आखिरकार लोहिया चिकित्सालय की सभी व्यवस्थाएं संस्थान के हवाले, पहले दिन इलाज के लिए धक्का-मुक्की
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार सोमवार से डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय की सभी व्यवस्थाएं लोहिया संस्थान के हवाले हो गईं। संस्थान के चिकित्सकों व रेजीडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी की व्यवस्थाएं देखीं। अस्पताल के चिकित्सक सहयोगी की भूमिका में नजर आए। हालांकि भारी संख्या में मरीजों के उमड़ने की वजह से संस्थान में पूरी इत्मिनान से मरीज देखने वाले चिकित्सकों को बहुत दिक्कतें उठानी पड़ीं। मरीजों में धक्का-मुक्की होती रही। डॉक्टर कभी गेट बंद कराते रहे तो कभी गार्ड को नियंत्रित करने का आदेश देते रहे।
लोहिया अस्पताल में आमतौर पर तीन से साढ़े तीन हजार मरीज रोज पंजीयन कराते हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे तक ओपीडी थी। इस दौरान यहां 1583 मरीजों ने पंजीयन कराया। मरीज हमेशा की तरह सुबह करीब आठ बजे से ही डट गए थे।
लोहिया संस्थान के संकाय सदस्य और रेजीडेंट डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे तो हर तरफ मरीजों की भीड़ थी। मरीज लाइन तोड़ते हुए धक्का-मुक्की कर चिकित्सक के कमरे में घुसे जा रहे थे। यह देख कई बार रेजीडेंट डॉक्टरों को बाहर निकलना पड़ा। वे कभी गेट बंद कराते तो कभी सुरक्षाकर्मियों को भीड़ रोकने की हिदायत देते रहे।
ओपीडी खत्म होने के बाद कई रेजीडेंट डॉक्टरों ने कहा कि संस्थान की तरह ही अस्पताल की ओपीडी में भी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। भीड़ अचानक कमरे में पहुंच जाती है। ऐसे में इलाज करने में दिक्कत हो रही है।
संस्थान के रेजीडेंट्स के हवाले इमरजेंसी
विलय होने के बाद सोमवार से अन्य चिकित्सकों को हटा लिया है। हालांकि ओपीडी पहले की तरह चलती रही, लेकिन शाम के वक्त इमरजेंसी संस्थान के रेजीडेंट के हवाले रही। संस्थान के 20 डॉक्टर पहले दिन लगाए गए। मेडिको लीगल मामलों के लिए पहले से तैनात ईएमओ मौजूद रहेंगे।
चिकित्सकों के इलाज और बेड देने की व्यवस्था संस्थान के जरिए होगी। लोहिया अस्पताल के 43 चिकित्सकों को संस्थान भेज दिया गया है। अन्य बुधवार को लोहिया अस्पताल से सिविल, बलरामपुर, रानी लक्ष्मीबाई सहित अन्य अस्पतालों के लिए रिलीव हो जाएंगे।