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जब कोई मारे और रोने भी न दे
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 30 Sep 2013 09:41 AM IST
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सूबे के एक वजीर ऐसे हैं जिनके गृह जनपद में कोई अधिकारी जाना नहीं चाहता।
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विभाग चाहे जो हो, सभी अधिकारियों का यही हाल है। इस जिले की पोस्टिंग के नाम से अच्छे-अच्छे अधिकारी घबराते हैं। वजीर साहब का खासा रुतबा है।
उनके खिलाफ कोई मुंह तक नहीं खोलता। बात हाल की है, जब इंजीनियरों के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक जलसे में अपने अनुभव साझा कर रहे थे।
बोले- उस जिले में जो अधिकारी जाता है उसे वे पिटवा देते हैं, और जो नहीं जाता है उसे वे निलंबित करवा देते हैं। इसे ही कहते हैं, ‘जबरा मारे और रोने भी न दे।