टिकटों पर नहीं टूटा भाजपा नेताओं का गतिरोध
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भाजपा में टिकटों पर छिड़ी जंग अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। प्रमुख चेहरों के दांवपेंच देख उमा भारती जैसे प्रमुख नेता भी अपने निर्णयों पर पलटने लगे हैं।
कुछ नए चेहरों के अचानक आगे आने से मामला और उलझ गया है।
असमंजस और दांवपेंच के चलते पैदा गतिरोध न टूटने से उत्तर प्रदेश की सीटों पर गुरुवार को उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप नहीं दिया सका।
फिलहाल पार्टी में जो स्थिति है, उसके चलते शुक्रवार को भी प्रदेश के उम्मीदवारों की घोषणा हो पाना मुश्किल है।
टिकटों पर बढ़ती जा रहीं उलझनें
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो गतिरोध का अनुमान सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें याद नहीं कि जनसंघ से आज तक कभी इस तरह की स्थिति बनी हो।
पहली बार ऐसा हुआ है कि जिन्हें दूसरों के टिकट तय करने हैं, वे अपने ही टिकटों में उलझ कर रह गए हैं।
पार्टी के एक पूर्व कोषाध्यक्ष व वरिष्ठ नेता कहते हैं कि इस स्थिति के लिए पार्टी का नेतृत्व ही जिम्मेदार है, जिसने पार्टी की मजबूती के बजाय अपनी लॉबी की मजबूती पर फोकस किया।
दूसरे दलों से लोगों को लाकर उन्हें टिकट दिलाने के लिए गोटें बिछाईं।
उमा भारती पलटीं, नए नामों से भी समस्या
पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती पहले झांसी से लड़ने पर सहमत थीं, पर अचानक उन्होंने फैजाबाद (अयोध्या) को भी अपनी पसंद बताकर मामला उलझा दिया।
कल्याण सिंह के कोटे में चार सीटें तय थीं, लेकिन अलीगढ़ में भाजपा उनकी पसंद सतीश गौतम पर मन नहीं बना पा रही है।
बस्ती सीट पर गुरुवार को बसंत चौधरी व सीपी शुक्ला के नाम चर्चा में आने से मामला उलझ गया। चौधरी का गुजरात में बड़ा कारोबार बताया जाता है।
इन्होंने भी उलझाया मामला
बसपा से निकाले गए नंदगोपाल नंदी भले ही अभी औपचारिक तौर पर भाजपा में शामिल न हुए हों लेकिन इलाहाबाद सीट पर उनका नाम भी शामिल कर लिया गया।
गोरखपुर की बांसगांव सीट से मौजूदा सांसद कमलेश पासवान को टिकट मिलना तय माना जा रहा था, पर गुरुवार को ही पूर्व सांसद श्रीराम चौहान का नाम आगे करके मामला उलझा दिया गया।
इसी तरह नौकरानी से बलात्कार के आरोप में जेल में बंद जौनपुर से बसपा सांसद धनंजय सिंह के परिवार से किसी को जौनपुर सीट से टिकट देने के एक बड़े नेता के प्रस्ताव ने भी मामले को और उलझा दिया है।
पिछड़ती जा रही है पार्टी चुनावी तैयारियों में
प्रत्याशियों की सूची पर अटकी भाजपा चुनावी तैयारियों में भी पिछड़ती नजर आ रही है।
यह एकमात्र ऐसा दल है, जिसमें चुनाव प्रबंधन का प्रकोष्ठ पूरे वर्ष काम करता है, लेकिन इस बार टिकटों के झगड़े में नेता इस कदर उलझे हैं कि इस मोर्चे पर भी काम पीछे छूटता जा रहा है।
चुनावी प्रबंधन को लेकर साल भर पहले से हो रहे दावे जमीन पर उतरते नहीं दिख रहे। न तो वार रूम खुल पाया है और न व्यवस्थाओं के लिए कमेटियों का ही गठन हो पा रहा है।
चुनाव आयोग से शिकायत के मोर्चे पर भी पार्टी का प्रबंधन पूरी तरह बिखरा हुआ है।
नहीं हुआ सूची का खुलासा
पार्टी में चुनाव शिकायत प्रकोष्ठ अभी तक खुल नहीं पाया है। रही-सही कसर पूरी कर दे रहे हैं बड़बोले नेता।
वे दावे तो बड़े-बड़े कर देते हैं, लेकिन जब उन्हें अमली जामा पहनाने का वक्त आता है तो कन्नी काटने लगते हैं।
उदाहरण के लिए पिछले दिनों पार्टी की तरफ से घोषणा की गई कि भाजपा ने चुनाव आयोग को दिए ज्ञापन में उत्तर प्रदेश के सवा सौ से ज्यादा ऐसे अधिकारियों की सूची दी है, जो दल विशेष के हित में काम करते रहे हैं।
इस बारे में पूछने पर दिल्ली वालों ने प्रदेश इकाई पर और प्रदेश के नेताओं ने दिल्ली वालों की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लिया।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी बोले कि प्रदेश इकाई ने लिस्ट देने की बात कही थी।
प्रदेश के नेता सूची तैयार कर रहे हैं। वहीं प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि वे दिल्ली वालों से संपर्क करके सूची मंगवाते हैं। बहरहाल सूची का खुलासा आज तक नहीं हो पाया।
नियंत्रण कक्ष बना न बूथ तक नेटवर्क
गुजरात के फॉर्मूले पर ही बूथ तक की जानकारी के आदान-प्रदान के लिए नेटवर्क स्थापित करने की बात कही गई थी।
इसके संचालन के लिए प्रदेश मुख्यालय पर एक बड़ा नियंत्रण कक्ष बनाने का ऐलान भी हुआ था।
इसी कक्ष से चुनावी तैयारियों की मॉनिटरिंग करने का दावा किया गया था, पर ऐसा कोई नियंत्रण कक्ष अभी तक नहीं बन पाया है।
सामाजिक समीकरण साधने की हसरत अधूरी
सामाजिक समीकरणों के मद्देनजर भी जिला से लेकर प्रदेश तक टीमें बनाने का ऐलान किया गया था।
इनमें क्षेत्रवार प्रभावी लोगों को शामिल कर उन्हें अलग-अलग लोगों के बीच भेजने व भाजपा के लिहाज से सामाजिक समीकरणों को ठीक करने का काम सौंपा जाना था।
ये टीमें भी अभी तक अस्तित्व में नहीं आ सकी हैं।
भाजपा की सूची
क्षेत्र प्रत्याशी
बिहार
किशनगंज दिलीप जायसवाल, मधुबनी हुकुमदेव नारायण यादव, दरभंगा कीर्ति आजाद, मुजफ्फरपुर अजय निषाद, आराआर के सिंह, सीवान ओम प्रकाश यादव, बेगूसराय भोला सिंह, नवादा गिरिराज सिंह, सारण राजीव प्रताप रूडी, उजियारपुर नित्यानंद राय, भागलपुर शाहनवाज हुसैन, बांका पुतुल देवी, पाटलिपुत्र रामकृपाल यादव, सासाराम छेदी पासवान।
मध्य प्रदेश
ग्वालियर नरेंद्र तोमर, विदिशा सुषमा स्वराज, इंदौर सुमित्रा महाजन खंडवानंद कुमार सिंह चौहान, मुरैना अनूप मिश्रा, दमोह प्रह्लाद पटेल, भिंड भगीरथ प्रसाद, गुना जयभान सिंह पवैया, सतनागणेश सिंह, मंडलाफग्गन सिंह कुलस्ते, रतलाम दिलीप सिंह भूरिया।
ये नाम भी हैं शामिल
क्षेत्र प्रत्याशी
झारखंड
राजमहल हेमलाल मूर्मू, दुमकासुनील सोरेन, चतरासुनील सिंह, कोडरमार वींद्र कुमार राय, रांचीरामटहल चौधरी, लोहरदग्गा सुदर्शन भगत, पलाम वीएस राम, हजारी बागजयंत सिन्हा, खूंटीकरिया मुंडा, गोड्डानिशिकांत दुबे।
पश्चिम बंगाल
दार्जिलिंग एसएस अहलूवालिया।
महाराष्ट्र
मुंबई नॉर्थ सेंट्रलपूनम महाजन।
कर्नाटक
मैसूर प्रताप सिम्हा उडूपी चिकमगलूर शोभा करंदलजे।
केरल
कन्नूरपीसी मोहनान मास्टर।