चार महीने बाद एक साथ बैठे अखिलेश-शिवपाल, पर नहीं हुई बात
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सपा के नवनिर्वाचित विधायकों ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में पार्टी के नेता, मुख्य सचेतक व विधानमंडल के अन्य पदाधिकारियों के चयन के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अधिकृत कर दिया। इनका एलान भाजपा का मुख्यमंत्री तय हो जाने के बाद किया जाएगा।
विधायक दल की बैठक में अखिलेश और शिवपाल यादव करीब चार माह बाद एक साथ मंच पर बैठे लेकिन उनके बीच बातचीत नहीं हुई। सपा अध्यक्ष ने नए विधायकों से कहा कि वे जनहित के मुद्दों को सदन में उठाएं और सरकार की जन विरोधी नीतियों पर कड़ा प्रहार करें।
सपा विधायकों की पहली बैठक पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई। सभी की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि इसमें मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव आएंगे या नहीं। मुलायम बुधवार को दिल्ली चले गए थे और बृहस्पतिवार को बैठक शुरू होने तक नहीं आए।
शिवपाल बैठक में शामिल होने के लिए जैसे ही सभागार में दाखिल हुए, आजम खां उन्हें मंच पर ले गए। मंच पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, आजम खां, राजेन्द्र चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम बैठे।
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने पर तल्ख हुए थे रिश्ते
जनेश्वर मिश्र पार्क में 5 नवंबर 2016 को सपा के स्थापना दिवस समारोह के बाद यह पहला मौका है जब अखिलेश और शिवपाल ने मंच साझा किया।
एक जनवरी को सपा के विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष और मुलायम सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने के बाद उनके बीच तल्खी हो गई थी। पूरे चुनाव में शिवपाल अपनी जसंवतनगर सीट पर प्रचार तक सीमित रहे।
बृहस्पतिवार को जब शिवपाल और अखिलेश मंच पर साथ बैठे तो उनके बीच रिश्तों की गर्मजोशी नजर नहीं आई। दोनों ने एक-दूसरे पर कोई टिप्पणी भी नहीं की।
बैलेट पेपर से चुनाव का समर्थन
सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। इसका सभी विधायकों ने समर्थन किया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष से लेकर तमाम मंत्रियों व भाजपा नेताओं ने चुनाव में झूठ का सहारा लिया। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने चुनाव को विकास के एजेंडे से भटकाने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों का सहारा लिया।
अखिलेश बोले, भविष्य में बैलेट से चुनाव हो तो अच्छा
अखिलेश ने इस मौके पर कहा कि ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की जो शिकायतें सामने आ रही हैं, वह जांच का विषय है। अच्छा होगा कि आगे चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हो।
इससे निर्वाचन की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता पर जनता का विश्वास बना रहेगा। ईवीएम में गड़बड़ी की कुछ विधायकों की शिकायत पर कहा, इसके लिए बूथ स्तर से कुछ साक्ष्य जुटाए जाएं।
उन्होंने कहा, चुनाव के जो भी नतीजे आए हैं उनसे निराश होने की जरूरत नहीं। हमने अच्छे काम किए हैं। आज नहीं तो कल लोग इसे समझेंगे। काम का महत्व जरूरी है। कई बार यह देर से समझ में आता है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र (मेनिफेस्टो) में हमारी नकल की है। हम फिर जनता के लिए काम करेंगे।
हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना
अखिलेश बोले, हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना है, आगे बढ़ते जाना है। कहा कि समाजवादी सरकार ने गांव, किसान, नौजवान, महिला, व्यापारी अधिवक्ता सहित समाज के सभी वर्गों के कल्याण के तमाम काम किए।
सड़क, पुल, बिजली की व्यवस्था में पर्याप्त सुधार और काम हुए। बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा गांवों और किसानों के लिए रखा गया। खाद, बीज, कीटनाशक की समय से व्यवस्था हुई।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर जितने काम हमने किए उतने किसी अन्य राज्य की सरकार ने भी नहीं किए हैं।
कहा, सोमवार-मंगलवार से हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए पराजित प्रत्याशियों, जिलाध्यक्षों व अन्य नेताओं को बुलाकर फीडबैक लिया जाएगा। इसी के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे।
हमारी योजनाओं के नाम बदल सकती है भाजपा
अखिलेश ने कहा, एक्सप्रेस-वे और मेट्रो के अलावा 108, 102 एम्बुलेंस, 1090 वीमेन पावर लाइन, यूपी -100, समाजवादी पेंशन जैसी योजनाएं सपा सरकार ने बिना किसी भेदभाव के लागू की।
हो सकता है हमारी योजनाओं को भाजपा सरकार नाम बदलकर लागू करे लेकिन जनता सच्चाई जानती है। सपा सरकार में 1600 करोड़ रुपये का किसानों का कर्ज माफ किया गया।
समाजवादी पेंशन से 55 लाख महिलाएं लाभान्वित हुईं। शहरों में 24 घंटे और गांवों में 18 घंटे बिजली दी गई। बुंदेलखंड में समाजवादी राहत पैकेट बांटे गए।
हार की समीक्षा होनी चाहिए: शिवपाल
शिवपाल अपने संक्षिप्त संबोधन में विवादित बयानबाजी से बचे। उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों को बधाई व शुभकामनाएं दी। कहा कि समाजवादियों के संघर्ष का इतिहास रहा है। कई बार उतार-चढ़ाव का सामना किया है। जिस तरह के नतीजे आए हैं, उसकी उम्मीद नहीं थी।
हार के कारणों की समीक्षा होनी चाहिए ताकि उन्हें दूर किया जा सके। संघर्ष के बल पर हम फिर आगे बढ़ेंगे।