बीबीएयू में एंटी रैगिंग सेल गठित, 24 घंटे सुनी जाएंगी शिकायतें
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इसके साथ बृहस्पतिवार को हुई प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक में नए प्रॉक्टोरियल बोर्ड और नई एंटी रैगिंग टीम को हरी झंडी दी गई। प्रॉक्टर प्रो. रामचंद्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय में छात्रों में लड़ाई की शिकायतें बढ़ी हैं। इसे देखते हुए एंटी रैगिंग सेल बनाने का निर्णय लिया गया है।
इसका अलग कार्यालय होगा। यहां फोन नंबर होगा व कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इनके मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे। कर्मचारियों की यहां 24 घंटे ड्यूटी रहेगी। विद्यार्थी की शिकायत पर कर्मचारी संबंधित अधिकारियों को सूचित करेगा और उस पर त्वरित कार्रवाई शुरू होगी।
इसके साथ ही यह सेल विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी करेगी। समय-समय पर विद्यार्थियों को वीडियो-ऑडियो माध्यम से रैगिंग न करने और इस पर होने वाली कार्रवाई के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों प्रथम वर्ष की विदेशी छात्रा ने अपनी कक्षा के तीन छात्रों पर रैगिंग व टिप्पणी करने की शिकायत निदेशक से की थी।
शोध छात्र ने लिखित माफी मांगी
उन्होंने शिकायती पत्र को विश्वविद्यालय प्रशासन के आला अधिकारियों को भेजा। साथ ही छात्रा के कक्षा में जाकर खुद उससे बात की। छात्रा ने बताया कि एक दिन ऐसा हुआ था, दोबारा उसे कोई समस्या नहीं हुई। इस पर बृहस्पतिवार को उसने निदेशक को पत्र लिखकर शिकायत वापस लेने की बात कही।
साथ ही कहा कि दोबारा उसके साथ ऐसा कुछ होता है तो विश्वविद्यालय प्रशासन ठोस कार्रवाई करे। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक में यह मामला रखा गया। बोर्ड के सामने आरोपित तीनों छात्रों को भी बुलाया गया और उनसे लिखित लिया गया कि दोबारा वो छात्रा से किसी तरह की बातचीत नहीं करेंगे। अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
बैठक में शोध छात्र संजय उपाध्याय का भी मुद्दा आया। इसमें उसने सुपरवाइजर से मारपीट के आरोप में खुद के निलंबन को वापस लेने और पीएचडी अवार्ड कराने की मांग की थी। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सामने शोध छात्र ने कहा कि वह गलती मानने को तैयार हैं और इसके लिए सुपरवाइजर से भी मिलकर बात करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी पीएचडी पूरी कराए। प्रॉक्टर प्रो. रामचंद्रा ने बताया कि इस पर सहमति बनी लेकिन इससे पहले शोध छात्र अपने शिक्षक से संपर्क करेगा।