दलालों के चंगुल में केजीएमयू, अमर उजाला रिपार्टर ने खोली पोल, ऐसे काम करता है गिरोह
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एक दलाल ने पहले छूट पर दवा दिलाने की बात कही, रिपोर्टर ने अनसुना किया तो दूसरे दलाल ने अच्छा इलाज के लिए निशातगंज के एक निजी अस्पताल ले जाने की सलाह देने लगा, जब उन्होंने फिर मना किया तो अंत में दलालों ने कहा कि लिंब सेंटर में इलाज कराओगे तो हाथ तक कटवाना पड़ेगा। केजीएमयू में कैसे काम कर रहा है दलालों गिरोह, पढ़िए पूरी कहानी ‘अमर उजाला’ रिपोर्टर की जुबानी...।
लिंब सेंटर : दोपहर 12 बजे
दवा दुकान का विजिटिंग कार्ड थमाया, बोला 20 फीसदी मिलेगी छूट
जब मैं मंगलवार को लिंब सेंटर से बाहर निकल रहा था तो वाहन स्टैंड के पास तीन लोगों ने मुझे रोक लिया। मेरे हाथ में प्लास्टर बंधा था। वे कपूरथला स्थित हड्डी अस्पताल और फिर निशातगंज में कम पैसों में अच्छा इलाज का झांसा देने लगे।
बोले, निशातगंज में केजीएमयू के ही रिटायर्ड डॉक्टर बैठते हैं। मैंने इन्कार किया तो उसे हड्डी न जुड़ने का डर दिखाने लगे। कहने लगे कि उनके परिवार के एक व्यक्ति का हाथ फ्रैक्चर हो गया था। लिंब सेंटर में इलाज कराने के चक्कर में हाथ कटवाना पड़ा। इसी तरह लिंब सेंटर स्थित ऑर्थो ओपीडी के बाहर भी कई लोग बच्चे लेकर आई महिलाओं में बरगलाने में लगे रहे।
यहां से दवा का पर्चा लेकर बाहर निकलने वाले तीमारदारों को कुछ लोग एक मेडिकल स्टोर का कार्ड थमा रहे थे। यह भी बताते थे कि संबंधित मेडिकल स्टोर पर 20 प्रतिशत कम मूल्य पर दवाएं मिल जाती हैं। खास बात यह है कि मरीज के पर्चे पर जो दवाएं डॉक्टर ने लिखी थीं, वे दवाएं न तो यहां खुली अमृत फार्मेसी पर थीं न ही सोसाइटी के मेडिकल स्टोर पर।
मरीजों से बोले दलाल...केजीएमयू में दवा के नाम पर देते हैं खड़िया
न्यू ओपीडी ब्लॉक, दोपहर 01 बजे का हाल
न्यू ओपीडी मरीजों से खचाखच भरी थी। डॉक्टर को दिखाने के बाद मैं बाहर निकला तो एक युवक 10 प्रतिशत छूट तो दूसरा 20 प्रतिशत छूट पर दवा दिलाने की बात मरीजों से कह रहे थे। सीतापुर से आई राधा और उसकी बहन मंजू ने उन्हें डपट दिया तो दलाल केजीएमयू के अंदर मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दवाओं को खड़िया मिट्टी बता डराने लगे।
थोड़ी देर में उन्नाव से आए श्याम सुंदर पर्चा लेकर बाहर निकले तो उन्हें भी गिरोह के सदस्य बाहर से सस्ते दाम पर दवा दिलाने की बात कर बरगलाने लगते हैं। इस बीच उधर से कई कई एसोसिएट प्रोफेसर, सीनियर व जूनियर रेजिडेंट भी निकले, लेकिन दलालों को सभी अनदेखा करते रहे।
इस तरह डराया... यहां छात्र करते हैं इलाज, जान भी जा सकती है
ट्रॉमा सेंटर : दोपहर-2:30 बजे
ट्रॉमा सेंटर गेट पर तीमारदारों की भीड़ लगी थी। मैं वहां पहुंचा तो गार्ड भीड़ होने की बात कह कर रोक रहा था। इससे कुछ तीमारदार बाहर बने टीन शेड के पास आ गए। ये लोग तीमारदारों को ट़ॅमा सेंटर की अव्यवस्थाओं का हवाला दे डराते हैं। कहते हैं कि यहां तो पढ़ाई करने वाले छात्र मरीजों का इलाज करते हैं। इससे कभी भी मरीज की जान जा सकती है।
इसी बीच एंबुलेंस से एक मरीज पहुंचता है। पेड़ से गिरने की वजह से घायल रामू के साथ उसके भाई और एक रिश्तेदार मौजूद हैं। ये लोग रामू को कैजुअलिटी रूम में मिलने जाना चाहते हैं, लेकिन स्ट्रेचर पकड़ने वाला शख्स उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की सलाह देता है। वह कैजुअलिटी रूम में भी घुस जाता है। उसका चेहरा देख एक जूनियर रेजिडेंट फटकारता है, तब जाकर वह बाहर निकलता है।
केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार बोले, ‘गुपचुप निगरानी कर जानेंगे हकीकत’
सवाल - ट्रॉमा सेंटर से लेकर ओपीडी तक दलालों का गिरोह सक्रिय है। इन पर लगाम क्यों नहीं?
जवाब - अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए स्टाफ तत्पर रहता है। दवाओं का भी इंतजाम है। अभी तक किसी मरीज ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की है फिर भी गुपचुप निगरानी की जाएगी। मरीजों को बरगलाने नहीं दिया जाएगा।
सवाल - तो इसके लिए क्या रणनीति अपनाएंगे?
जवाब - सभी विभागाध्यक्षों को अलर्ट करेंगे। उन्हें इस शिकायत से वाकिफ कराते हुए कहेंगे कि मरीज को दवाएं वहीं लिखें जो अस्पताल में मौजूद हों। वार्ड बॉय से लेकर स्टाफ नर्स व सुरक्षा कर्मी देखेंगे कि किसी तीमारदार को कोई व्यक्ति बरगला तो नहीं रहा है। ऐसे लोग पकड़े गए तो उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
सवाल - ट्रॉमा सेंटर में घुसे दलाल गिरोह के सदस्य को जेआर ने पहचान लिया था। इससे साफ है कि वे स्टाफ से मिले हुए हैं।
जवाब -ट्रॉमा सेंटर में तो मरीजों की अपार भीड़ रहती है। यहां सबसे ज्यादा मरीजों का दबाव है। यह भीड़ केजीएमयू के विभागों में बेहतर इलाज मिलने का प्रमाण है। मरीजों को विश्वास है कि यहां आने के बाद उनकी जान बच जाएगी। फिर भी मामला सामने आया है तो सुरक्षा कर्मियों से लेकर मरीज सहायकों तक को अलर्ट किया जाएगा।