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पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर एक और केस दर्ज, पीड़िता के वकील ने मांगी सुरक्षा, दो इंस्पेक्टर निलंबित
Fri, 11 Sep 2020 11:25 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 11 Sep 2020 11:25 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
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पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। लखनऊ के गाजीपुर थाना में हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने गायत्री प्रसाद प्रजापति और उन पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला व उसकी बेटी समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
उनका कहना है कि वह महिला की तरफ से पूर्व मंत्री के खिलाफ दर्ज रेप के मुकदमे की पैरवी कर रहे थे, लेकिन बाद में पीड़िता व आरोपी ने सांठगांठ करके उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। उनकी फीस नहीं दी और मुकदमे भी दर्ज करा दिए। उन्होंने पूर्व मंत्री और महिला से अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
एडीसीपी उत्तरी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में पीड़िता की तरफ से पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समेत रेप के छह अन्य आरोपियों की जमानत का विरोध किया था। बाद में पीड़िता ने फरवरी 2019 में सभी आरोपियों को जेल से छुड़ाने के लिए उनके पक्ष में शपथपत्र लगाने को कहा।
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अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने इसका विरोध किया तो पीड़िता ने फीस व बकाये के रुपये न देने और रेप के मामले में फंसाने की धमकी दी। उसने 26 मार्च 2019 को उनके खिलाफ खबरें अखबारों में छपवाईं। इसके बाद उसने दूसरा वकील भी नियुक्त कर लिया।
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उनका कहना है कि वह महिला की तरफ से पूर्व मंत्री के खिलाफ दर्ज रेप के मुकदमे की पैरवी कर रहे थे, लेकिन बाद में पीड़िता व आरोपी ने सांठगांठ करके उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। उनकी फीस नहीं दी और मुकदमे भी दर्ज करा दिए। उन्होंने पूर्व मंत्री और महिला से अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
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एडीसीपी उत्तरी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में पीड़िता की तरफ से पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समेत रेप के छह अन्य आरोपियों की जमानत का विरोध किया था। बाद में पीड़िता ने फरवरी 2019 में सभी आरोपियों को जेल से छुड़ाने के लिए उनके पक्ष में शपथपत्र लगाने को कहा।
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अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने इसका विरोध किया तो पीड़िता ने फीस व बकाये के रुपये न देने और रेप के मामले में फंसाने की धमकी दी। उसने 26 मार्च 2019 को उनके खिलाफ खबरें अखबारों में छपवाईं। इसके बाद उसने दूसरा वकील भी नियुक्त कर लिया।
त्रिपाठी का आरोप है कि वह जब भी अपनी मुवक्किल से मिलने जाते, पूर्व मंत्री के लोग उनसे मिलने आते और प्लॉट व रुपयों का लालच देते। पीड़िता उनसे बड़े होटलों में मिलती थी, जिसका सारा खर्च पूर्व मंत्री के लोग उठाते थे। पीड़िता भी पूर्व मंत्री से मेडिकल कॉलेज और उनके बेटों से मिलने के लिए घर आती-जाती थीं।
पूर्व मंत्री पर जेल से पीड़िता के फोन से धमकाने का आरोप
अधिवक्ता का आरोप है कि पीड़िता अक्सर गायत्री से मिलने जेल जाती थी और पूर्व मंत्री की उनसे फोन पर बात कराती थी। पूर्व मंत्री उन्हें शांत रहने को कहते थे। वह कहते थे कि अपनी वकालत करो। जेल से छूटकर रुपया दे दूंगा। मेरे बयान होने दो। अगर व्यवधान उत्पन्न करोगे तो जब भी बाहर निकलूंगा, तुम्हारी हत्या करा दूंगा।
पीड़िता भी कई बार अधिवक्ता को ऐसी ही धमकी दे चुकी थी। इसके चलते अधिवक्ता ने मार्च 2019 से पीड़िता के मुकदमे में पैरवी करना छोड़ दिया था। अधिवक्ता का कहना है कि अनजान लोग उनकी गाड़ी का पीछा करते हैं। उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार कराने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने पुलिस को गायत्री व पीड़िता के खिलाफ ठोस सबूत देने की बात भी कही है।
बेटी को गायत्री के पक्ष में बयान दिलाने के बदले लिया मकान
अधिवक्ता ने तहरीर में लिखा है कि पीड़िता ने अपनी बेटी को पूर्व मंत्री गायत्री के पक्ष में बयान दिलाने के बदले जुलाई 2019 में आशियाना के सेक्टर के में डेढ़ करोड़ रुपये का मकान लिया था। यह मकान पूर्व मंत्री की बेनामी संपत्ति का हिस्सा था। रजिस्ट्री में पीड़िता ने जिस अशोक तिवारी पर रेप के आरोप में केस दर्ज कराया था, उसके बेटे अभिषेक को ही गवाह बनाया गया है। इसके अलावा गौतमपल्ली में ही अधिवक्ता के साथ पीड़िता से रेप के सहआरोपी अरुण कुमार द्विवेदी उर्फ रामू द्विवेदी भी रजिस्ट्री में गवाह हैं।
पूर्व मंत्री पर जेल से पीड़िता के फोन से धमकाने का आरोप
अधिवक्ता का आरोप है कि पीड़िता अक्सर गायत्री से मिलने जेल जाती थी और पूर्व मंत्री की उनसे फोन पर बात कराती थी। पूर्व मंत्री उन्हें शांत रहने को कहते थे। वह कहते थे कि अपनी वकालत करो। जेल से छूटकर रुपया दे दूंगा। मेरे बयान होने दो। अगर व्यवधान उत्पन्न करोगे तो जब भी बाहर निकलूंगा, तुम्हारी हत्या करा दूंगा।
पीड़िता भी कई बार अधिवक्ता को ऐसी ही धमकी दे चुकी थी। इसके चलते अधिवक्ता ने मार्च 2019 से पीड़िता के मुकदमे में पैरवी करना छोड़ दिया था। अधिवक्ता का कहना है कि अनजान लोग उनकी गाड़ी का पीछा करते हैं। उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार कराने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने पुलिस को गायत्री व पीड़िता के खिलाफ ठोस सबूत देने की बात भी कही है।
बेटी को गायत्री के पक्ष में बयान दिलाने के बदले लिया मकान
अधिवक्ता ने तहरीर में लिखा है कि पीड़िता ने अपनी बेटी को पूर्व मंत्री गायत्री के पक्ष में बयान दिलाने के बदले जुलाई 2019 में आशियाना के सेक्टर के में डेढ़ करोड़ रुपये का मकान लिया था। यह मकान पूर्व मंत्री की बेनामी संपत्ति का हिस्सा था। रजिस्ट्री में पीड़िता ने जिस अशोक तिवारी पर रेप के आरोप में केस दर्ज कराया था, उसके बेटे अभिषेक को ही गवाह बनाया गया है। इसके अलावा गौतमपल्ली में ही अधिवक्ता के साथ पीड़िता से रेप के सहआरोपी अरुण कुमार द्विवेदी उर्फ रामू द्विवेदी भी रजिस्ट्री में गवाह हैं।
पीड़िता ने साथ नहीं देने पर दर्ज कराई फर्जी एफआईआर
अधिवक्ता का कहना है कि पीड़िता के विधि विरुद्ध कार्यों में साथ न देने पर वह नाराज हो गई और जून 2019 में चित्रकूट में उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज करा दी। हालांकि जांच के बाद पुलिस ने उक्त मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। पीड़िता ने हार नहीं मानी और पूर्व मंत्री के सहयोग से गौतमपल्ली थाना में 27 दिसंबर 2019 को अधिवक्ता के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया।
गौतमपल्ली थाने और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर निलंबित
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दुष्कर्म के मुकदमे में गवाह राम सिंह को बिना ठोस सुबूत के गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में गौतमपल्ली थाने के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अजीत प्रताप सिंह को बृहस्पतिवार दोपहर निलंबित कर दिया गया।
पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय का कहना है कि गिरफ्तारी प्रकरण में दोनों इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दोनों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि राम सिंह हमीरपुर के राठ स्थित मियांपुरा गांव का रहने वाला है। कभी वह गायत्री पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला का साथी था और दुष्कर्म के मुकदमे में गायत्री के खिलाफ गवाह था।
हालांकि, तीन साल में वह गवाही देने के लिए कोर्ट नहीं आया। बाद में पीड़िता अपने आरोपों से मुकर गई और 2019 में राम सिंह के खिलाफ ही गौतमपल्ली थाने में दुष्कर्म और अश्लील हरकतों समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई। इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित की गई थी।
गौतमपल्ली थाने और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर निलंबित
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दुष्कर्म के मुकदमे में गवाह राम सिंह को बिना ठोस सुबूत के गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में गौतमपल्ली थाने के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अजीत प्रताप सिंह को बृहस्पतिवार दोपहर निलंबित कर दिया गया।
पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय का कहना है कि गिरफ्तारी प्रकरण में दोनों इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दोनों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि राम सिंह हमीरपुर के राठ स्थित मियांपुरा गांव का रहने वाला है। कभी वह गायत्री पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला का साथी था और दुष्कर्म के मुकदमे में गायत्री के खिलाफ गवाह था।
हालांकि, तीन साल में वह गवाही देने के लिए कोर्ट नहीं आया। बाद में पीड़िता अपने आरोपों से मुकर गई और 2019 में राम सिंह के खिलाफ ही गौतमपल्ली थाने में दुष्कर्म और अश्लील हरकतों समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई। इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित की गई थी।
गौतमपल्ली थाने और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर निलंबित
क्राइम ब्रांच और गौतमपल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने छह सितंबर को बंदरियाबाग चौराहे से राम सिंह को दबोच लिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि राम सिंह को पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की जमानत के ठीक अगले दिन गिरफ्तार किया गया और इसकी खबर आला अधिकारियों तक को नहीं दी गई।
पुलिस आयुक्त का कहना है कि राम सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में कोई भी नया तथ्य सामने नहीं आया था। इसके अलावा गायत्री की जमानत के चौबीस घंटे बाद ही राम सिंह को बिना किसी ठोस सुबूत के जेल भेजने की जल्दबाजी की गई। इससे गायत्री के केस में प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी पैदा हो रही थी।
इस बात की जानकारी अधिकारियों को मिली तो हड़कंप मच गया। इसके पीछे किसी साजिश की आशंका जताई जाने लगी। बृहस्पतिवार को शासन से लखनऊ पुलिस के अधिकारियों से इस बाबत पूछताछ की, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला की हो सकती है गिरफ्तारी
गायत्री पर अपना और नाबालिग बेटी के दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाली आशियाना निवासी महिला को पुलिस गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। आरोपों से मुकरने के बाद महिला ने अपने ही अधिवक्ता दिनेश चंद्र त्रिपाठी के खिलाफ भी गौतमपल्ली थाने में दुष्कर्म और अश्लील हरकतों समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। सूत्रों का कहना है कि महिला को जल्द गिरफ्तार करने की तैयारी है।
पुलिस आयुक्त का कहना है कि राम सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में कोई भी नया तथ्य सामने नहीं आया था। इसके अलावा गायत्री की जमानत के चौबीस घंटे बाद ही राम सिंह को बिना किसी ठोस सुबूत के जेल भेजने की जल्दबाजी की गई। इससे गायत्री के केस में प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी पैदा हो रही थी।
इस बात की जानकारी अधिकारियों को मिली तो हड़कंप मच गया। इसके पीछे किसी साजिश की आशंका जताई जाने लगी। बृहस्पतिवार को शासन से लखनऊ पुलिस के अधिकारियों से इस बाबत पूछताछ की, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला की हो सकती है गिरफ्तारी
गायत्री पर अपना और नाबालिग बेटी के दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाली आशियाना निवासी महिला को पुलिस गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। आरोपों से मुकरने के बाद महिला ने अपने ही अधिवक्ता दिनेश चंद्र त्रिपाठी के खिलाफ भी गौतमपल्ली थाने में दुष्कर्म और अश्लील हरकतों समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। सूत्रों का कहना है कि महिला को जल्द गिरफ्तार करने की तैयारी है।