{"_id":"6913a037e850b98668052249","slug":"amendment-in-the-meeting-of-the-house-amidst-tension-between-the-mayor-and-the-municipal-commissioner-lucknow-news-c-13-knp1002-1467159-2025-11-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: महापौर और नगर आयुक्त में तनातनी के बीच सदन की बैठक में संशोधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: महापौर और नगर आयुक्त में तनातनी के बीच सदन की बैठक में संशोधन
विज्ञापन
नगर निगम।
लखनऊ। महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच अधिकारों को लेकर चल रहे टकराव के बीच नगर निगम सदन की 14 को होनी वाली बैठक में संसोधन हो गया है। अब बैठक सामान्य के बजाय विशेष होगी। महापौर ने यह बदलाव बैठक बुलाने में आ रही विधिक अड़चन के कारण किया है। मंगलवार को महापौर की ओर से बैठक बुलाने को लेकर दोबारा पत्र भी जारी कर दिया गया।
सोमवार को महापौर ने नगर निगम का सामान्य सदन बुलाने के लिए पत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था पुराने प्रस्तावों पर चर्चा की जाए। सामान्य सदन होने के नाते इसमें नए प्रस्तावों को भी शामिल करना पड़ता। उसके लिए पार्षदों और विभागों से प्रस्ताव मांगने पड़ते। इससे कई दिन का समय लगता और 14 को सदन की बैठक नहीं हो पाती।
इसके अलावा सदन बुलाने के लिए नगर निगम अधिनियम के तहत 96 घंटे पहले एजेंडा व सूचना भी जारी करनी होती है, चूंकि एजेंडा तैयार करने में ही 10 दिन से अधिक का समय लग जाता तो बैठक टालनी पड़ती। इसे देखते हुए महापौर ने सामान्य सदन की जगह विशेष सदन की बैठक बुलाने को कहा है। इसमें एजेंडा जारी करने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि महापौर ने पत्र में यह कहा है कि पिछले प्रस्तावों पर चर्चा होगी तो इसे ही एजेंडा माना जाएगा। विशेष सदन खास मुद्दे को लेकर बुलाया जाता है।
विज्ञापन
टकराव में अटका नगर निगम का पुनरीक्षित बजट
महापौर और नगर आयुक्त में टकराव के नगर निगम का पुनरीक्षित बजट अटका हुआ है। जानकारों का कहना है कि अक्तूबर में जो सामान्य कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई थी, उसकी जगह विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए थी, ताकि बजट पास किया जा सकता। बजट पास करने के लिए विशेष बैठक बुलानी पड़ती है। सामान्य में यह पास नहीं किया जा सकता। ऐसे में बजट को जानबूझकर आपसी टकराव में लटकाया गया। जिसका असर शहर की जनसुविधाओं पर पड़ेगा।
सदन में हो सकता है शक्ति प्रदर्शन
टकराव को लेकर यह चर्चा हो रही है कि प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए सदन में शक्ति प्रदर्शन हो सकता है। दो दिन पहले महापौर के सरकारी आवास पर पार्षदों की हुई विशेष बैठक को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, महापौर किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन से इन्कार कर रही हैं, लेकिन जिस तरह से 14 को सदन की बैठक बुलाने को लेकर राजनीति चल रही है, उससे यही चर्चा हो रही है।
विज्ञापन
सोमवार को महापौर ने नगर निगम का सामान्य सदन बुलाने के लिए पत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था पुराने प्रस्तावों पर चर्चा की जाए। सामान्य सदन होने के नाते इसमें नए प्रस्तावों को भी शामिल करना पड़ता। उसके लिए पार्षदों और विभागों से प्रस्ताव मांगने पड़ते। इससे कई दिन का समय लगता और 14 को सदन की बैठक नहीं हो पाती।
विज्ञापन
इसके अलावा सदन बुलाने के लिए नगर निगम अधिनियम के तहत 96 घंटे पहले एजेंडा व सूचना भी जारी करनी होती है, चूंकि एजेंडा तैयार करने में ही 10 दिन से अधिक का समय लग जाता तो बैठक टालनी पड़ती। इसे देखते हुए महापौर ने सामान्य सदन की जगह विशेष सदन की बैठक बुलाने को कहा है। इसमें एजेंडा जारी करने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि महापौर ने पत्र में यह कहा है कि पिछले प्रस्तावों पर चर्चा होगी तो इसे ही एजेंडा माना जाएगा। विशेष सदन खास मुद्दे को लेकर बुलाया जाता है।
विज्ञापन
टकराव में अटका नगर निगम का पुनरीक्षित बजट
महापौर और नगर आयुक्त में टकराव के नगर निगम का पुनरीक्षित बजट अटका हुआ है। जानकारों का कहना है कि अक्तूबर में जो सामान्य कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई थी, उसकी जगह विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए थी, ताकि बजट पास किया जा सकता। बजट पास करने के लिए विशेष बैठक बुलानी पड़ती है। सामान्य में यह पास नहीं किया जा सकता। ऐसे में बजट को जानबूझकर आपसी टकराव में लटकाया गया। जिसका असर शहर की जनसुविधाओं पर पड़ेगा।
सदन में हो सकता है शक्ति प्रदर्शन
टकराव को लेकर यह चर्चा हो रही है कि प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए सदन में शक्ति प्रदर्शन हो सकता है। दो दिन पहले महापौर के सरकारी आवास पर पार्षदों की हुई विशेष बैठक को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, महापौर किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन से इन्कार कर रही हैं, लेकिन जिस तरह से 14 को सदन की बैठक बुलाने को लेकर राजनीति चल रही है, उससे यही चर्चा हो रही है।