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अंबेडकर पार्क समिति की 325 करोड़ रुपये की एफडी की होगी जांच
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अंबेडकर पार्क समिति की 325 करोड़ की एफडी की होगी जांच।
- फोटो : ??? ?????
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अंबेडकर पार्क स्मारक समिति की 325 करोड़ रुपये की सभी एफडी की जांच होगी। इसके लिए एलडीए ने समिति गठित कर दी है। वहीं, 10 करोड़ रुपये के गबन के मामले में निलंबित प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि उपाध्याय की भूमिका को भी संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू हो गई है।
मुख्य प्रबंधक व एलडीए सचिव पवन गंगवार ने बताया कि समिति के कॉर्पस फंड के 276 करोड़ रुपये और कर्मचारियों के जीपीएफ को मिलाकर करीब 325 करोड़ रुपये की एफडी अलग-अलग सरकारी बैंकों में कराई गई हैं।
इनकी जांच के लिए सदस्य सचिव के आदेश पर चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। एलडीए के वित्त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह की देखरेख में यह जांच होगी।
जांच समिति में उनके साथ ओएसडी रामशंकर, सहायक लेखाधिकारी विनोद श्रीवास्तव, लेखाकार विनोद अवस्थी को रखा गया है। यह समिति 15 दिन में वीसी एलडीए व सदस्य सचिव अक्षय त्रिपाठी को रिपोर्ट देगी।
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चार महीने तक दबाए रखी गबन की जानकारी
सदस्य सचिव ने निलंबन आदेश में कहा कि प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि त्रिपाठी की जिम्मेदारी थी कि एफडी के लिए 31 मार्च को दी गई राशि का मिलान एफडी प्रपत्रों से करते। करीब चार महीने के बाद उनकी तरफ से रिपोर्ट अगस्त में दी गई कि 38 करोड़ की ही एफडी अभी तक की गई है। इसके बाद संज्ञान में आया कि बैंक ऑफ बड़ौदा की रोशनाबाद शाखा के प्रबंधक नागेंद्र पाल द्वारा जाली दस्तावेज तैयार कर गबन की कार्रवाई की गई है। 12 अगस्त को आदेश के बाद भी समिति के सभी एफडी के प्रपत्रों का सत्यापन कर रिपोर्ट नहीं दी गई।
समिति की छवि खराब हुई
एलडीए के अधिकारियों का मानना है कि प्रबंधक वित्त की वजह से समिति की छवि खराब हुई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की जांच जरूरी है। निलंबित प्रबंधक वित्त को सदस्य सचिव के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उनके कृ त्यों की जांच अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा करेंगे।
छह लाख रुपये हर महीने ब्याज
अंबेडकर पार्क समिति का जो दस करोड़ रुपये की राशि गायब हुई है। उसका हर महीने का ब्याज ही छह लाख रुपये है। ऐसे में समिति ने बैंक से मांग रखी है कि यह रकम ब्याज सहित खाते में लौटाई जाए।
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मुख्य प्रबंधक व एलडीए सचिव पवन गंगवार ने बताया कि समिति के कॉर्पस फंड के 276 करोड़ रुपये और कर्मचारियों के जीपीएफ को मिलाकर करीब 325 करोड़ रुपये की एफडी अलग-अलग सरकारी बैंकों में कराई गई हैं।
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इनकी जांच के लिए सदस्य सचिव के आदेश पर चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। एलडीए के वित्त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह की देखरेख में यह जांच होगी।
जांच समिति में उनके साथ ओएसडी रामशंकर, सहायक लेखाधिकारी विनोद श्रीवास्तव, लेखाकार विनोद अवस्थी को रखा गया है। यह समिति 15 दिन में वीसी एलडीए व सदस्य सचिव अक्षय त्रिपाठी को रिपोर्ट देगी।
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चार महीने तक दबाए रखी गबन की जानकारी
सदस्य सचिव ने निलंबन आदेश में कहा कि प्रबंधक वित्त देवेंद्र मणि त्रिपाठी की जिम्मेदारी थी कि एफडी के लिए 31 मार्च को दी गई राशि का मिलान एफडी प्रपत्रों से करते। करीब चार महीने के बाद उनकी तरफ से रिपोर्ट अगस्त में दी गई कि 38 करोड़ की ही एफडी अभी तक की गई है। इसके बाद संज्ञान में आया कि बैंक ऑफ बड़ौदा की रोशनाबाद शाखा के प्रबंधक नागेंद्र पाल द्वारा जाली दस्तावेज तैयार कर गबन की कार्रवाई की गई है। 12 अगस्त को आदेश के बाद भी समिति के सभी एफडी के प्रपत्रों का सत्यापन कर रिपोर्ट नहीं दी गई।
समिति की छवि खराब हुई
एलडीए के अधिकारियों का मानना है कि प्रबंधक वित्त की वजह से समिति की छवि खराब हुई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की जांच जरूरी है। निलंबित प्रबंधक वित्त को सदस्य सचिव के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उनके कृ त्यों की जांच अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा करेंगे।
छह लाख रुपये हर महीने ब्याज
अंबेडकर पार्क समिति का जो दस करोड़ रुपये की राशि गायब हुई है। उसका हर महीने का ब्याज ही छह लाख रुपये है। ऐसे में समिति ने बैंक से मांग रखी है कि यह रकम ब्याज सहित खाते में लौटाई जाए।