फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   annual conference in indira gandhi pratisthan

मुंह के छालों से हो सकता है कैंसर

Mon, 21 Mar 2016 01:25 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 21 Mar 2016 01:25 PM IST
सार

  • पान, मसाला तंबाकू और कत्था बना रहा है कैंसर का रोगी
  • मुंह में पड़े छाले हो सकते हैं कैंसर का कारण
  • नमक में मिलने वाला पदार्थ नाइट्रोशामीन आंतों के कैंसर का प्रमुख कारण

विज्ञापन
annual conference in indira gandhi pratisthan
मुंह के छाले हो सकते हैं कैंसर का कारण - फोटो : demo pic

विस्तार

मुंह में पड़े छाले यदि 10-15 दिन में ठीक नहीं तो इन्हें बिल्कल नजरअंदाज न करें यह कैंसर के कारण भी हो सकता है। पान, मसाला, तंबाकू और कत्थे का सेवन करने से यूपी और बिहार में ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 

विज्ञापन


मुंह का कैंसर जहां लोगों का खाना पीना बंद कर रहा है। वहीं,गंभीर परिस्थितियों में पीड़ित को अपनी आवाज से भी हाथ धोना पड़ रहा है। ये जानकारी रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के सहयोग से रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया यूपी चेप्टर के ‘इमर्जिंग पैराडाइम्स इन प्रीसिजन रेडियोथेरेपी एंड ऑन्कोलॉजी प्रैक्टिसेस’ विषय पर विशेषज्ञों ने दी। 
विज्ञापन


इंदिरागांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो हॉल में आयोजित एनुअल कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन जेके कैंसर इंस्टीट्यूट कानपुर के डॉ. ईश्वर चंद खरे ने बताया कि पान, मसाला, तंबाकू, कत्था और चूना लोगों को मुंह के कैंसर का रोगी बना रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आलम ये है कि सौ मरीजों में 30 से अधिक मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। तंबाकू उत्पादों से मुंह, गाल, जबान, मसूढ़ों, टॉन्सिल और कंठ में कैंसर हो रहा है। डॉ. खरे ने बताया कि तंबाकू उत्पादों का सेवन से व्यक्ति के मुंह में छाले पड़ें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

मुंह में कैंसर से अधिक खतरा लैरिंग्स ‘वोकल कॉर्ड’ यानि स्वर बॉक्स को होता है। कई गंभीर परिस्थितियों में कैंसर सेल्स स्वर बॉक्स को क्षतिग्रस्त कर देती हैं। ऐसे में वोकल कार्ड निकालने से व्यक्ति की आवाज जीवन भर के लिए चली जाती है। कार्ड में गांठ के साथ सूजन भी आने लगती है।

आर्टिफिशिल वोकल कॉर्ड का खर्च करीब 20 लाख

annual conference in indira gandhi pratisthan
अधिक नमक भी बना सकता है कैंसर रोगी - फोटो : demo pic

डॉ. ईश्वर बताते हैं कि दिल्ली और मुंबई में कुछ हायर सेंटर आर्टिफिशिल वोकल कॉर्ड लगाते हैं जिसे ट्रेकि यास्टोमी कहा जाता है। हालांकि इस तकनीक पर करीब 20 लाख से अधिक खर्च होते हैं। 

वोकल कॉर्ड या मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीज पहली और दूसरी स्टेज में आता है तो इलाज संभव है। ऐसे मामलों में अमूमन मरीज तीसरी और चौथी स्टेज में ही इलाज कराने पहुंचता है। 

केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएलबी ने बताया कि खाने में नमक कम लें। ब्रिटेन में वर्ष 2020 तक  नमक की खपत को आधा करने की योजना बनाई है। इसके लिए वहां की सरकार ने कैंसर को खत्म करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से प्रिवेंशन ऑफ कैंसर विदाउट कॉस्ट की थीम दी थी। 

नमक में मिलने वाला पदार्थ नाइट्रोशामीन आंतों के कैंसर का प्रमुख कारण है। वहीं, भारत में लोग खाने में नमक का सेवन अधिक करते हैं। इसी का नतीजा है कि पहले बच्चेदानी और मुंह का कैंसर सबसे अधिक पाया जाता था। अब ये कैंसर की दोनों बीमारियों को आंतों के कैंसर ने पीछे छोड़ दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed