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मंदिर, श्मशान व जलाशय पर सभी जातियों का समान हक: मोहन भागवत
Tue, 15 Sep 2020 12:06 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 15 Sep 2020 12:06 PM IST
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सरसंघचालक मोहन भागवत
- फोटो : amar ujala
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सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर, श्मशान और जलाशय पर सभी जातियों का समान अधिकार है। इसलिए किसी को इन स्थानों पर उसकी जाति के आधार पर न रोका जाए। ऐसा करने से हिंदू कमजोर होगा। भागवत ने राजधानी में चल रही अवध प्रांत के पदाधिकारियों की बैठक के दूसरे दिन कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, गोसेवा, पर्यावरण, धर्म जागरण और सामाजिक सद्भाव जैसे आयामों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ मनन-मंथन किया।
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उन्होंने प्रदेश में कुछ स्थानों पर हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर उनका धर्मांतरण कराने और उत्पीड़न करने की घटनाओं पर चिंता जताई। साथ ही नेपाल की सीमा पर ईसाई मिशनरियों द्वारा गरीब, पिछड़े, अनुसूचित जाति के साथ वनवासी जातियों के लोगों को नेपाल सीमा में बनाए गए गिरजाघरों में प्रार्थना सभाओं के जरिये धर्मांतरण कराने की साजिश को भी खतरनाक करार दिया।
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सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह बात सामने आई कि मुस्लिम युवक नाम बदलकर हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में उलझाकर उनका धर्मांतरण करा रहे हैं तो ईसाई मिशनरियां षड्यंत्र कर छुआछूत की घटनाओं का दुष्प्रचार कराती हैं। ये सब हिंदुओं की जाति व्यवस्था को तूल देकर लोगों को धर्मांतरण के लिए उकसाते हैं।
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भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों को परिवार प्रबोधन और सामाजिक समरसता के अभियानों से इन षड्यंत्रों को रोकना चाहिए। लोगों को बताना चाहिए कि ये सब हिंदुत्व विरोधी ताकतों के झूठे आरोप हैं। उन्होंने कहा कि कुटुंब संरचना प्रकृति प्रदत्त है। इसलिए इसका संरक्षण करना स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी है। लोगों को समझाएं कि पति, पत्नी और बच्चे ही परिवार नहीं हैं, बल्कि बुआ, काका, काकी, चाचा, चाची, दादी, दादा भी हमारे परिवार का हिस्सा हैं।