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सपाइयों के सपने तो देखिए
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 03 Dec 2013 10:29 AM IST
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बड़े सपना देखना समाजवादियों का संस्कार है। वैसे भी नेताजी हमेशा से ही कहते आए हैं कि बडे़ सपने देखो।
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पर यह सपने अगर सवाल खड़ा करने लगें तो उत्सुकता बढ़ना भी स्वाभाविक है और दिमाग का चकराना भी।
नेताजी कहते हैं, ‘मैं मुख्यमंत्री होता तो पंद्रह दिनों में कानून-व्यवस्था सुधार देता।’ प्रोफेसर साहब ऐलान करते हैं, ‘मैं मुख्यमंत्री होता तो राज्य कर्मचारियों को ठीक कर देता।’
सपा के बड़े नेताओं के यह सपने आम लोगों को सवाल बनकर चुभ रहे हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि सूबे में वे अपनी व्यथा-कथा किससे कहें।
नेताजी और प्रोफेसर साहब पर बड़ा भरोसा था। सोचते थे कि इन लोगों से पीड़ा कह देंगे तो वह दूर हो जाएगी।
पर यहां तो यही दोनों लाचारी दिखा रहे हैं तो उनकी कौन सुनेगा।
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