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...तो इस मोर्चे पर चूक गए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

Sun, 01 Nov 2015 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 01 Nov 2015 02:10 AM IST
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Another side of UP cabinet expansion.

कोशिश तो बहुत दिखी लेकिन मंत्रिपरिषद में पूरा क्षेत्रीय संतुलन बनाए नहीं बन पाया। सरकार बनने के बाद से ही मंत्रिपरिषद में बुंदेलखंड को भागीदारी नहीं मिल पाई थी। इस बार लोगों को भागीदारी मिलने की उम्मीद थी, पर यह पूरी नहीं हो पाई।

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वहीं, सपा नेतृत्व कई अन्य जिलों की उदासी भी दूर करने में सफल नहीं हो पाया। कोशिश मुख्य रूप से पूर्व के समीकरणों को साधे रखने की ही दिख रही है।

आनंद सिंह, मनोज पारस व पवन पांडेय की विदाई, चितरंजन स्वरूप और राजेन्द्र सिंह राणा की मृत्यु और दो दिन पहले आठ मंत्रियों की बर्खास्तगी से पश्चिमी यूपी से मंत्रिपरिषद में छह लोगों, मध्य उत्तर प्रदेश खास तौर से अवध क्षेत्र से चार और पूर्वांचल के तीन सदस्यों का प्रतिनिधित्व घट गया था।
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अब विस्तार में गाजियाबाद के बलवंत सिंह रामूवालिया, सहारनपुर के साहब सिंह सैनी, हापुड़ के मदन चौहान, बदायूं के ओंकार सिंह यादव, बड़खेड़ा (पीलीभीत) के हेमराज वर्मा के रूप में पश्चिम से पांच, पूर्वांचल से गाजीपुर की शादाब फातिमा, कुशीनगर के राधेश्याम सिंह, जौनपुर के शैलेन्द्र यादव ललई, संतकबीर नगर के लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के रूप में चार लोगों को प्रतिनिधित्व देकर क्षेत्रीय संतुलन को पूर्ववत बनाए रखने की कोशिश की गई है।
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साथ ही बहराइच से बंशीधर बौद्ध, सफीपुर (उन्नाव) के सुधीर कुमार रावत और फैजाबाद के पवन पांडेय को जगह देकर अवध क्षेत्र के समीकरणों को साधा गया है।

पश्चिम की भागीदारी अगर एक घटी है तो तीन कैबिनेट मंत्री देकर उसकी भरपाई करने की कोशिश की गई है। इस सारी कवायद के बावजूद बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि  सोनभद्र इलाके की इच्छा भी पूरी नहीं हो पाई है।

इन्हें दिया गया प्रमोशन

Another side of UP cabinet expansion.

भविष्य के लिहाज से क्षेत्रों को महत्व देने के संदेश का भी सहारा लिया गया है। जिन नौ लोगों को पदोन्नति दी गई है, उनमें कैबिनेट मंत्री के रूप में अमरोहा के कमाल अख्तर को शामिल किया गया है तो स्वतंत्र प्रभार देकर पीलीभीत के रियाज अहमद, आगरा के रामसकल गुर्जर, बिजनौर के मूलचंद चौहान के बहाने पश्चिम को महत्व दिया गया है।

वहीं मध्य उत्तर प्रदेश में बाराबंकी के अरविंद सिंह गोप और गोंडा के पंडित सिंह को कैबिनेट, बाराबंकी के फरीद महफूज किदवई, हरदोई के नितिन अग्रवाल, बहराइच के यासर शाह को पदोन्नति देकर खास तौर से अवध क्षेत्र को पूर्व, पश्चिम और मध्य उत्तर प्रदेश के लगभग बराबर महत्व देने का प्रयास किया गया है।

पहले के समीकरण दुरुस्त रखने के साथ ही कुछ नए इलाकों को लुभाने की कोशिश की गई है, पर मंत्रिपरिषद में ‘कुछ जिलों के कई तो कुछ इलाकों से कोई नहीं’ जैसी स्थिति खत्म नहीं हो पाई है।

इस क्षेत्र का मंत्रिपरिषद में रहा खास दबदबा

Another side of UP cabinet expansion.

मंत्रिपरिषद में गाजीपुर का दबदबा बरकरार रहा है। यहां से फिर चार मंत्री हो गए हैं, पर बलिया की भरपाई नहीं हो पाई है। अंबिका की बर्खास्तगी से पहले जिले से तीन मंत्री थे। अब दो ही रह गए हैं। हालांकि दो मंत्रियों की पदोन्नति से बाराबंकी का रुतबा बढ़ा है।

अंबेडकरनगर व आजमगढ़ का तीन-तीन मंत्रियों का रुतबा बरकरार है। बहराइच से अब दो मंत्री हो गए हैं। गोंडा में पंडित सिंह को बतौर कैबिनेट मंत्री प्रमोट कर आनंद सिंह व योगेश की विदाई की भरपाई करने की कोशिश की गई है। हालांकि जिले से तीन की जगह अब सिर्फ एक ही मंत्री रह गया है।

सहारनपुर से राजेन्द्र सिंह राणा की मृत्यु से खाली जगह को साहब सिंह सैनी को मंत्री बनाकर भर दिया गया है।

कुछ को हिस्सेदारी मिली, कुछ की घटी, कुछ खाली हाथ
: उन्नाव, संतकबीरनगर, हापुड़, बदायूं को पहली बार भागीदारी मिली है। कुशीनगर, पीलीभीत, जौनपुर, फैजाबाद से अब दो मंत्री हो गए हैं। आगरा और प्रतापगढ़ से दो की जगह एक-एक मंत्री ही रह गया है, पर मुजफ्फरनगर, बरेली व मैनपुरी की भागीदारी छिन गई है। इलाहाबाद, बुलंदशहर, बदायूं, मिर्जापुर, सोनभद्र, श्रावस्ती, महराजगंज जैसे कई जिलों की उम्मीद पूरी नहीं हो पाई है।

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