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Lucknow News: अलका प्रमोद की कहानी ने जीता दर्शकों का दिल

Tue, 29 Apr 2025 12:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 12:26 AM IST
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Alka Pramod's story won the hearts of the audience
नाटक का मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में मंचकृति के नाट्य उत्सव की 17 दिवसीय शृंखला के तहत आठवें दिन तीन कहानियों का मंचन किया गया। पहली कहानी अलका प्रमोद की ‘होर्डिंग का चित्र’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया। शिखा सक्सेना की कहानी ‘शाम किनारे’ और स्व. शांति देव बाला की कहानी ‘दीये मिट्टी के’ के मंचन को भी सराहा गया। निर्देशन संगम बहुगुणा और विकास श्रीवास्तव का रहा।
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‘होर्डिंग का चित्र’ में दिखाया जाता है कि वसुधा के बेटे रचित का मित्र नयन जो कि पढ़ाई में बहुत तेज था, लेकिन माता-पिता के दबाव में डॉक्टर बनने के लिए जी-तोड़ मेहनत करता है, लेकिन उसका चयन नहीं हो पाता है। रचित का चयन बीबीए के लिए अच्छे कॉलेज में हो जाता है। नयन निराशा के दलदल में फंसता जाता है और नशे का लती हो जाता है। वसुधा उसकी काउंसिलिंग करती है और उसे उसके शौक के मुताबिक ब्रश और रंग लाकर देती है। नयन चित्रकार बन जाता है और उसका नाम बड़े कलाकारों में शुमार होता है। संध्या दीप रस्तोगी और शुभम दुबे के अभिनय को सभी ने सराहा।
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दूसरी कहानी ‘शाम किनारे’ में जतिन रोज शाम को समंदर किनारे टहलने जाते थे। वे ऐसे साथी की तलाश में थे जो उनका सुख-दुख बांट सके। जतिन की यह बात बड़ी बहू समझ जाती है और वह जतिन की कविताओं की प्रशंसक करुणा से उन्हें मिलवा देती है। मंच पर भानु प्रकाश पांडेय, डॉ. राकेश कुमार, सुधा पाल, काव्या मिश्रा, अनुराग शुक्ला, सोम गांगुली और रचना मुकेश का अभिनय सराहनीय रहा।
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तीसरी कहानी ‘दीये मिट्टी के’ में दिखाया जाता है कि डॉ. कुमार ने नया घर लिया, जिसमें पहले डॉ. मेहता रहते थे। डॉ. मेहता के आउट हाउस में ज्योति की मां और नानी रहती थीं। डॉ. मेहता ने डॉ. कुमार को घर बेचते समय कहा था कि उन्हें निकाला न जाए। दीपावली पर डॉ. कुमार उन तीनों से कहते हैं कि तेल के दीये न जलाएं क्योंकि दीवारें खराब हो जाती हैं। ज्योति का भाई दीपावली पर तेल की दीये और झालर लाता है तो सभी त्योहार मनाते हैं। डॉ. कुमार भी कुछ नहीं कह पाते। मंच पर डॉ. मालविका त्रिवेदी, ममता शुक्ला, काव्या मिश्रा, उन्नति श्रीवास्तव और गोपाल सिन्हा ने अभिनय किया।
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