अमर उजाला संगम: एक साथ मिला कई राज्यों के पकवानों को चखने का मौका, राजस्थानी थाली के साथ रास आए छोले भटूरे
Amar Ujala Sangam: अमर उजाला संगम कार्यक्रम में कई राज्यों के पकवान लोगों को चखने के लिए उपलब्ध थे। करीब-करीब हर स्टॉल में लोगों की भीड़ दिखी।
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विस्तार
संस्कृतियों का महाकुंभ में रिवरफ्रंट पर कश्मीर से लेकर बंगाल, उड़ीसा, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात समेत देश भर के समाज एक ही जगह जुटे तो खानपान की विविधताओं अनूठा मेल देखने को मिला। राजस्थानी थाली में परोसे 56 व्यंजनों का लोगों ने जहां लुत्फ उठाया तो वहीं समावर-कांगडी ने कश्मीर के कहवा की याद ताजा कर दी। अलग-अलग प्रदेशों के जायके एक ही जगह पाकर लोग प्रफुल्लित नजर आए। हर स्टाॅल अपने आप में अनूठा, जानकारी और व्यंजनों के स्वाद से भरपूर था।
मराठी दाबेली मिसल पाव ने लुभाया
मराठी समाज के स्टॉल पर स्थानीय व्यंजनों की सजावट देखने को मिली। यहां दाबेली मिसल पाव को चखकर लोग अपनी अंगुलियां चाटते नजर आए। इसके अलावा मिक्स अचार को भी खूब पसंद किया गया। इस स्टॉल पर कोल्हापुरी ठेचा की भी खूब मांग रही।
गुजरात की स्पेशल उधयू ने ढोकला-फाफड़ा को भी पछाड़ा
गुजरात राज्य की विशेषता दर्शाने के लिए प्रदीप नागर और मीनू नागर ने गुजराती व्यंजनों और पकवानों का स्टॉल लगाया। इसमें स्थानीय उधयू की सब्जी की रेसिपी ने सभी के मन को छू लिया। हर कोई इस सब्जी को खाने के लिए आतुर दिखा। इसकी लज्जत ऐसी थी कि इसने गुजरात के मशहूर ढोकला-फाफडा और गाठिया को भी पीछे छोड़ दिया।
राजस्थानी थाली देख बोले- कैसे खाएंगे
राजस्थान के पोखरण जिले के विनोद माहेश्वरी के स्टॉल पर राजस्थानी थाली की चर्चा हर किसी की जुबां पर रही। 56 व्यंजनों से सजी थाली में शामिल गुझिया, चार प्रकार के गट्टे की सब्जी, घेवर, चूरमा, पकौड़ी, गुलाब जामुन, सेवईं आदि देख लोग यही कह रहे थे कि अकेले कैसे खा पाएंगे। इस पर उनके सामने यह विकल्प रखा गया कि वह अपनी मनपसंद चीज खाने में ले सकते हैं। स्टॉल पर सहयोगी के तौर पर ऋतु माहेश्वरी और शोभा मालपानी उपस्थित रहीं।
मक्के की रोटी सरसों के साग ने दिलाई गांव की याद
पंजाब के खानपान को दर्शाने के लिए मनमोहन सिंह और हरजस पाल के रंगला पंजाब ढाबे ने वहां की संस्कृति को दिखाया। स्टॉल पर मक्के की रोटी और सरसों का साग खाकर लोगों को शहर में गांव का आनंद आ गया। इसके साथ प्याज-इमली की चटनी और मीठे में गुलाब जामुन ने उनका स्वाद बना दिया।
बाल मिठाई और भांग की चटनी का कोई सानी नहीं
उत्तराखंड के स्टॉल पर बाल मिठाई और भांग की चटनी की खूब चर्चा रही। इसके साथ ही भट्ट की दाल भी लोगों ने खूब चखी। बताया गया कि पहाड़ के लोगों को यह दाल प्रोटीन की कमी को पूरा करने में अहम मानी जाती है। पुष्पा वैष्णव, सीतानेगी, हेमा बिष्ट, देवेश्वरी पवार आदि की मौजूदगी रही।
ठेकुआ ने दिलाई छठ की याद
भोजपुरी समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ राय की ओर से लगाए गए स्टॉल पर पूर्वांचल नजर आया। जहां पर ठेकुआ ने लोगों को छठ की याद दिलाई तो बाटी-चोखा, लइया, तिल के लड्डू और गुड़ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के खानपान से परिचित करवाया।
नाड़ू प्रसाद ने बनाया दिन
बंगाली समाज की ओर से नाड़ू प्रसाद व अन्य बंगाली व्यंजनों के स्टॉल लगे। दुकान मालिक मीनू रॉय ने बताया कि यह प्रसाद देवी दुर्गा व देवी लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है। नारियल को घिसकर खजूर के गुड़ में इसे पकाकर बनाया जाता है। दुकान पर बंगाली खीर, मालपुआ, रसबड़ा आदि भी खूब चर्चित रहे।
उड़िया समाज के पारंपरिक व्यंजनों ने लुभाया
उड़िया समाज की ओर से उड़ीसा की संस्कृति को दर्शाया गया। यहां के समाज के स्टॉल पर प्रभु जगन्नाथ को लगने वाले खाजा का भोग, छेना पोड़, मण्डा पीठा, हल्दी पत्र पर पारंपरिक एण्डुरी पीठा आदि व्यंजनों का प्रदर्शन किया। यह समाज 1980 से लखनऊ में रह रहा है। स्टॉल पर कपिल चंद्र पंडा, पद्मावती पंडा व जोशमनी देवी मौजूद रहीं।
उत्पम-इडली खिलाकर बोले वड़क्कम
केरल समाज की ओर से स्टॉल पर दक्षिण भारतीय व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। इस स्टॉल के ऑनर जेंशन जेम्स ने लोगों को उत्पम, इडली, सांभर, खिलाकर बोला वड़क्कम और दक्षिण भारतीय संस्कृति से भी रूबरू करवाया। यहां राजीव नायर, साजू पी. नायर, सुप्रभा सुरेश व मीना राजीव की मौजूदगी रही।
तमिल के पोंगल और रवा केसरी ने मोहा मन
तमिल समाज की ओर से प्रसिद्ध और पारंपरिक व्यंजन पोंगल व रवा केसरी परोसा गया। इसके स्वाद ने सभी का मन मोह लिया। इस मौके पर मेड्डु बड़ा, दाल बड़ा, मोलाकार पराठा, वेज मसाला उत्पम व अन्य व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया गया। स्टॉल पर मुर्गेसन, रवि व अन्य लोग मौजूद रहे।
सब्जी वाली कढ़ी ने बनाया स्वाद
सिंधी समाज की ओर से लगे स्टॉल पर कढ़ी चावल, दाल पकवान, सेवईं परोसी गई। इसमें लोगों को कढ़ी कुछ ज्यादा भा गई जो आम तौर बेसन वाली कढ़ी की जगह मिक्स सब्जियों से बनी हुई थी। यहां सुरेश छबलानी, रमेश सिंह, शिशिर सिंह, अनूप सिंह व शिवम मौजूद रहे।
समावर व कांगडी ने दिलाई कहवा की याद
कश्मीरी समाज के स्टॉल पर प्रदर्शनी के लिए लगाए गए समावर और कांगड़ी ने लोगों को डल झील में शिकारा पर सैर के समय गर्म कहवे की याद दिला दी। यहां लोगों को कश्मीर में बनाए जाने वाले व्यंजनों की भी जानकारी दी गई। इसमें दम आलू और कश्मीरी पनीर प्रमुख रहे।