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यूपी कैबिनेट: एक ही परिसर में शिफ्ट होंगे सभी मंडल स्तरीय दफ्तर, सबसे पहले गोरखपुर व वाराणसी में शुरू होगा काम
Tue, 24 Nov 2020 11:12 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 24 Nov 2020 11:12 PM IST
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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : ANI
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मंडल मुख्यालयों पर अब सभी मंडल स्तरीय कार्यालय को एक ही परिसर में शिफ्ट किया जाएगा। पहले चरण में गोरखपुर और वाराणसी मंडल में एकीकृत कार्यालय बनाने का काम शुरू किया जाएगा। जिसमें सभी मंडलीय दफ्तरों को शिफ्ट किया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
दरअसल प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों पर तमाम विभागों के मंडलीय दफ्तर स्थित है, लेकिन अधिकांश कार्यालय किराये पर चल रहे हैं। दूर-दराज क्षेत्रों में स्थित होने के चलते इन दफ्तरों और मंडलायुक्त के दफ्तर के बीच आपसी समन्वय करने में भी दिक्कतें आ रही है।
तमाम मंडल स्तरीय कार्यालयों के भवन जर्जर स्थिति में पहुंच चुके है। इस तरह की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने अब सभी मंडल स्तरीय दफ्तरों को मंडलायुक्त कार्यालय के परिसर में ही शिफ्ट करने की कार्ययोजना तैयार की है।
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इस कार्ययोजना के तहत ही सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोरखपुर और वाराणसी मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में एकीकृत कार्यालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके निर्माण के लिए दोनों शहरों के विकास प्राधिकरणों को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उन्हें नियमानुसार सेंटेज दिया जाएगा।
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दरअसल प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालयों पर तमाम विभागों के मंडलीय दफ्तर स्थित है, लेकिन अधिकांश कार्यालय किराये पर चल रहे हैं। दूर-दराज क्षेत्रों में स्थित होने के चलते इन दफ्तरों और मंडलायुक्त के दफ्तर के बीच आपसी समन्वय करने में भी दिक्कतें आ रही है।
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तमाम मंडल स्तरीय कार्यालयों के भवन जर्जर स्थिति में पहुंच चुके है। इस तरह की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने अब सभी मंडल स्तरीय दफ्तरों को मंडलायुक्त कार्यालय के परिसर में ही शिफ्ट करने की कार्ययोजना तैयार की है।
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इस कार्ययोजना के तहत ही सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोरखपुर और वाराणसी मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में एकीकृत कार्यालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके निर्माण के लिए दोनों शहरों के विकास प्राधिकरणों को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उन्हें नियमानुसार सेंटेज दिया जाएगा।
प्रस्ताव के मुताबिक एकीकृत दफ्तरों के निर्माण से संबंधित मामलों की निगरानी के लिए मंडल व राज्य स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा।
प्रस्ताव के मुताबिक दोनों मंडलों में एकीकृत कार्यालयों के निर्माण से सरकार पर आने वाले वित्तीय भार को वहन करने के लिए सरकारी व नजूल की भूमि को बेचा जाएगा। साथ ही दोनो परियोजनाओं के लिए शीट कैपिटल के तौर पर 25-25 लाख रुपये के बजट की व्यवस्था सरकारी या नजूल की जमीन बेचकर करने की व्यवस्था की जाएगी।
साथ ही बेचने के लिए चिन्हीत भूमि को जरूरत के मुताबिक कामर्शियल या अन्य श्रेणी में भू-उपयोग परिवर्तन कराने पर सभी तरह के शुल्क से छूट देने का भी फैसला किया गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक दोनों मंडलों में एकीकृत कार्यालयों के निर्माण से सरकार पर आने वाले वित्तीय भार को वहन करने के लिए सरकारी व नजूल की भूमि को बेचा जाएगा। साथ ही दोनो परियोजनाओं के लिए शीट कैपिटल के तौर पर 25-25 लाख रुपये के बजट की व्यवस्था सरकारी या नजूल की जमीन बेचकर करने की व्यवस्था की जाएगी।
साथ ही बेचने के लिए चिन्हीत भूमि को जरूरत के मुताबिक कामर्शियल या अन्य श्रेणी में भू-उपयोग परिवर्तन कराने पर सभी तरह के शुल्क से छूट देने का भी फैसला किया गया है।