जरूरी खबर: अब 20 के बजाय 15 मिनट में ही पहुंचेगी एंबुलेंस, एप से रखी जाएगी नजर
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उत्तर प्रदेश में सरकारी एंबुलेंस सेवा 108 और 102 का संचालन बेहतर बनाने की कवायद तेज हो गई है। संचालन की दिक्कतों से निपटने के लिए कंट्रोल रूम से मोबाइल एप के जरिए नजर रखी जाएगी।
एप से एंबुलेंस की लोकेशन का सटीक पता चल सकेगा कि वह अस्पताल में है, कहीं जाम में फंसी है या मरीज को लेने जा रही है। इससे यह तय हो सकेगा कि कौन सी एंबुलेंस कहां है और कितनी देर में मरीज के पास पहुंचेगी। यही नहीं 108 सेवा के बेड़े में जल्द ही 712 नई एंबुलेंस बढ़ जाएगी। इससे एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम 20 मिनट से घटकर 15 मिनट होने की उम्मीद है।
एंबुलेंस सेवा की संचालक कंपनी जीवीके ईएमआर के स्टेट हेड धनंजय कुमार ने बताया कि जल्द ही यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कॉल रिसीव होने के बाद 15 मिनट में जरूरतमंद तक एंबुलेंस पहुंचेगी और मरीज को फर्स्ट एड देने के साथ ही उसे अस्पताल पहुंचाएगी।
प्रदेश में 108 बेड़े की 1488 एंबुलेंस और 102 बेडे़ की 2270 एंबुलेंस चल रही हैं। साथ ही एडवांस लाइफ सपोर्ट सेवा की 250 एंबुलेंस चल रही हैं। उन्होंने बताया कि 108 सेवा में 712 नई एंबुलेंस बढ़ेंगी जिससे इनकी संख्या बढ़कर 2200 हो जाएगी। गौरतलब है कि यह कवायद दो दिन पहले हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के एंबुलेंस सेवा के संचालन की शिकायतों पर नाराजगी जताने के बाद शुरू हुई है।
मरीजों को कम समय में मिल सकेगी सुविधा
प्रदेश में यह सेवा 2012 में शुरू हुई थी। इस बार हुए कंपनी और सरकार के बीच हुए में एंबुलेंस संचालन को बेहतर बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। इसमें रिस्पांस सेंटर पर कॉल रिसीव करने और एंबुलेंस को भेजने के लिए जरूरी उपकरणों और मानव संसाधन की पर्याप्त व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखने की मुख्य शर्त रखी गई है।
108 के बेड़े में 712 नई बसें बढ़ाने की योजना इसी शर्त की एक कड़ी है। इससे एंबुलेंस सेवा के रिस्पॉन्स टाइम में कमी लाने का प्रयास है। अब तक कॉल रिसीव होने के 20 मिनट में एंबुलेंस मुहैया कराने का नियम है, लेकिन एंबुलेंस की संख्या में बढ़ोतरी और एप से निगरानी के जरिए रिस्पॉन्स टाइम 15 मिनट करने का प्रयास है।