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घर वापसी: हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी को रिहा कर वापस भेजने का दिया आदेश, जानिए क्या था मामला
Wed, 01 Jun 2022 06:52 AM IST
विजय पुंडीर
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ।
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ।
Published by: विजय पुंडीर
Updated Wed, 01 Jun 2022 06:52 AM IST
सार
इलाहबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक तासीन अजीम उर्फ लारेब खान को रिहा कर उसके घर वापस भेजना का आदेश केंद्र सरकार को दिया है। इसी के साथ ही मामले में दायर राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।
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इलाहबाद हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक पाकिस्तानी को जेल से रिहा कर उसके देश भेजने का आदेश केंद्र सरकार को दिया है। साथ ही कहा कि संविधान में प्रदत्त जीवन व स्वतंत्रता के मूल अधिकार भारत में रह रहे गैर भारतीयों को भी प्राप्त हैं।
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न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने यह आदेश पाकिस्तानी नागरिक तासीन अजीम उर्फ लारेब खान की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निस्तारित करते हुए दिया। साथ ही मामले में दायर राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याची को फर्जी दस्तावेज बनाने व इस्तेमाल करने समेत कई अन्य मामलों में दोषी करार देते हुए ट्रायल कोर्ट ने आठ साल की सजा सुनाई थी। उसके वर्ष 2014 में रिहा होने के बाद दर्ज हुए मुकदमे में उसे चार साल की फिर सजा सुनाई गई थी। 2018 में याची ने वह सजा भी पूरी कर ली है। ऐसे में अब उसे जेल में नहीं रखा जा सकता है।
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इन तर्कों पर सरकार की अपील खारिज
उधर, राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2006 के मुकदमे में सत्र अदालत की ओर से देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के प्रयास संबंधी विभिन्न धाराओं में पाकिस्तानी नागरिक को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन ऐसी किसी सूचना की जानकारी नहीं दे सका, जो पाकिस्तानी खुफि या एजेंसी को भेजी गई। यह जरूर सिद्ध किया गया कि उसने पाकिस्तान में जावेद नाम के शख्स को कुछ ई-मेल भेजे, लेकिन वे ई-मेल क्या थे, यह अभियोजन स्पष्ट नहीं कर सका है।
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यह भी सिद्ध नहीं किया जा सका है कि अभियुक्त किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि में संलिप्त था। सरकारी वकील ने दलील दी कि अभियुक्त को मिली सजा अपर्याप्त है, वह आईएसआई के एजेंट के तौर पर देश में काम कर रहा था। हालांकि, कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए, ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही माना और सरकार की अपील खारिज कर दी। पाकिस्तानी नागरिक की ओर से अदालत द्वारा नियुक्त न्याय मित्र ने बहस की। केंद्र सरकार की ओर से कोई पेश नहीं हुआ।
घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों का कबूला था अपराध
ट्रायल कोर्ट के समक्ष दिए बयान में उसने भारत में अवैध रूप से आने और कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाने के अपराध को कुबूल किया, लेकिन भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने जैसे आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि उसने जो अपराध किया, उसकी सजा उसे मिल चुकी है, उसे एक मौका दिया जाना चाहिए।
यह था मामला
तासीन अजीम को एसटीएफ ने 13 सितंबर, 2006 को गिरफ्तार किया था। वह लखनऊ में लारेब खान पुत्र गुलाब खान की नकली पहचान के साथ रह रहा था। वह मूलत: उत्तरी कराची के सेक्टर 11 एए मकान नंबर 522 का रहने वाला था। वह चार भाई और तीन बहनों में सबसे बड़ा था। उसके पिता का कराची में कांच का कारोबार था। उसके पास से फ र्जी ड्राइविंग लाइसेंस, हाईस्कूल, इंटर की मार्कशीट के साथ-साथ नक्शा और कुछ दस्तावेज मिले थे। वह दो-दो कम्पनियों के दफ्तर में काम भी कर चुका था। साथ ही राहुल सिद्धार्थ और फ रीउद्दीन के साथ पार्टनरशिप की कंपनी चला रहा था। एसटीएफ ने दावा किया था कि जांच में अभियुक्त का आईएसआई को सेना संबंधी और अन्य गोपनीय सूचनाएं जावेद द्वारा दिया जाना पाया गया था।