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Amarujala Krishika 2024: कृषि नवाचार में तकनीक के प्रयोग पर चर्चा, खेती से लेकर विपणन तक के बदलाव किए रेखांकित

Tue, 10 Dec 2024 10:22 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 10 Dec 2024 10:22 AM IST
सार

राजधानी लखनऊ में सोमवार को अमर उजाला कृषिका कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सुबह 10 बजे से हुआ। इसका समापन शाम 5 बजे हुआ। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर सीएम ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया।

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Amarujala Krishika: Discussion on use of technology in agricultural innovation changes in farming highlighted
जानकारी देते विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में छोटे काश्तकार ज्यादा हैं। पहले उनके लिए उपज की बिक्री सिर्फ मंडियों तक सीमित रहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। पिछले छह साल में डायरेक्ट मार्केटिंग और कलेक्शन सेंटरों का जाल बिछाया गया है। निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ी है। स्टेट एग्री पॉलिसी बनाई गई है। लिहाजा अन्य राज्य ही नहीं, बल्कि विदेश तक उपज बेचने के रास्ते खुल गए हैं।

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यह कहना है सहायक निदेशक विपणन डॉ. संजय कुमार का। वह कृषि नवाचार में तकनीक का प्रयोग, विपणन व विदेश व्यापार एवं स्टार्टअप विषयक सेमिनार में बोल रहे थे। प्रोडक्ट मार्केटिंग के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पीपीपी मॉडल पर प्रदेश में काफी काम हो रहा है। इसका नतीजा यह है कि आज किसान पूरी दुनिया में अपनी उपज को बेच सकते हैं। इसके रास्ते सरकार ने खोल दिए हैं।
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उप्र. कृषि विविधीकरण योजना (डास्प) की डिजिटल एक्सपर्ट राजश्री ने कहा, तकनीक से बदलाव आ रहा है। अब ड्रोन व एआई की मदद से खेती हो रही है। इसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं। स्टार्टअप विशेषज्ञ संदीप सक्सेना ने खेती में नवाचार की भूमिका बताई। कहा, नवाचार से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

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अनुसंधान पर भी फोकस

पीपीपी मॉडल पर डास्प के जरिये काफी काम हो रहा है। इसमें दो प्रमुख प्रोजेक्ट हैं, पहला-मक्का व दूसरा-आलू की वैल्यू चेन विकसित करना। अनुसंधान पर भी फोकस है। चर्चा में मॉडरेटर की भूमिका उत्कर्ष चतुर्वेदी ने निभाई। उन्होंने विशेषज्ञों से सवाल-जवाब किए। 


चर्चा के दौरान मुनाफे लायक खेती कैसे की जाए सवाल पर विशेषज्ञों ने इंडिया ट्रेड पोर्टल की जानकारी दी। बताया कि पोर्टल से किसान जानकारी हासिल कर सकते हैं। मसलन, यूरोपीय यूनियन में फसल बेचने के लिए प्रमाणन अनिवार्य है। किसानों के क्षमतावर्धन पर भी चर्चा हुई।

एडवाइजरी के लिए बनाए कमांड सेंटर

राजश्री ने बताया कि डास्प के तहत कमांड सेंटर बनाया गया है। यह सेंटर एडवाइजरी का काम कर रहा है। इसमें मिट्टी, मौसम, फसलों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। ताकि उत्पादन अधिक हो। अभी यह 21 फसलों पर काम कर रहा है।

नवाचार से बढ़ाया जा सकता है उत्पादन

स्टार्टअप विशेषज्ञ संदीप सक्सेना ने खेती में नवाचार की भूमिका बताई। कहा, नवाचार से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। पंजाब में किसान एक एकड़ खेत सिर्फ इसलिए रखते हैं, ताकि उसमें रिसर्च आधारित फसलों की बोआई कर नवाचार कर सकें। यह एक स्वस्थ परंपरा है। कहा, अब शोध आधारित खेती करने का समय आ गया है

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