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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, टू फिंगर टेस्ट पर रोक

Sat, 30 Aug 2014 11:45 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 30 Aug 2014 11:45 AM IST
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allahabad high court makes DNA test compulsory in rape cases.

हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की हर घटना की वैज्ञानिक पद्धति से जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म और मर्डर की वारदातों में मृतका और अभियुक्त के डीएनए टेस्ट आवश्यक रूप से कराए जाएं।

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इससे गुनहगारों के खिलाफ महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं। कोर्ट ने इस संबंध में सूबे के अफसरों को व्यापक दिशा निर्देश दिए हैं। साथ ही दुराचार पीड़िता का ‘टू फिंगर टेस्ट’ किए जाने को भी भी गलत करार देते हुए इस पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
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बदायूं में नाबालिग लड़की से दुराचार के बाद हत्या करने के मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी अख्तर की अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमर सरन और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने डीजीपी, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य और निदेशक अभियोजन को इस संबंध में आवश्यक नीतियां विकसित करने का निर्देश दिया है।
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ताकि, फिर न छूट पाएं मुलजिम

allahabad high court makes DNA test compulsory in rape cases.

खंडपीठ ने कहा कि दुष्कर्म और मर्डर की घटनाओं में पीड़िता और अभियुक्त के डीएनए टेस्ट के लिए उपयोगी बाल, कपड़े या शरीर पर लगे खून या सीमेन के दाग को आवश्यक रूप से डीएनए जांच के लिए भेजा जाए।

इससे वारदात में अभियुक्त की संलिप्तता प्रमाणित हो सकेगी। कोर्ट ने पीड़ित द्वारा किए गए प्रतिरोध का निशान तलाशने के लिए आरोपी के मेडिकल टेस्ट कराने का निर्देश दिया है।

खंडपीठ ने जेटीआरआई लखनऊ को निर्देश दिया है कि न्यायिक अधिकारियों को अभियुक्तों का सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान लेने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किए जाए।

ताकि बयान के समय वह ऐसी प्रश्नावली तैयार कर सकें जिससे घटना की समस्त परिस्थिति को समझा जा सके। जिससे अभियुक्तों को अनावश्यक प्रश्नों से मिलने वाला लाभ नहीं मिल सके।

फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील

allahabad high court makes DNA test compulsory in rape cases.

बदायूं में नाबालिक लड़की से दुराचार के बाद उसकी हत्या कर देने के मामले में सेशन कोर्ट बदायूं ने आरोपी अख्तर को 31 जनवरी 2013 को फांसी की सजा सुनाई थी।

इसके खिलाफ अख्तर ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। हाईकोर्ट ने अपने परीक्षण में पाया कि घटनास्थल से उठाए गए बाल के नमूने और अन्य साक्ष्य जांच के लिए आगरा की प्रयोगशाला भेजे गए थे मगर नतीजे अभियोजन के पक्ष में नहीं थे।

अदालत ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। केस की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच और मुकदमे के विचारण को लेकर तमाम खामियां सामने आई जिसके मद्देनजर अदालत दिशा निर्देश जारी किए।

कोर्ट ने ये अहम फैसले दिए

allahabad high court makes DNA test compulsory in rape cases.

टू फिंगर टेस्ट पर रोक
रेप की वारदातों में पीड़िता का ‘टू फिंगर टेस्ट’ महिला की गरिमा के खिलाफ है। इस पर रोक लगाई जाए। इसके लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जाए।

यूपी में सीडीएफडी हैदराबाद की तरह बने लैब
प्रदेश में डीएनए टेस्ट की उचित व्यवस्था नहीं होने से जांच के नमूनों को सीडीएफडी हैदराबाद भेजा जाता है। यह प्रक्रिया काफी खर्चीली है। इसमें समय भी अधिक लगता है। सूबे में सीडीएफडी हैदराबाद जैसी प्रयोगशाला लैब बनाई जाए।

... और यह निर्देश भी
कोर्ट ने नाबालिग लड़कियों से दुराचार और हत्या जैसे ब्लाइंड मामलों की जांच योग्य अफसरों से कराने, घटना के गवाहों को पक्षद्रोही होने से रोकने का प्रबंध करने का निर्देश दिया है।

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