बाराबंकी में पुलिस हिरासत में बुजुर्ग की मौत पर आक्रोश
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एक किशोरी के अपहरण के आरोपी पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। घबराए पुलिस वालों ने मामले को रफादफा करने में जुट गए। रविवार रात में ही पुलिस ने परिवारीजनों से लिखकर ले लिया कि मौत स्वाभाविक हुई है।
हालांकि, पुलिस ने अपने बचाव में डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया और उसकी वीडियोग्राफी कराई। इसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। एसपी ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए डीएम को पत्र भेजा है।
इस पर डीएम ने मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी है। उधर गांव में फोर्स तैनात है और ग्रामीण शव दफनाने को तैयार नहीं हैं।
रामनगर थाना क्षेत्र के मधवापुर मजरे बल्लोपुर निवासी बाबूराम यादव के पुत्र पर एक किशोरी के अपहरण का मुकदमा दर्ज है। इसी मुकदमे में पूछताछ के लिए बाबूराम को रामनगर पुलिस रविवार दोपहर गांव से उठा लाई थी। दिन में चौकी पर रखने के बाद उसे शाम को थाने ले जाया गया।
बेहोश होने ले गए अस्पताल और...
रात करीब साढ़े नौ बजे बाबूराम के बेहोश होने पर पुलिस उसे सीएचसी लेकर गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाबूराम की मौत के बाद घबराई पुलिस ने शव को उसके परिवारीजनों को देने की कोशिश की।
आला अधिकारियों की जानकारी के बाद पुलिस ने मृतक के समधी व परिवारीजनों से मौत स्वाभाविक होने का लिखित पत्र लेकर रात में ही शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया।
यहां पर दो चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया पर मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। एसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि मौत स्वाभाविक रूप से हुई है। पूछताछ के लिए युवक के पिता को बुलाया गया था।
पुलिस की कहानी पर सवालिया निशान
पुलिस हिरासत में रविवार को बाबूराम की मौत किस कारण से हुुई, यह अभी पता नहीं चल सका है। साठ वर्षीय बुजुर्ग पिता को थाने बुलाकर पुलिस आखिर क्या करना चाहती थी।
पुलिस को अपने को पाक-साफ साबित करने की इतनी जल्दबाजी थी कि परिवारीजनों से अपने पक्ष में प्रार्थना पत्र भी लिखवा लिया।
इतना ही नहीं, आनन-फानन में शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए रात में भेज दिया गया। रात दो बजे तक पुलिस पूरे मामले को मैनेज करने के लिए दौड़ भाग करती रही। अब पुलिस की कहानी पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।