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इस डिवाइस को पहनने वाला कोई व्यक्ति दुर्घटना में नहीं मरेगा

Fri, 18 Dec 2015 10:05 AM IST
Updated Fri, 18 Dec 2015 10:05 AM IST
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akshat prakash made helix safe device

सड़क दुर्घटना में घायलों की जिंदगी बचाने के लिए यूपी के एक छात्र अक्षत प्रकाश ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ‘हेलिक्स सेफ’ बनाई है। उसने इसका प्रदर्शन ताइवान में चल रही इंटरनेशनल साइंस फेयर-2015 में किया है।

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यह डिवाइस उन घायलों के लिए वरदान साबित होगी जिन्हें सड़क दुर्घटना केबाद तुरंत इलाज नहीं मिल पाता और उनकी मौत हो जाती है। दुर्घटना होने के बाद हृदयगति का आकलन कर यह डिवाइस खुद ही मरीज को दवा ऑटो इंजेक्ट कर देती है। इससे मरीज को अस्पताल तक पहुंचने का समय मिल जाएगा।
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डिवाइस को बनाने वाला 17 वर्ष का अक्षत गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र का निवासी है। वह डीपीएस में 12वीं में पढ़ता है। उसका कहना है कि अक्सर दुर्घटना के बाद लंबे घायल को चिकित्सकीय मदद नहीं मिल पाती, लेकिन अब यह डिवाइस ऐसे मरीजों को लाइफ सपोर्ट ट्रीटमेंट उपलब्ध करा देती है।
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अक्षत को 2013 में आवेदन करने के बाद इसी वर्ष पेटेंट मिला है। इसका प्रकाशन ऑफिशियल पेटेंट जर्नल-2015 में हुआ है। डिवाइस का प्रोटोटाइप डिजाइन अरड्यूनो डवलपमेंट एनवायरमेंट, हर्ट रेट सेंसर व अन्य संबंधित उपकरण से बनाया गया है।

खुद ही इंजेक्‍शन लगा देगा डिवाइस

akshat prakash made helix safe device

इसके साथ ही, इसे एंबेडड सी व विजुअल बेसिक पर प्रोग्राम भी किया गया है। अक्षत का कहना है कि मैं कप्यूटर साइंस में शोध कर अपना करिअर बनाना चाहता हूं। उसको 2013 में कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया व नर्चर टैलेंट एंड एंपबेस्ट से इनोवेशन के लिए फर्स्ट व्हिज किड अवार्ड भी मिल चुका है।

छात्र का कहना है कि छोटे आकार की इस डिवाइस को आसानी से पहना जा सकता है। दरअसल, इसे बनाने का असली मकसद ऐसे मरीजों को चिकित्सकीय सहायता देना था, जिन्हें दुर्घटना के बाद काफी देर तक कोई मदद नहीं मिल पाती।

‘हेलिक्स सेफ’ डिवाइस व्यक्ति की धड़कनों के हिसाब से काम करती है। दुर्घटना के बाद धड़कन बढ़ने पर यह खतरे को भांप लेती है। इसके बाद यह डिवाइस मरीज को ऑटोमेटिकली जरूरी दवा इंजेक्ट कर देती है। साथ ही, नजदीक के चिकित्सकीय सुविधा केंद्र को भी हादसे की सूचना देकर अलर्ट कर देती है।

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