फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Akhilesh yadav to focus on 21 departments

इन 21 विभागों पर अखिलेश रखेंगे पैनी नजर

Wed, 20 Aug 2014 10:06 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 20 Aug 2014 10:06 PM IST
विज्ञापन
Akhilesh yadav to focus on 21 departments

पिछले दो साल से बजट लेकर खर्च न करने वाली जगहंसाई का सामना कर रही सूबे की सरकार इस बार कुछ चौकन्नी नजर आ रही है।

विज्ञापन


इसके लिए उन 21 विभागों की कार्यप्रणाली पर अलग से नजर रखना शुरू कर दिया गया है जिनका सालाना बजट 500 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा है। यदि इन विभागों की परफॉर्मेंस सुधर गई तो सरकार की बिगड़ी छवि सुधरने में देर नहीं लगेगी।

तमाम हिदायतों के बावजूद फरवरी व मार्च में बजट की वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने के चलन में खास बदलाव नहीं आया। इसकी वजह से बजट का बड़ा हिस्सा खर्च न हो पाने से वित्तीय वर्ष के अंत में सरेंडर करने की नौबत आती रही।

विज्ञापन

योजनाओं को दो हिस्सों में बांटा

Akhilesh yadav to focus on 21 departments

सरकार की कई प्रचारित योजनाएं अमल में नहीं आईं। विपक्ष ने भारी भरकम बजट लेकर खर्च न कर पाने के लिए विधानमंडल सत्र में सरकार की कई बार खिंचाई की, जिससे उसकी खूब जगहंसाई हुई।

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने इस बार से दो स्तर पर ठोस कदम उठाए। पहला, पांच करोड़ तक की योजनाओं व परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने का अधिकार सीधे विभागाध्यक्षों को दे दिया गया। उन्हें वित्त विभाग की पहले की तरह इजाजत नहीं लेनी होगी।

दूसरा, 21 विभाग ऐसे हैं जिनका सालाना बजट 500 करोड़ या इससे अधिक है। कुल बजट का 93 फीसदी हिस्सा इनके पास होता है। सरकार ने ऐसे विभागों को चिह्नित किया है।

इनकी तनिक भी सुस्ती पूरे बजट की परफॉर्मेंस बिगाड़ देती। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इनकी वित्तीय स्वीकृतियों की अलग से समीक्षा करने की पहल कर दी है।

वापस हुए 4062 करोड़ रुपये

Akhilesh yadav to focus on 21 departments

2012-13 में करीब 190 योजनाओं में 4062 करोड़ रुपये बिना खर्च के वापस करने पड़े। इनमें 76 योजनाएं ऐसी मिलीं जिनके लिए मंजूर बजट की पूरी रकम बिना खर्च किए वापस करनी पड़ी। कई योजनाओं में समय से वित्तीय स्वीकृतियां जारी न होना एक बड़ी वजह थी।

ये हैं विभाग

लोकनिर्माण, पंचायतीराज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, बेसिक शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, औद्योगिक विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, न्याय, आवास, कृषि, चिकित्सा शिक्षा, अल्पसंख्यक कल्याण, भूमि विकास, समाज कल्याण, माध्यमिक शिक्षा, ऊर्जा, नगरीय रोजगार, नगर विकास एवं राजस्व।

विज्ञापन

बजट का हिस्सा 21-22 विभागों के ही जिम्मे

Akhilesh yadav to focus on 21 departments

इस पर प्रमुख सचिव नियो‌जन देवेश चतुर्वेदी कहते हैं कि 'बजट मिलने की सार्थकता तभी है जब उसे संबंधित योजना पर समय से खर्च कर उसका लाभ लोगों को पहुंचाया जा सके। इसमें वित्तीय स्वीकृतियों का समय से जारी होना सबसे अहम पहलू है। बजट का अधिकतम हिस्सा 21-22 विभागों के ही जिम्मे रहता है। अभी इनकी परफॉर्मेंस करीब 24 प्रतिशत है। इनकी परफॉर्मेंस पर नियमित नजर रखने के लिए मुख्य सचिव ने अलग से समीक्षा की पहल की है।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed