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लिफ्ट में 45 मिनट फंसे रहे अखिलेश-डिम्पल

Sat, 19 Dec 2015 02:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 19 Dec 2015 02:36 AM IST
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Akhilesh Yadav and Dimple Yadav stuck in lift.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सुरक्षा में उस समय बड़ी चूक हुई जब वे अपनी सांसद पत्नी डिम्पल यादव के साथ शुक्रवार को विधानसभा की वीआईपी लिफ्ट में फंस गए। वे करीब 45 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे। इससे सचिवालय में हड़कंप मच गया।

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विधानसभा के तकनीकी स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह बेलचा और पेंचकस से लिफ्ट का गेट खोलकर उन्हें बाहर निकाला। इस मामले में लोकनिर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता समेत चार इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य संपत्ति अधिकारी ने लिफ्ट का संचालन और मरम्मत करने वाली कंपनी थायसन क्रूप के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर कराई है।
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मुख्यमंत्री विधानमंडल की दूसरी मंजिल पर राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सभागार (सेंट्रल हॉल) में बाल संसद में शामिल होने के बाद करीब 2.45 बजे सेंट्रल हॉल से निकले और ग्राउंड फ्लोर पर जाने के लिए वीआईपी लिफ्ट में गए। उनके साथ डिम्पल, सुरक्षाकर्मी शिवकुमार और लिफ्टमैन थे। लिफ्ट चलते ही फर्स्ट फ्लोर से लगभग ढाई-तीन फीट पहले अटक गई। सामने लगी दूसरी लिफ्ट से सुरक्षाकर्मी नीचे पहुंचे।
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कुछ सुरक्षाकर्मी पहले ही मुख्यमंत्री के इंतजार में ग्राउंड फ्लोर पर लिफ्ट के पास तैनात थे। कुछ ही क्षणों में सीएम के लिफ्ट में फंसे होने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षाकर्मियों ने फर्स्ट फ्लोर पर लिफ्ट के आसपास का इलाका घेर लिया।

ऑक्सीजन सिलेंडर और एंबुलेंस मंगा ली गई

Akhilesh Yadav and Dimple Yadav stuck in lift.

सुरक्षाकर्मियों और विधानसभा के तकनीकी स्टाफ ने लिफ्ट ठीक करने की कोशिश की। कामयाबी न मिलने पर फर्स्ट फ्लोर पर लिफ्ट के गेट के जोड़ को पेंचकस से खोलते हुए उसमें बेलचा डाला गया। लिफ्ट में सुरक्षाकर्मी शिवकुमार ने बेलचा पकड़ा। दबाव डालने पर गेट खुला और लिफ्ट थोड़ा नीचे खिसकी।

मुख्यमंत्री, डिम्पल और अन्य लोग फर्स्ट फ्लोर से एक एक-डेढ़ फीट ऊपर से पहली मंजिल पर उतरे। ग्राउंड फ्लोर पर जाने के लिए सीएम दूसरी लिफ्ट की तरफ गए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें इस लिफ्ट में नहीं बैठने दिया।

तब वे सीढ़ियों से नीचे उतरे और विधान भवन के गेट नंबर एक से सरकारी आवास कालिदास मार्ग के लिए रवाना हो गए। इस दौरान करीब आधा घंटा तक जबरर्दस्त हड़कंप मचा रहा। लिफ्ट में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए ऑक्सीजन सिलेंडर और एंबुलेंस मंगा ली गई थी।

ये हुए निलंबित

लोकनिर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अजय श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता धर्मदेव सिंह, सहायक अभियंता धर्मेन्द्र सिंह और अवर अभियंता सीताराम। विधानसभा में मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निभाने वाले ये अधिकारी मुख्यमंत्री के लिफ्ट में फंसने के समय मौजूद नहीं थे।

कंपनी के खिलाफ सीएम के जीवन को खतरे का मुकदमा

Akhilesh Yadav and Dimple Yadav stuck in lift.

राज्य संपत्ति अधिकारी बृजराज सिंह यादव ने लिफ्ट का संचालन और रखरखाव करने वाली कंपनी थॉयसन क्रूप कंपनी के खिलाफ हजरतगंज थाने में लापरवाही और जीवन को खतरे में डालने जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है।

इसमें कहा गया है कि लिफ्ट में खराबी से मुख्यमंत्री 45 मिनट लिफ्ट में फंसे रहे। यह उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चूक और लापरवाही है। थॉयसन क्रूप कंपनी को लिफ्ट के संचालन और मरम्मत की सालाना धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। लिफ्ट की खराबी से सीएम के जीवन को खतरे जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की बनती है।

बृहस्पतिवार को दी थी लिफ्ट के फिट होने की रिपोर्ट
राज्य संपत्ति अधिकारी ने एफआईआर के साथ एक एनओसी भी लगाई है जिसे थॉयसन क्रूप कंपनी ने 17 दिसंबर को जारी किया था। इसमें लिफ्ट को संचालन के लिए फिट बताया था। यही नहीं, मुख्यमंत्री के आगमने से पहले लिफ्ट की जांच कराई गई थी।

मामले पर अवर अभियंता सीताराम का कहना है कि हम यहीं पर थे। जैसे ही हमें मालूम हुआ, मैं स्टॉफ को लेकर मौके पर पहुंचा। मैंने लोगों से कहा कि लिफ्ट मशीन रूम से ही खुलेगी। मैं मशीन रूम में गया और फिर वहां से कुछ काम करके ऊपर छत पर गया। वहां से लिफ्ट खुलवाई। तभी लोग बाहर निकले।

दोषी अधिकारी व कर्मचारी होंगे दण्‍डित

Akhilesh Yadav and Dimple Yadav stuck in lift.

लखनऊ के जिलाधिकारी राजशेखर ने कहा कि मामला गंभीर है। पूरे मामले की जांच कराकर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को दंडित किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिक विंग पर लिफ्ट की देखरेख की जिम्मेदारी है। लिफ्ट की देखरेख करने वाले विभागों से संबंधित अधिकारियों का कहना है कि सभी से पूछताछ की जा रही है।

लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पाण्डेय ने कहा कि संबंधित विभाग और लिफ्ट लगाने वाली कंपनी से पूछताछ की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के आने और जाने के समय यहां कोई जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी क्यों नहीं था। जहां तक लिफ्ट के मेंटेनेंस या उसमें खराबी का मामला है तो यह विषय विधानसभा सुरक्षा का है।

उधर, महिला सुरक्षाकर्मी हुई बेहोश

विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बोलने के लिए जैसे ही खड़े हुए उनकी सुरक्षा में तैनात महिला सुरक्षाकर्मी शशिप्रभा मिश्रा बेहोश होकर गिर गईं। मुख्यमंत्री ने अपनी फ्लीट की एंबुलेंस से उन्हें तत्काल अस्पताल भेजने के लिए कहा। उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें स्पॉन्डलाइटिस की शिकायत बताई गई है।

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