर्य व संगठन प्रमुख आनंद हीरा राम सहित कई जिलों के अध्यक्षों को असंवैधानिक तरीके से कार्यमुक्त कर दिया। अनुप्रिया की इन्हीं सब गतिविधियों को देखते हुए उन्हें अपना दल के राष्ट्रीय महासचिव के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
अनुप्रिया का पलटवार
वहीं राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाये जाने पर अनुप्रिया ने आरोप लगाए हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष संविधान के सभी नियमों को ताक पर रखकर संगठन चलाना चाहती हैं। इससे मैं पूरी तरह असहमत हूं। परिवार व दल में कुछ स्वार्थी लोग पांच वर्ष के मेरे परिश्रम को भुनाने तथा भाजपा व अपना दल गठबंधन को तोड़कर अपना हित साधने में लगे हैं।
इस साजिश को किसी भी कीमत पर मैं कामयाब नहीं होने दूंगी। लोकसभा चुनाव जीतकर मैंने दल का सम्मान बढ़ाया है। मैंने दल व परिवार को कभी कोई क्षति नहीं पहुंचाई है।