नहीं भाया अमेरिका, इक वजह खींच लाई भारत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तराई की आब-ओ-हवा के दीवानगी की हद तक मुरीद हुए एक अमेरिकी युवक ने बहराइच की सेवा करने के लिए अपने मुल्क में वेटर व सफाईकर्मी का काम कर पैसे जुटाए।
छात्र का साल भर पहले एक शोध कार्य के सिलसिले में बहराइच आना हुआ था, तभी से उसके मन में यहां समाजसेवा करने का जज्बा पलने लगा था।
दो दिन पहले ही बहराइच पहुंचे हाबर्ड यूनिवर्सिटी के विज्ञान वर्ग के इस छात्र को इंटर की परीक्षा में प्रेसीडेंट फार एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पुरस्कृत भी कर चुके हैं।
हावर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र हैं ईवान
अमेरिका के कैलीफोर्निया शहर के ईवान वेनर पुत्र एलन वेनर मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। वह हावर्ड यूनिवर्सिटी बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र हैं।
साल भर पूर्व फरवरी माह में हावर्ड यूनिवर्सिटी का 32 सदस्यीय छात्र शोध दल अमेरिका से भारत आया था।
इस दल ने बहराइच में देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी डॉक्टर जीतेंद्र चर्तुवेदी की अगुवाई में जिले का भ्रमण कर वन क्षेत्रों में ग्रामीणों के रहन-सहन, आजीविका आदि पर शोध किया था लेकिन उसको बहराइच की आबोहवा ऐसी भायी कि पुन: बहराइच आ काम करने की इच्छा जताई।
भारत आने के लिए वेटर बने ईवान
ईवान ने बताया कि घर पहुंच उन्होंने पिता को भारत में समाजसेवा करने की इच्छा बतायी लेकिन पिता ने आर्थिक तंगी के चलते असमर्थता व्यक्त कर दी।
इसके बाद उन्होंने एक होटल में वेटर की नौकरी की। लेकिन तीन माह काम करने के दौरान उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
इस पर सोलर पैनल की सफाई का काम करने वाली कंपनी से संपर्क साधा और सोलर पैनल साफ कर बहराइच आने के लिए पैसा इकट्ठा किया बहराइच आ गए।
ईवान ने बताया कि वह भारत की संस्कृति सभ्यता को नजदीक से पहचानने के लिए पुन: अमेरिका से आए हैं।
इस समय ईवान संस्था के पदाधिकारियों की मदद से हिंदी सीख रहे हैं। उन्होंने
कहा कि 15 जून 2015 तक वह नि:शुल्क संस्था को अपनी सेवाएं देंगे।