गोरखपुर हादसे से चर्चित कंपनी पुष्पा सेल्स पर एक और गड़बड़ी का आरोप, पहले भी अटका चुकी है ऑक्सीजन
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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई रोकने को लेकर सुर्खियों में आई पुष्पा सेल्स के खिलाफ कानपुर के हृदय रोग संस्थान में भी शिकायतें मिली थीं। यहां कंपनी ने जो ऑक्सीजन पाइप लाइन डाली थी वह कुछ ही समय बाद खराब हो गई। जिससे यहां के ओटी और आईसीयू के वेंटीलेटर तक खराब हो गए।
संस्थान के निदेशक की शिकायत पर भी जब कंपनी इसे ठीक करने को तैयार नहीं हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से की। जिस पर कंपनी के काम की जांच के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन सरकारी अस्पतालों में कंपनी के काम पर रोक नहीं लगाई गई।
दरअसल, लखनऊ की कंपनी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड को 31 मार्च 2013 को कानपुर के हृदय रोग संस्थान में पाइप लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति का सिस्टम लगाने का ठेका मिला था। इससे मरीजों को बेड पर 24 घंटे ऑक्सीजन मिलनी थी। इन उपकरणों की पांच साल वारंटी-मेंटीनेंस के लिए कंपनी को मोटी रकम का भुगतान भी किया गया था। लेकिन एक साल के अंदर ही यहां लगाए गए उपकरण बोल गए। संस्थान के निदेशक ने 14 जुलाई 2014 को कंपनी को पत्र लिखकर कंप्रेस्ड एयर पाइप लाइन में पानी आने की शिकायत की।
कंपनी ने नहीं की ठीक कराने की कोशिश
निदेशक का कहना था कि यहां लगाया गया ड्रायर ठीक से काम नहीं कर रहा है। इस कारण पानी कंप्रेस्ड एयर पाइप लाइन से होते हुए ओटी एवं आईसीयू के वेंटीलेटर में पहुंच गया। जिससे वेंटीलेटर खराब हो गए। उन्होंने तत्काल ड्रायर बदलने व ऑक्सीजन पाइप लाइन में पानी आने की समस्या ठीक करने को कहा था। इसके बावजूद कंपनी ने इसे दुरुस्त कराने की कोशिश नहीं की।
निदेशक की शिकायत पर 19 जनवरी 2015 को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता ने संस्थान के निदेशक को इस मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। लेकिन कंपनी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ।
क्या कहते हैं कंपनी के निदेशक
इस पर पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मनीष भंडारी का कहना है कि हमारी कंपनी ने अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई के उपकरण लगाए थे। इसका मेंटीनेंस भी हम ही करवाते हैं। कानपुर के हृदय रोग संस्थान की कम्प्लेन भी जरूर अटेंड की गई होगी। इस मामले में विस्तृत जानकारी रिकॉर्ड देखने के बाद ही दी जा सकती है। कंपनी पर लापरवाही के आरोप पूरी तरह गलत हैं।