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राजधानी में लगीं सभी गैंट्रियां अवैध
प्रवेन्द्र गुप्ता/लखनऊ
Updated Sun, 13 Oct 2013 03:23 AM IST
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शहर के प्रमुख मार्गों पर जो भी गैंट्रियां विज्ञापन एजेंसियों ने लगाई हैं, वे सब अवैध हैं। लोक निर्माण विभाग ने साफ कर दिया है कि विभाग की ओर से विज्ञापन एजेंसियों को कोई अनुमति नहीं दी गई है।
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पूर्व में विभाग के जिस अधिकारी ने गैंट्री की अनुमति दी थी, उसको इसका अधिकार ही नहीं था और उसे निरस्त किया जा चुका है।
गैंट्री के साथ ही यूनीपोल और कंटीलीवर्स भी अवैध रूप से लगे हैं। इनकी भी अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद अब शहर में लगी अवैध गैंट्री व यूनीपेाल हटाए जा सकते हैं। लोक निर्माण विभाग ने अब इसको लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है।
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लोक निर्माण विभाग की ओर से इस संबंध में नगर निगम को पत्र भी भेजा गया है, जिसमें लोक निर्माण विभाग के दायरे में आने वाले मार्गों से अवैध गैंट्री व यूनीपोल हटाने को कहा गया है।
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इसके साथ ही यह सूची भी मांगी गई कि लोक निर्माण विभाग के दायरे में आने वाले किन मार्गों पर नगर निगम की ओर से प्रचार की अनुमति दी गई है।
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता आरआर सिंह की ओर से नगर आयुक्त को 11 अक्तूबर को भेजे पत्र में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के 24 सितंबर 2013 के आदेश के तहत पीडब्ल्यूडी के मार्गों से अवैध रूप से लगाई गईं गैंट्री, यूनीपोल और कैंटीलीवर्स हटाए जाएं।
अधीक्षण अभियंता ने यह भी लिखा है कि नगर निगम की ओर से जिन एजेंसियों को नियमानुसार अनुमति दी गई है, उनकी भी मार्गवार सूची दी जाए। ताकि मौके का सत्यापन कर अवैध विज्ञापन पटों को हटाया जा सके।
हर साल हो रही करोड़ों की कमाई
अवैध गैंट्री, यूनीपोल और कंटीलीवर्स से विज्ञापन एजेंसी वाले हर साल करोड़ाें की कमाई कर रहे हैं।
मोटी कमाई को देखते हुए शहर में इन दिनों बड़ी संख्या में मानकों के विपरीत यूनीपोल और गैंट्री लगाने का चलन बढ़ा है।
इनको लगाने में सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी की जा रही है। ऐसे में यह गैंट्रियां व यूनीपेाल कब राहगीरों पर मुसीबत बनकर गिर जाएं,कुछ कहा नहीं जा सकता।
अवैध प्रचार में सिर्फ प्रचार एजेंसियां ही नहीं सरकारी विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है। नगर निगम के अलावा लोक निर्माण विभाग भी अवैध प्रचार में शामिल रहा है।
डिवाइडर पर नहीं हो सकता प्रचार
शहर में डिवाइडर पर किसी तरह का प्रचार नहीं किया जा सकता। यूनीपोल तो कतई नहीं लगाए जा सकते। जानकार कहते हैं कि डिवाइडर पर जो भी ट्री गार्ड,फ्लावर पॅाट लगे हैं,वह सब अवैध हैं।
लोक निर्माण विभाग से इनकी अनुमति नहीं है। इन अवैध पटों पर विज्ञापन नहीं होना चाहिए लेकिन नगर निगम के प्रचार विभाग से मिलीभगत कर विज्ञापन एजेंसियां पैसा जमा कर अपने को वैध बताती रहती हैं।