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आत्महत्या का सच: पांच लाख घूस न देने पर, पांच साल से रोक रखा था वेतन

Fri, 20 Jan 2017 02:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 20 Jan 2017 02:42 AM IST
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An RES employee commits suicide because of exploitation.
पत्नी के सा‌थ उत्तमचंद - फोटो : amar ujala

ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) के बाबू उत्तमचंद्र की खुदकुशी के लिए घरवालों ने दफ्तर में शोषण और प्रताड़ना को जिम्मेदार ठहराया है। परिवारीजनों का कहना है कि वह अपना ट्रांसफर गृह जिले मऊ कराना चाहते थे। इसके लिए बाराबंकी में तैनात अफसर रियाज और बाबू राजेश श्रीवास्तव ने पांच लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। न देने पर उन्हें लगातार परेशान कर रहे थे।

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पांच साल से उनका वेतन भी रुकवा दिया था। वेतन न मिलने के कारण उत्तमचंद्र कर्ज लेकर परिवार चला रहे थे। लगातार बढ़ते कर्ज और ऑफिस में शोषण के लिए वह डिप्रेशन में आ गए और बुधवार सुबह फांसी लगाकर जान दे दी।
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उत्तमचंद्र के बेटे आनंद ने बताया कि वह मूलरूप से मऊ के देहरीघाट के हैं और यहां गाजीपुर थाना क्षेत्र के इंदिरानगर सेक्टर 21 में किराये के मकान में रहते हैं। उत्तमचंद्र ने वर्ष 2011 में बाराबंकी में तैनाती के दौरान गृह जनपद में तबादले के लिए विभागीय अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया था।
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ट्रांसफर कराने के बदले रियाज और राजेश श्रीवास्तव ने उससे पांच लाख रुपये घूस मांगी। बाबू ने रिश्वत देने से मना कर दिया। बकौल आनंद, पिता ऑफिस जाते तो हाजिरी रजिस्टर पर उनके साइन नहीं कराए जाते थे। इससे उन्हें अनुपस्थित मान लिया जाता।

अनियमितता का हवाला देकर रोकवा दी सैलरी

An RES employee commits suicide because of exploitation.

आरोपियों ने आला अधिकारियों को उनकी गैर हाजिरी और अनियमितता की रिपोर्ट देकर पांच साल से सेलरी रुकवा रखी थी। वर्ष 2013 में उनका तबादला बहराइच कर दिया गया, लेकिन वहां भी उनके साथ यही सुलूक शुरू हो गया।

रियाज और राजेश श्रीवास्तव ने बहराइच के अधिकारियों से संपर्क कर उनके गैर हाजिर होने की झूठी रिपोर्ट कराई। विभागीय अधिकारियों के सामने उन्हें लापरवाह, शराबी और अकर्मण्य साबित कर दिया गया।

परेशान उत्तमचंद्र ने बंद कर दिया था ऑफिस जाना
परेशान होकर उत्तमचंद्र ने वर्ष 2013 के अंत में ही ऑफिस जाना बंद कर दिया। इस बीच परिवार के खर्च पूरे करने के लिए उन्होंने कर्ज लेना शुरू कर दिया। तनाव के चलते वह शराब के लती भी हो गए।

इंदिरानगर के आम्रपाली योजना निवासी सोनू से रुपये उधार लेकर उन्होंने शराब में उड़ा दिए। कर्ज और डिप्रेशन से उबरने का कोई रास्ता न देख उन्होंने खुदकुशी का रास्ता चुना।

जिस सूटकेस में काला चिट्ठा, उसमें लगा नंबर लॉक

An RES employee commits suicide because of exploitation.

गाजीपुर थाने की पुलिस ने उत्तमचंद्र की खुदकुशी की जांच शुरू कर दी है। रिंग रोड चौकी इंचार्ज ने बताया कि उत्तमचंद्र के जिस सूटकेस में आरोपी रियाज और राजेश श्रीवास्तव का काला चिट्ठा होने की बात कही जा रही है, उसमें नंबर लॉक लगा हुआ है।

उत्तमचंद्र के परिवारीजनों को बुलवाया गया है। उनके आने के बाद ही सूटकेस खोलकर उसमें रखे कागजातों की पड़ताल की जाएगी। इस बीच पुलिस की एक टीम बाराबंकी व बहराइच भेजी गई है।

पुलिस ने बताया कि उत्तमचंद्र वर्ष 2008 में लखनऊ में तैनात थे। वर्ष 2004 में उनका तबादला गृह जनपद मऊ हो गया। चार साल मऊ में रहने के बाद वर्ष 2008 में उन्हें बाराबंकी भेज दिया गया। बाराबंकी से वर्ष 2013 में उनका स्थानांतरण बहराइच कर दिया गया। पुलिस की टीम उत्तमचंद्र के साथ काम करने वाले लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है।

दाने-दानें को तरस गया था परिवार

An RES employee commits suicide because of exploitation.

उत्तमचंद्र के तत्कालीन अधिकारी रियाज और बाबू राजेश श्रीवास्तव की करतूत से पूरा परिवार दाने-दाने को तरस गया था। पत्नी साधना ने बताया कि जेवर बेचकर घर का खर्च चला रही थी। बर्ष 2014 में उन्होंने जेवर गिरवी रखकर बच्चों की स्कूल की फीस भरी थी।

बड़ा बेटा आनंद 8000 रुपये में मुंशी पुलिया स्थित एक मोबाइल शॉप में नौकरी करता है। आशुतोष बीए कर रहा है जबकि आशीष इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है। आर्थिक तंगी के बावजूद उत्तमचंद्र और साधना ने बेटी की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी।

आनंद ने बताया कि जिस मकान में उसका परिवार रहता है, उसका किराया ही 8000 रुपये है। वह अपनी पूरी सैलरी किराये में ही देता था। बाकी के खर्च पूरे करने के ‌लिए पिता किसी न किसी से कर्ज लेते थे।

सीएम आवास पर दी आत्मदाह की धमकी, पर नहीं हुई सुनवाई
उत्तचंद्र ने विभागीय प्रताड़ना से परेशान होकर अधिकारियों से गुहार लगाई थी। उसने विभाग के अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भारत सरकार को कई पत्र लिखे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उसकी पत्नी साधना ने फरवरी 2014 को एक पत्र लिखकर सीएम आवास पर आत्मदाह करने तक की चेतावनी दे डाली, फिर भी किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।

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