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Barabanki: 29 साल पहले से बस से टकराकर मरा था भैंसा, वारंट देखकर रो पड़ा वृद्ध
Wed, 28 Jun 2023 04:00 PM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 28 Jun 2023 04:00 PM IST
सार
परिवहन विभाग में काम करने वाले अच्छन मियां की बस से टकराकर एक भैंसे की मौत हो गई थी। इसका वारंट उन्हें 29 साल बाद मिला जिसे देखकर वो रो पड़े...।
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अच्छन मियां।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
करीब 29 साल पहले बस से टकराकर भैंसे की मौत हो गई थी। इसका मामला बरेली के फरीदपुर थाने में दर्ज हुआ था। चालक वृद्ध ही नहीं बल्कि लकवा ग्रस्त हो चुका है लेकिन एक दिन पहले बरेली के न्यायालय से उसके पास वारंट आया तो वह रो पड़ा। पुलिस उसे हिदायत देकर गई है।
बाराबंकी शहर के निवासी अच्छन मियां परिवहन विभाग में चालक पद पर तैनात थे। इस समय उनकी उम्र 83 साल हैं। एक दिन पहले इनके घर बरेली जिले के फरीदपुर थाने के सब इंस्पेक्टर पहुंचे। सब इंस्पेक्टर ने अच्छन मियां को गिरफ्तारी का वारंट दिखाया और बताया कि 29 साल पहले हुई दुर्घटना का मामला है जिसमें न्यायालय ने वारंट जारी किया है। वारंट देखने के बाद अच्छन मियां दंग रह गए। वह रो पड़े।
उन्होंने सब इंस्पेक्टर से बताया कि वर्ष 1994 में वह कैसरबाग डिपो की बस लेकर लखनऊ से बरेली और फरीदपुर जा रहे थे। रास्ते में अचानक उनकी बस से एक भैंसे की टक्कर हो गई। जब तक वह ब्रेक लगाते तब तक हादसा हो चुका था। भैंसे की उस हादसे में मौत हो गई। फरीदपुर थाने में दुर्घटना का मुकदमा लिखा गया था। बस छोड़ दी गई थी।
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अब वह बाराबंकी डिपो से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस समय वह लकवाग्रस्त हैं और बीमार रहते हैं। चलने में भी दिक्कत होती है। उनकी हालत देखकर पुलिस वाले भी कुछ नहीं कह पाए लेकिन हिदायत दी कि कोर्ट में जरूर हाजिरी लगा दें नहीं तो गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस वाले तो चले गए मगर अच्छन इस वाक्ये से आहत है।
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बाराबंकी शहर के निवासी अच्छन मियां परिवहन विभाग में चालक पद पर तैनात थे। इस समय उनकी उम्र 83 साल हैं। एक दिन पहले इनके घर बरेली जिले के फरीदपुर थाने के सब इंस्पेक्टर पहुंचे। सब इंस्पेक्टर ने अच्छन मियां को गिरफ्तारी का वारंट दिखाया और बताया कि 29 साल पहले हुई दुर्घटना का मामला है जिसमें न्यायालय ने वारंट जारी किया है। वारंट देखने के बाद अच्छन मियां दंग रह गए। वह रो पड़े।
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उन्होंने सब इंस्पेक्टर से बताया कि वर्ष 1994 में वह कैसरबाग डिपो की बस लेकर लखनऊ से बरेली और फरीदपुर जा रहे थे। रास्ते में अचानक उनकी बस से एक भैंसे की टक्कर हो गई। जब तक वह ब्रेक लगाते तब तक हादसा हो चुका था। भैंसे की उस हादसे में मौत हो गई। फरीदपुर थाने में दुर्घटना का मुकदमा लिखा गया था। बस छोड़ दी गई थी।
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अब वह बाराबंकी डिपो से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस समय वह लकवाग्रस्त हैं और बीमार रहते हैं। चलने में भी दिक्कत होती है। उनकी हालत देखकर पुलिस वाले भी कुछ नहीं कह पाए लेकिन हिदायत दी कि कोर्ट में जरूर हाजिरी लगा दें नहीं तो गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस वाले तो चले गए मगर अच्छन इस वाक्ये से आहत है।