विश्वविद्यालय बिरादरी स्तब्ध : एएमयू के प्रो. समदानी की कोरोना से मौत, अब तक 20 मौजूदा व 25 से अधिक पूर्व शिक्षकों का निधन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के प्रसिद्ध व्याख्याता और विधि संकाय के डीन प्रोफेसर शकील अहमद समदानी का शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते निधन हो गया। वह साठ वर्ष के थे।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के प्रसिद्ध व्याख्याता और विधि संकाय के डीन प्रोफेसर शकील अहमद समदानी का शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते निधन हो गया। वह साठ वर्ष के थे। वह पिछले कई दिनों से जेएन मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन थे। उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि प्रोफेसर समदानी एक लोकप्रिय शिक्षक थे। उनकी मौत से सभी को दुख पहुंचा है। कुलपति ने शोक संतृप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मृत्यु मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।
प्रोफेसर समदानी एएमयू ईसी, एएमयू कोर्ट और शैक्षणिक परिषद के सदस्य रहे हैं। वह विश्वविद्यालय के संपत्ति अधिकारी (राजपत्रित), सांस्कृतिक शिक्षा केंद्र के समन्वयक, एएमयू केंद्रों के नोडल अधिकारी और विधि विभाग के प्रमुख भी रहे हैं। प्रोफेसर समदानी फैमिली लॉ, पब्लिक इंटरनेशनल लॉ, ह्यूमन राइट्स, इस्लामिक लीगल सिस्टम एंड कॉन्स्टीट्यूशनल लॉ ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ थे। उन्होंने यूनिफार्म सिविल कोड और मुस्लिम तलाक के लिए निर्वाह भत्ता पर किताबें लिखीं। इसके अतिरिक्त, वह दो पुस्तकों पर काम कर रहे थे। उन्होंने मानक पत्रिकाओं में लेख भी लिखे। उनको कई पुरस्कार भी मिले और उनके लेख देश-विदेश के नामचीन अखबारों में भी प्रकाशित हुए। उन्हें टीवी बहस के लिए भी आमंत्रित किया जाता था।
प्रोफेसर समदानी ने देश और विदेश में एएमयू के सांस्कृतिक जीवन का प्रतिनिधित्व किया। वह बेहतरीन वक्ता थे और श्रोताओं पर गहरा प्रभाव डालते थे। एक दिन पहले शुक्रवार को लॉ फैकल्टी के पूर्व डीन और कार्यवाहक कुलपति रहे प्रोफेसर शब्बीर अहमद का निधन हुआ था। साथ ही एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन फैकल्टी के चेयरमैन प्रोफेसर शादाब खान की भी कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हो गई थी। शिक्षकों के लगातार हो रहे निधन से विश्वविद्यालय समुदाय स्तब्ध है।
अब तक 20 मौजूदा व 25 से अधिक पूर्व शिक्षकों का निधन
कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में अब तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के मौजूदा 20 शिक्षक और 25 से अधिक पूर्व शिक्षक व विद्वानों का निधन हो चुका है। कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजर रहा है, जब एएमयू के किसी शिक्षक या विद्वान की मृत्यु का समाचार न आया हो।
इससे पहले शुक्रवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन फैकल्टी के प्रोफेसर शादाब अहमद खान का निधन हो गया था। संस्कृत विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ, लॉ फैकल्टी के पूर्व डीन प्रोफेसर शब्बीर सहित ऐसे नामों की लंबी सूची है। शनिवार को एएमयू में कंप्यूटर साइंस विभाग के वरिष्ठ व्याख्याता प्रोफेसर रफीकुज्जमां खान का निधन हो गया। उन्होंने हाल ही में विभाग अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया था। जूलॉजी विभाग के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और सेवानिवृत्त व्याख्याता डाक्टर सैयद इरफान अहमद का निधन हो गया था।
बीते दिनों भौतिकी विभाग से सेवानिवृत्त व्याख्याता डॉ अरशद अहमद का निधन हो गया। वह एक प्रमुख पूर्व एएमयू छात्र, अमेरिकी उद्योगपति और नेता डाक्टर फ्रैंक एफ इस्लाम के बहनोई थे। हालांकि विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ लोग कहते हैं कि अन्य स्थानों पर हालत इससे भी ज्यादा खराब हैं। एएमयू में प्रत्येक चीज का रिकॉर्ड मेंटेन होता है और यहां पर आंकड़े छिपाए नहीं जाते। इसलिए प्रदर्शित यह हो रहा है कि यहां पर मौत ज्यादा हो रही है। जबकि अन्य संस्थानों और राज्यों में स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है। एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने शिक्षकों और विद्वानों निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह सब निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।