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मैं मुलायम परिवार का सदस्य नहीं हूं, बाहरी हूं: अमर सिंह

Mon, 26 Dec 2016 06:57 PM IST
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 26 Dec 2016 06:57 PM IST
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Amar singh interview.
अमर सिंह - फोटो : amar ujala

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य अमर सिंह सपा के कांग्रेस से गठबंधन के सवाल को यह कहकर टाल देते हैं कि यह मेरे स्तर की बात नहीं है। कार्यकर्ता की हैसियत से हमें जो आदेश मिलेगा, उसका पालन करेंगे।

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वह कहते हैं, कांग्रेस से संबंधों को लेकर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और हमारे कटु अनुभव हैं लेकिन गांधी परिवार से हमारे मधुर संबंध हैं। राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी से रिश्ते राजनीति से इतर हैं। सपा में बाहरी कहे जाने को वह गर्व की बात बताते हैं।
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कहते हैं कि जो बोलता और डोलता नहीं है, वह संत या नेता नहीं बन सकता। राजधानी आए अमर सिंह ने शनिवार को अपने गोमती नगर स्थित आवास पर ‘अमर उजाला’ से तमाम सवालों पर बेबाकी से बात की। पेश है प्रमुख अंश-
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सवाल - आपके लखनऊ आने का एजेंडा क्या है ?

जवाब
- लखनऊ मेरा घर है, क्या घर नहीं आ सकता। मैं लखनऊ से तड़ीपार तो किया नहीं गया हूं। लखनऊ आता ही रहता हूं?

'मैंनें कभी नहीं कहा कि अखिलेश न बुलाएंगे तो नहीं जाऊंगा'

Amar singh interview.

सवाल - आपने कहा था कि जब तक अखिलेश यादव नहीं बुलाएंगे, लखनऊ नहीं आऊंगा।

जवाब
- नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा था। मैंने रजत जयंती समारोह के लिए कहा था कि यदि अखिलेश यादव निमंत्रण नहीं देंगे तो मैं नहीं आऊंगा। उन्होंने नहीं बुलाया तो मैं उस समारोह में नहीं आया।

सवाल - आपकी शिवपाल यादव से मुलाकात हुई, क्या बातें हुईं ?

जवाब
- शिवपाल से मुलाकात में खबर मत देखिए। उनसे हमारे अच्छे रिश्ते हैं। वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, मैं राष्ट्रीय महासचिव हूं। दोनों संगठन में काम करते हैं। इस मुलाकात को ऐसे मानिए जैसे कोई मंत्री, मुख्यमंत्री से मिले। शिवपाल बसपा या किसी दूसरे दल में तो हैं नहीं, जो उनसे न मिलूं।

सवाल - मुलायम सिंह से सूबे की सियासत पर क्या चर्चा हुई ?

जवाब
- निश्चित रूप से राजनीति को लेकर बातचीत हुई है लेकिन बंद कमरे की बातचीत बंद कमरे तक ही रहे तो अच्छा है। अंदर की बात को सार्वजनिक करने पर पछतावा करना पड़ता है। जिस नीति की नीयत का पता चल जाए वह राजनीति कहां है? कुछ बातें गोपनीय ही रहनी चाहिए।

'गठबंधन मेरे स्‍‌तर की बात नहीं'

Amar singh interview.

सवाल - क्या सपा का कांग्रेस या रालोद से गठबंधन हो रहा है?

जवाब
- गठबंधन मेरे स्तर की बात नहीं है। यह ठीक है कि मैं राष्ट्रीय महासचिव हूं लेकिन रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरनमय नंदा भी महासचिव या उपाध्यक्ष हैं, सब बड़े नेता हैं। उन्हें ज्यादा पता होगा। वे मुख्यमंत्री के भी नजदीक हैं। हमें कार्यकर्ता की हैसियत से जो आदेश मिलेगा, उसका पालन करूंगा। कैसे झंडा पकड़ना है, नारे लगाने हैं, वैसा ही करूंगा।

सवाल - आपने कहा था कि कांग्रेस से नेताजी और हमारे कटु अनुभव हैं?

जवाब
- यह अधूरी बात है, मैंने कहा था कि नेताजी और हमारे कांग्रेस से संबंधों के कटु अनुभव हैं लेकिन गांधी परिवार से उतने ही मधुर रिश्ते हैं, अनुभव हैं। नेताजी और हमारे रिश्ते राहुल, प्रियंका और सोनिया से राजनीति से इतर हैं। हमने मुलायम सिंह से सीखा है कि व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्ते अलग-अलग हैं।

एक बार नेताजी के धुर विरोधी ब्रह्मदत्त द्विवेदी हमारे पास किसी काम से आए। हमसे कहा कि नेताजी को पता नहीं लगना चाहिए। नेताजी उस समय मुख्यमंत्री थे। हमने उनके सामने ही नेताजी से बात की। नेताजी ने द्विवेदी को बुलाया, अपने बराबर की कुर्सी पर बैठाया और काम किया।

कहा, अमर सिंह से जाकर बता देना कि हमने कैसा बर्ताव किया है। हमने मुलायम सिंह के सानिध्य में राजनीति सीखी है, कांग्रेस और गांधी परिवार के बीच रिश्तों का सूक्ष्म अध्ययन किया है।

'महत्वपूर्ण पदों पर बैठने के बाद निजी राय नहीं होती'

Amar singh interview.

सवाल - कांग्रेस से गठबंधन को लेकर आपकी निजी राय क्या है ?

जवाब
- ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर निजी राय नहीं होती। मैं पार्टी का महासचिव हूं, संसदीय बोर्ड में हूं। महत्वपूर्ण पदों पर बैठने के बाद निजी राय नहीं होती।

सवाल - सपा में शीर्ष स्तर पर गहरे अंतर्विरोध हैं?

जवाब
- पता नहीं आपको कहां मतभेद दिखते हैं ? नेताजी बाग हैं और अखिलेश डाल हैं, नेताजी समुद्र हैं तो अखिलेश नदी हैं, धारा हैं, नेताजी निर्माता हैं, अखिलेश निर्माण हैं। सपा की सरकार सिर्फ 5 साल से नहीं है, पहले भी रही है। वर्तमान की सत्ता अतीत के संघर्ष की परिणति है। अब तो सरकार के विज्ञापनों में भी दिख रहा है कि अखिलेश ने पिता की प्रेरणा से द्रुत गति से विकास किया। फिर अंतर्विरोध कहां हैं। यह तथ्य है कि मुलायम, अखिलेश के पिता हैं और सपा के भी पिता हैं। दोनों के सिर पर नेताजी की छत्रछाया और आशीर्वाद है। समुद्र (नेताजी) की कोलाहल से विरोधी परेशान हैं।

Amar singh interview.

सवाल - क्या पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर इसका कोई असर ...?

जवाब
- आपको पता है कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओमप्रकाश माथुर के राजस्थान में वसुंधरा राजे से कितने मतभेद थे। इसके बावजूद वसुंधरा चुनाव जीतीं। माथुर सज्जन हैं, मेरे मित्र हैं लेकिन वसुंधरा से अंतर्विरोध के कारण उन्हें विघटनकारी तो नहीं कहा जा सकता। देखिए, मुंडे-मुंडे मतिर भिन्ना। यही लोकशाही का प्रतीक है। हर दल में एक नेता धुरी होता है। भाजपा की धुरी मोदी हैं तो सपा की धुरी मुलायम सिंह यादव।

सवाल - सीएम अखिलेश यादव विकास के एजेंडे पर चुनाव में जा रहे हैं, आपको कितना प्रभावी लगता है?

जवाब
- विकास का एजेंडा मुलायम सिंह की विरासत है। प्रदेश में साढ़े तीन साल में 27 नई चीनी मिलें मुलायम के मुख्यमंत्री काल में लगीं। रिहंद-2 बिजली परियोजना हो, उत्तराखंड की श्रीनगर परियोजना या रोजा बिजली संयंत्र, सब मुलायम की देन है। उन्होंने उप्र विकास परिषद बनाई थी। देश भर से तमाम उद्योगपति अपने निजी विमान से लखनऊ आकर विकास एजेंडे को आगे बढ़ाते थे। आजादी के बाद कांग्रेस राज में जितने पुल नहीं बने, उतने शिवपाल ने पीडब्लूडी मंत्री रहते बनवा दिए। घाघरा और चंबल तक पर पुल बने। सपा सरकार में हमेशा विकास हुआ है। सीएम अखिलेश ने विकास के कामों को आगे बढ़ाकर पिता का नाम रोशन किया है।

'मैं मुलायम परिवार का सदस्य नहीं हूं'

Amar singh interview.

सवाल - लेकिन मुख्यमंत्री तो आपको बाहरी कहते हैं?

जवाब
- मुझे बाहरी कहा नहीं जाता, मैं बाहरी ही हूं। मैं परिवार का सदस्य नहीं हूं। परिवार का नहीं तो बाहरी हुआ ना। विशेष रूप से घर से बाहर निकलकर बाहरी बन जाते हैं। बाहर निकलकर जो बोलना और डोलना बंद कर दे वह न संत हो सकता है और न ही नेता। मैं बोलता भी हूं, डोलता भी हूं। मुझे बाहरी होने पर गर्व है।

सवाल - रामगोपाल यादव ने कहा था कि अमर सिंह यूपी जाएंगे तो सही सलामत नहीं लौट पाएंगे, क्या आपको कोई डर है?

जवाब
- रामगोपाल का यह बयान तब आया था जब पार्टी से निकले हुए थे। वह पार्टी में वापस आ गए हैं इसलिए भयभीत होने का प्रश्न नहीं है। अब भय की प्रासंगिकता लुप्त हो गई है।

सवाल - भाजपा की रथयात्राओं का आज समापन हो रहा है, नोटबंदी का मुद्दा गरमाया हुआ है, आपको क्या लगता है?

जवाब
- देखिए हर दल को अपनी बात रखने का अधिकार है। नोटबंदी को 50 दिन पूरे होने वाले हैं। यह अवधि पूरी होने पर हम जैसे लोगों को, जो कालेधन के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी की इच्छा शक्ति के प्रबल समर्थक हैं, उनसे सवाल करने के लिए खुली छूट होगी। पूछ सकेंगे कि बैंकों में पैसा रहते हुए किसानों की बीज की समस्या का क्या हुआ? कालेधन के ‘उन्मूलन’ के बाद करोड़ों के नए नोटों के बंडल कहां से आ रहे हैं? हम अभी इसलिए चुप हैं कि प्रधानमंत्री के आर्थिक जनांदोलन की गति धीमी करने का आरोप लगने लगेगा। इसके बाद आम और खास को विश्लेषण की छूट होगी। उनकी प्रतिक्रियाएं आएंगी। मुझे लगता है, सबसे निचले स्तर पर हताशा और निराशा को देखते हुए चन्द्रबाबू नायडू और नीतीश की तरह बहुतों के सुर बदलेंगे।

'राजा या जनता में से एक अंत निश्चित है'

Amar singh interview.

सवाल - क्या इससे भाजपा को चुनाव में नुकसान होगा?

जवाब
- चाणक्य ने कहा है कि यदि पैसा रहते दवा, श्मशान और अस्पताल में उसका उपयोग नहीं हो पाए तो राजा या जनता में किसी एक का अंत निश्चित है। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि राजा और जनता दोनों सुरक्षित रहे। राजा अकेला होता है और जनता समूह में। 50 दिन बाद समूह की पीड़ा और वेदना राजा और उनके समर्थकों को विचलित कर सकती है। अभी 7 दिन बाकी हैं। हो सकता है कि प्रधानमंत्री कोई चमत्कार कर दें। यह भी ध्यान दीजिए कि देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्ष ने कहा है कि करेंसी की किल्लत एक साल तक चलेगी।

सवाल - क्या आपका सीएम अखिलेश यादव से मिलने का कोई प्रोग्राम है?

जवाब
- नहीं, मेरा अखिलेश से मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं है। न तो मैंने उनसे समय मांगा है और न ही उन्होंने बुलाया है। उन्होंने एक शेर के जरिये इशारों ही इशारों में अपनी बात कह दी-

‘‘हमसे आया न गया, तुमसे बुलाया न गया
  फासला प्यार का, दोनों से मिटाया न गया’’

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