संभलिए, एंटीबायटिक दवा भी हो सकती है जानलेवा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में घटिया खाद्य सामग्री ही नहीं बल्कि जीवनरक्षक श्रेणी की दवाएं भी बिक रही हैं। इसका खुलासा एफएसडीए की जिला ड्रग इकाई की ओर से बीते दिनों सीतापुर रोड अहिबरनपुर स्थित एक दुकान से लिए गए एंटीबायटिक दवा के नमूने की लैब रिपोर्ट में हुआ है।
लैब से जारी रिपोर्ट में जांचें गए दवा नमूने में मूल साल्ट उपस्थित न होने के आधार पर निगेटिव (फेल) बताया गया है। लैब रिपोर्ट मिलने के बाद अब ड्रग इकाई अधिकारी फेल निकले दवा नमूने के विक्रेता और इसे बना कर सप्लाई करने वाली निर्माता फर्म के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय करेगी।
नियमित तौर पर होने वाली रूटीन जांच के तहत बीते अक्तूबर में औषधि निरीक्षक टीम ने अहिबरनपुर, सीतापुर रोड पर संचालित एक मेडिकल स्टोर से बेची जा रही एंटीबायटिक दवा सिफलेकजॉइम ब्रांड नेम जिफी 200 के कुछ नमूने सील कर लैब टेस्टिंग को भेजे थे।
सिविल और डफरिन से लिए गए पैरासिटामॉल के नमूने
लैब रिपोर्ट मिलने के बाद ड्रग इकाई अधिकारी उक्त दवा बेच रहे दुकान विक्रेता व हिमाचल प्रदेश के सोलन में संचालित दवा निर्माता कंपनी के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
सिविल और डफरिन अस्पताल से बुखार की दवा पैरासिटामॉल के नमूने एफएसडीए ने लिए हैं। इसके अलावा अमीनाबाद से एक दवा कंपनी के डिपो से से भी पैरासिटामॉल के नमूने लिए गए।
इटावा व गाजियाबाद में अर्नेट कंपनी की दवा अधोमानक (सब स्टैंडर्ड) पाए जाने के बाद ये कार्रवाई की जा रही है। इस कंपनी की दवा में पैरासिटामॉल कम्पाउंड मात्र 70 फीसदी से कुछ अधिक पाया गया था।
इसके बाद निदेशक केंद्रीय औषधि भंडार डॉ. योगेश कुमार ने सभी जिलों में पैरासिटामॉल के उस बैच के वितरण पर रोक लगा दी थी। एक या दो दिन में बलरामपुर अस्पताल से भी पैरासिटामॉल के नमूने लिए जाएंगे।