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Lucknow News: दूर हुए गिले-शिकवे... आओ अब घर चलें

Sun, 10 May 2026 02:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2026 02:04 AM IST
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All the grievances are over... let's go home now
राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचे लोग।
लखनऊ। विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में वाद निपटा तो मामूली विवाद के कारण अलग रह रहे 20 जोड़ों ने एक बार फिर साथ घर की राह पकड़ी। इन्होंने मतभेद भुलाकर हंसी-खुशी साथ रहने की हामी भी भरी। इसके साथ ही लंबे समय से बैंकों के चक्कर लगा रहे ग्राहकों को कर्ज चुकाने में एकमुश्त समाधान की सुविधा मिली। जनपद न्यायालय, परिवार न्यायालय, उपभोक्ता फोरम में आयोजित लोक अदालत में 2,95,708 वाद निपटाकर 29 करोड़ रुपये से अधिक रकम वसूली गई। पुराने हाईकोर्ट स्थित मीडिएशन सेंटर में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज मलखान सिंह ने किया।
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बेटे की खातिर भुला दिए मतभेद

सर्वेश और रुचि का डेढ़ वर्ष पहले मामूली बात पर विवाद हो गया था। दोनों अलग रहने लगे, जिसका असर उनके चार वर्ष के बेटे की परवरिश पर पड़ने लगा। लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते से वाद का निस्तारण हुआ और दंपती साथ घर रवाना हो गए। इसी तरह प्रमिला और सुशांत ने भी साथ रहने की रजामंदी दी। दो वर्ष से अलग रह रहे एक अन्य जोड़े ने भी आपसी मतभेद भुला दिए।
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चेहरों पर दिखी कर्ज चुकता होने की खुशी

बैंक ऑफ इंडिया की काकोरी शाखा के खाताधारक सोमवारी की मुश्किलें भी लोक अदालत ने आसान कर दीं। एकमुश्त समाधान योजना में 20 हजार रुपये जमा कर कर्ज से छुटकारा मिल गया। करीब तीन वर्ष पहले उनके नाम पर धोखे से किसी ने 40 हजार रुपये का कर्ज निकाल लिया था। ब्याज के साथ रकम 55 हजार रुपये हो गई थी। मदन और उनके भाइयों ने भी मां के नाम से चल रहा लोन चुकता कर दिया। इन्हें करीब एक लाख रुपये की छूट मिली।
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53 वाद निस्तारित, 3.49 करोड़ का दिलाया मुआवजा

हाईकोर्ट की विधिक सेवा उपसमिति के अध्यक्ष वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन राय की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 53 वाद निपटाए गए। इनमें 3.49 करोड़ से अधिक का मुआवजा दिलाया गया है। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट ने 156, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 4146, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कस्टम) ने 2102 और अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट समेत 43,783 मामलों का निस्तारण किया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 111, वाणिज्यिक न्यायालय के छह, एनआई एक्ट के 1395 और पारिवारिक न्यायालय के 134 मामलों का निस्तारण हुआ।
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