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एकेटीयू में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के साथ ही आयुर्वेद का पाठ भी पढ़ रहे छात्र

Tue, 21 Jul 2020 01:20 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 21 Jul 2020 01:20 AM IST
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AKTU prepared Dhanvantari Vatika to teach students about Ayurveda.
आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक - फोटो : amar ujala

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) अपने विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के साथ ही आयुर्वेद का पाठ भी पढ़ा रहा है। एकेटीयू ने कोरोना संक्रमण के दौर में इससे बचाव के लिए कई आविष्कार भी किए हैं, जो न सिर्फ आम लोगों बल्कि स्वास्थ्य विभाग के लिए भी काफी उपयोगी रहे हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। इसलिए एकेटीयू भावी इंजीनियरों को औषधीय पौधों का महत्व भी बता रहा है।

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आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक की पहल पर विश्वविद्यालय ने अपने जानकीपुरम विस्तार स्थित परिसर में धन्वंतरि वाटिका की स्थापना की है, जिसमें कई तरह के औषधीय पौधे लगे हैं। विवि की ओर से जब भी कोई आयोजन होता है तो छात्रों को इस औषधीय वाटिका में ले जाकर पौधों का महत्व समझाया जाता है। विवि की इस वाटिका में 51 प्रकार की औषधियां हैं। डॉ. पाठक ने कहा कि यह हर घर का हिस्सा होना चाहिए। अगर जगह नहीं है तो गमलों में लगाएं। ये औषधियां श्वास, ज्वर में लाभकारी हैं।
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पूर्व में संग्रहीत औषधियां ज्यादा कारगर
डॉ. पाठक ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव में आयुर्वेदिक औषधियां काफी कारगर रही हैं लेकिन हमें यह ध्यान रखना है कि हम जो भी औषधियां प्रयोग करें वह पहले की और सूखी हों, क्योंकि यही ज्यादा कारगर हैं। उन्होंने कहा कि इस महामारी में हमारी वायु, पानी और मिट्टी भी दूषित हो जाती है। जो हरे पौधे और उनकी पत्तियां हैं वे भी कहीं न कहीं संक्रमित होती हैं। इसलिए पूर्व में इकट्ठा औषधियों के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज घर-घर में काढ़ा पीया जा रहा है। काढ़ा इसलिए कारगर है क्योंकि वह सूखे मसाले से बनाया जाता है।

हर विवि-संस्थान में होनी चाहिए ऐसी वाटिका

डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि आयुर्वेद हमेशा से स्वास्थ्य के लिहाज से काफी कारगर रहा है। हर विश्वविद्यालय, स्कूल-कॉलेज, शिक्षण संस्थान अपने यहां छोटी-बड़ी औषधि वाटिका विकसित करें, ताकि बच्चों और शिक्षकों को इसके बारे में जागरूक किया जा सके। हमें औषधीय पौधों के साथ उनके नाम और कौन सा पौधा किस काम में आता है, इसकी तख्ती भी लगानी चाहिए। इससे सामान्य लोगों को भी पढ़ने, समझने में आसानी होगी।

जानें किन औषधियों का क्या है उपयोग
अजवाइन- पेट दर्द, पेट के कीड़े मारने के लिए
अडूसा- खांसी में कफ को पतला करने में
अतिबला- दुर्बलता, खूनी दस्त में, सूखा रोग में
अदरक- बल की वृद्धि, जोड़ो के दर्द, सूजन में
अपामार्ग- सूजन कम करने, मूत्राशय एवं सूजन में
अमलतास- मूत्ररोगों, दर्द एवं सूजन कम करने, कब्ज में

अश्वगंधा- बलवर्धक, गर्भाशय की समस्या को दूर करने में, जोड़ो के दर्द में
कचनार- गले में गांठ, लसिका ग्रंथियों की वृद्धि में
कटुकरंज- मलेरिया, प्रसव के बाद होने वाले बुखार, चर्म रोग में
कनफटी- जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द, कान दर्द में
कालमेघ- बुखार, मलेरिया, सिर दर्द, घाव में
नरकचूर- मिचली-उल्टी में, शिशुओं की खांसी में

नागरमोथा- आमदोष, जोड़ों के दर्द, बुखार, दस्त
निर्गुंडी- बुखार, वात, सूजन, खांसी, दमा, जुकाम
पुनर्नवा- सूजन कम करने, गुर्दे की बीमारी, उच्चरक्त चाप, हृदय रोग
बला- नाड़ियो में बल, शुकल और गर्भस्थापन, स्वप्न दोष, कब्ज
बाकुची- व्रणशोधक, व्रणरोपण, सफेद दाग, पेट के कीड़े मारने में
ब्राह्मी- स्मरण शक्तिवर्धन, खून बढ़ाने, चर्म रोग समाप्त करने में
भुई आंवला- पीलिया, पेचिस, जख्म/घाव, त्वचा रोग, मलेरिया में

मीठी नीम- अतिसार, अपच, गुर्दों के दर्द में
वच- जुकाम, खांसी, बुखार, हकलाने में
शतावर- दूध बढ़ाने में, शक्तिवर्धक
सर्पगंधा- अनिद्रा, पुराने मानसिक रोगों में
सारिवा- फोड़े-फुंसी, त्वचा विकारों, गंडमाला में
हरड़- कब्ज, यकृत, प्लीहा की सूजन में।

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