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यूपी का रण : राजनीति के रुस्तम को घेरने के लिए मैदान में नए सूरमा, भाजपा ने लगाई पूरी ताकत

Mon, 07 Feb 2022 06:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा शिवमंगल सिंह, इटावा
शिवमंगल सिंह, इटावा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 07 Feb 2022 06:06 AM IST
सार

वर्ष 1996 से इस सीट से शिवपाल सिंह यादव लगातार विधायक बन रहे हैं। 2017 में भगवा लहर के बावजूद शिवपाल यादव ने भाजपा के उम्मीदवार मनीष यादव पतरे को 52 हजार से भी अधिक वोटों से हराया था। हालांकि, बाद में सैफई परिवार में आपसी कलह तेज हो गई और समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव हाशिये पर चले गए थे।

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An eye on political situation of Etawah on the pretext of the upcoming UP assembly elections
शिवपाल यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इटावा की जसवंतनगर सीट कभी दर्शन सिंह और मुलायम सिंह के मुकाबले के लिए देश भर में चर्चित रही है। इसी सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता बलराम सिंह भी विधायक रहे हैं। 1985 से मुलायम सिंह के परिवार का ही इस पर कब्जा है। यादव मतदाता बहुल इस सीट पर कांग्रेस-भाजपा और बसपा ने कई बार मुलायम सिंह परिवार का चक्रव्यूह भेदने का प्रयास किया, लेकिन नाकाम रहीं। इस सीट पर छठवीं बार विधायक बनने के लिए उतरे शिवपाल को घेरने के लिए भाजपा और बसपा ने नए सूरमाओं को मैदान में उतारा है जबकि, पड़ोस की करहल सीट पर भाजपा ने अखिलेश यादव के खिलाफ चर्चित चेहरे एसपी सिंह बघेल को उतारा है।

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वर्ष 1996 से इस सीट से शिवपाल सिंह यादव लगातार विधायक बन रहे हैं। 2017 में भगवा लहर के बावजूद शिवपाल यादव ने भाजपा के उम्मीदवार मनीष यादव पतरे को 52 हजार से भी अधिक वोटों से हराया था। हालांकि, बाद में सैफई परिवार में आपसी कलह तेज हो गई और समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव हाशिये पर चले गए थे। अपनी उपेक्षा से नाराज शिवपाल ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना ली और लोकसभा चुनाव में अपने अलग उम्मीदवार उतारे। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चाचा-भतीजे की जोड़ी एक बार फिर साथ आ गई।
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जातीय समीकरणों से ही घेरेबंदी : प्रसपा और सपा के बीच हुए समझौते के तहत शिवपाल फिर सपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसी बीच कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा छोड़ दी, उनके साथ ही शिवपाल के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले मनीष ने भी भाजपा को अलविदा कहकर सपा का दामन थाम लिया। मनीष के सपा में जाने के बाद भाजपा ने यहां से युवा चेहरा विवेक शाक्य को मैदान में उतारा है। बसपा ने ब्रजेंद्र प्रताप सिंह (बीपी) को टिकट दिया है। कांग्रेस ने यहां से अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। कांग्रेस ने पड़ोस की सीट करहल से अखिलेश के खिलाफ  भी कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है। भाजपा ने युवा और शाक्य समाज से उम्मीदवार उतारकर दूसरी सीटों समीकरण साधने की कोशिश की है। 
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शाक्य समाज का इटावा जिले की दूसरी सीटों पर वोट काफी निर्णायक माना जाता है, इससे भाजपा को जसवंतनगर के अलावा दूसरी सीटों पर फायदा होगा। इटावा जिले में भाजपा जिस तरह से जातीय समीकरणों के जवाब में जातीय समीकरणों से ही घेरेबंदी कर रही है, उससे इस सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो सकता है।

भाजपा ने शाक्य बिरादरी को साधने में लगाई पूरी ताकत
जसवंतनगर सीट पर भाजपा यदि गैर यादव वोट को संगठित करने में सफल रही, तो उसका प्रत्याशी यहां पर कड़ी टक्कर देने में सफल हो सकता है। भाजपा ने इटावा जिले में सपा के ही शिवप्रताप सिंह राजपूत सहित दूसरी जाति के नेताओं को जिस तरह से अपने पाले में खड़ा किया,उससे साफ जाहिर है कि उसकी गैर यादव वोटों पर नजर है। प्रसपा के दिग्गज नेता रघुराज सिंह शाक्य पर भी भाजपा डोरे डाल रही है। यदि रघुराज भाजपा में जाते हैं तो समाजवादी पार्टी की राहें काफी कठिन हो सकती हैं।

मुलायम परिवार के लिए अपराजेय रही है यह सीट
जसवंतनगर विधानसभा मुलायम सिंह यादव परिवार के लिए अपराजेय रही है। मुलायम सिंह यादव के पहलवानी के अखाड़े से राजनीति के माहिर खिलाड़ी बनने की आरंभिक गाथा का यह क्षेत्र ही साक्षी रहा है। वे 1967 में पहली बार जसवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुए। 69 में कांग्रेस के चौ. विशंभर सिंह यादव और 80 में बलराम सिह यादव विधायक का चुनाव जीते। बाकी 1996 तक हुए कुल चुनावों में सात बार मुलायम सिंह यादव ही विधायक निर्वाचित हुए। 96 में यह सीट उन्होंने अपने अनुज शिवपाल सिंह यादव को सौंप दी। विधानसभा सीट पर मुलायम सिंह यादव ने जीत का जो सिलसिला शुरू किया, दूसरे दलों के लिए उसे तोड़ पाना अभी तक तो मुमकिन नहीं हो पाया है। भाजपा हो अथवा बसपा दोनों ने ही खूब जोर लगाया परंतु यहां सपा को हिला नहीं सके।


मुद्दे दरकिनार, जातीय समीकरण ही दिखाएंगे कमाल
जसवंतनगर सीट पर पारिवारिक सियासी विरासत के आगे मुद्दे दरकिनार हैं। लगातार एक ही परिवार के पास सीट होने की वजह से यहां पर जिले की दूसरी अन्य सीटों की तरह महंगाई, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विधायक के प्रति नाराजगी जैसे मुद्दे नहीं हैं। हालांकि, जसवंतनगर के कोल्ड स्टोरेज व्यवसायी शिवांत मिश्रा कहते हैं, जो व्यक्ति समस्या का तुरंत हल करवा सकता हो और बुनियादी बातों पर गौर करे, उसी को यहां से चुना जाएगा। वहीं, सरसई नावर निवासी मोहम्मद रफीक कहते हैं, हम इस बार किसानों की समस्यायों को ध्यान में रखकर ही मतदान करेंगे।

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