अमित शाह की सीएम योगी के आवास पर लंबी बैठक, बड़े फेरबदल के दिए संकेत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिशन 2019 के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर लंबा मंथन किया। साथ ही सरकार की साख और जनता में सकारात्मक संदेश के सवालों को हल करने में जुटे रहे।
माना जा रहा है तीन चरणों में हुई इस बैठक में लोकसभा चुनाव की चुनौती से पार पाने के लिए और भाजपा की सरकार के बारे में सकारात्मक संदेश देने का खाका खींचा गया। इसका असर आगे सरकार में बड़े ‘ऑपरेशन’ और संगठन में फेरबदल के रूप में सामने आ सकता है।
सरकार और संगठन की साख पर बट्टा लगाने वाले और प्रभावी परिणाम न दे पाने वालों के पर कतरे जा सकते हैं तो कुछ को अच्छे काम और प्रभावी परिणाम देने की एवज में तरक्की दी जा सकती है। कुछ मंत्रियों को सरकार से संगठन के लिए विदा किया जा सकता है।
गठबंधन के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और अपना दल के अध्यक्ष आशीष पटेल व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से भी शाह ने बातचीत की और उनकी अपेक्षाएं सुनी। राजभर ने शाह के सामने सात बिंदु रखे। इसके साथ ही विधान परिषद चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई।
फुले को श्रद्धांजलि से शाह का खास सियासी संदेश
मिशन 2019 की सफलता का खाका खींचने के लिए लखनऊ पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सबसे पहले लखनऊ में समता मूलक चौराहे पर ज्योतिबा फुले की प्रतिमा पर गए और उन्हें माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्र्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय भी थे।
दलितों को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच ज्योतिबा फुले की जयंती पर शाह के इस कदम के पीछे भाजपा की खास सियासी संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि शाह के जरिये भाजपा ने पिछड़ों और दलितों को जोड़ने की कोशिश की है।
कई चरणों में बैठक
कई दौर की मैराथन बैठक के पहले चरण में शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय, राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल के साथ सरकार के कामकाज, समन्वय और लोगों के बीच संदेश पर बातचीत की।
दूसरे चरण में इसमें दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा भी शामिल हुए। तीसरे चरण में सहयोगी दलों के नेताओं को शामिल किया गया। अंतिम चरण में संगठन के सभी प्रदेश महामंत्रियों को भी बुलाकर शाह ने मुख्यमंत्री आवास पर ही बातचीत की और उन्हें आगे का एजेंडा सौंपा। यह पहला मौका है कि हमेशा संगठन मुख्यालय पर बैठकें करने वाले शाह दिन भर मुख्यमंत्री आवास पर रहे।
राजभर ने रखा मांगों का पुलिंदा
गठबंधन के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने शाह के सामने प्रमुख रूप से सात मांगें रखीं। साथ ही अधिकारियों की मनमानी और उनकी बात न सुनने की शिकायत भी की। इसी के साथ उन्होंने पिछड़ों के 27 प्रतिशत आरक्षण में अति पिछड़ी जातियों का कोटा तय करने और 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग भी रखी। सपा सरकार में इन्हीं जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग केंद्र को भेजी गई थी।
50 फीसदी जिलों में ओबीसी डीएम-कप्तान तैनात हों
अपना दल के नेताओं ने मांग उठाई कि 50 प्रतिशत जिलों में ओबीसी के जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान तैनात किए जाएं। थानों में भी 50 प्रतिशत ओबीसी थानेदारों की तैनाती की मांग की गई।