काम आया अमित शाह का मैनेजमेंट फंडा
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वर्ष 1998 में हुए आम चुनावों में उत्तर प्रदेश की 85 सीटों से चुनाव प्रत्याशी मैदान में थे।
इस दौरान अटल की लहर में भारतीय जनता पार्टी 58 सीटों पर आगे थी।
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इस बार चुनावों बढ़त का आलम यह है कि कुल अस्सी सीटों में 70 पर भारतीय जनता पार्टी बढ़त लिए हुए है।
खास बात है कि एक दो सीटों को यदि छोड़ दें तो वोटों का अंतर भी कम नहीं है।
तय किया 40 से 70 सीटों तक का सफर
तेज-तर्रार छवि को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले बीजेपी नेता और भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रभारी अमित शाह के सामने प्रदेश में चालीस सीटें जीतने का लक्ष्य था।
फिलहाल दोपहर डेढ़ बजे तक की मतगणना रिपोर्ट पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि फिलहाल प्रदेश की अस्सी सीटों में से करीब सत्तर सीटों पर भारतीय जनता पार्टी बढ़त बनाए हुए हैं।
दंगे और बदले की राजनीति से जीत तक
साम-दाम-दंड-भेद में अमित शाह का कोई जवाब नहीं। यह बात अभी तक के नतीजों से साफ जाहिर होती है।
बात चाहे दंगों की हो या फिर बदले की राजनीति की, उन्होंने बीजेपी को बढ़त दिलाने में हर हथकंडा बेहद कूटनीतिक तौर पर अपनाया।
बात इतनी बढ़ी कि चुनाव आयोग को भी एकबारगी तो उनकी राह रोकनी पड़ी हालांकि बाद में चेतावनी के साथ उन्हें आयोग ने भी क्लीन चिट दे दी थी।