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अखिलेश का दांव: पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को थमाया टिकट, क्या स्वामी प्रसाद मौर्य की भरपाई करने की कोशिश?

Sun, 14 Apr 2024 09:03 PM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 14 Apr 2024 09:03 PM IST
सार

Babu Singh Kushwaha: सपा ने रविवार को सात प्रत्याशियों की सूची जारी की है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम बसपा सरकार में मंत्री रहे और एक घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा का है। इसके पीछे एक रणनीति मानी जा रही है। 

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Akhilesh's bet: Ticket given to former minister Babu Singh Kushwaha
अखिलेश यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपा ने बाबू सिंह कुशवाहा को टिकट देकर जहां जौनपुर में मजबूत दांव चला है, वहीं उन्हें पार्टी में लाकर स्वामी प्रसाद मौर्य की कमी को पूरा करने का प्रयास भी किया है। इसी रणनीति का नतीजा है कि इंडिया गठबंधन में प्रारंभिक सहमति बनने के बावजूद स्वामी प्रसाद मौर्य को कुशीनगर से टिकट नहीं दिया गया। बाबू सिंह कुशवाहा पर भ्रष्टाचार के आरोपों को दरकिनार करते हुए अब सपा ने उन्हें गले लगा लिया है। इसकी वजह कुशवाहा, शाक्य और मौर्य वोटों पर नजर है, जो ओबीसी की कुल आबादी के करीब पांच फीसदी हैं।

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माना जा रहा है कि सपा नेतृत्व ने स्वामी प्रसाद मौर्य की कमी को पूरा करने के लिए बाबू सिंह कुशवाहा को लाने का निर्णय लिया है। वर्ष 2014 में बाबू सिंह को भाजपा में लाने के प्रयास हुए थे, लेकिन पार्टी के अंदर ही विरोध शुरू हो जाने के चलते वे शामिल नहीं हो सके थे। इसके बाद उन्होंने अपनी जन अधिकार पार्टी बनाई। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा से उनके गठबंधन की बात चली, लेकिन यह बातचीत मुकाम पर नहीं पहुंच सकी।
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 एनआरएचएम घोटाले में आरोपी हैं कुशवाहा
बाबू सिंह कुशवाहा बांदा जिले के पखरौली के रहने वाले हैं। मायावती सरकार में वह परिवार कल्याण मंत्री रहे। वे एनआरएचएम घोटाले में आरोपी हैं। दो मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या की कड़ियां भी इसी घोटाले से जुड़ी बताई जाती हैं। जौनपुर सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाता प्रभावी भूमिका में माने जाते हैं। सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि बाबू सिंह कुशवाहा के आने से मौर्य, शाक्य व कुशवाहा समेत अन्य पिछड़ी जातियों का वोट भी उसे मिलेगा। इसके चलते भाजपा प्रत्याशी कृपा शंकर सिंह और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा में सीधी लड़ाई होगी। यूपी की अन्य सीटों पर भी कुशवाहा मतदाताओं में अच्छा संदेश जाएगा।
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यहां बता दें कि कुछ दिनों पहले तक कुशवाहा अपनी जन अधिकार पार्टी के 6-7 प्रत्याशी उतारने पर विचार कर रहे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा से केमिस्ट्री न बैठने पर उन्होंने प्रत्याशी उतारे भी थे, हालांकि सफलता हाथ नहीं लगी। इस बार की बदली हुई परिस्थितियों में उनकी सपा से बात बन गई।

ब्राह्मणों को लुभाने के लिए भीष्म शंकर तिवारी पर दांव
सपा नेतृत्व ने डुमरियागंज से पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे भीष्म शंकर ''कुशल'' तिवारी को उतारकर पूर्वांचल में ब्राह्मणों को लुभाने का बड़ा दांव चला है। वे बसपा के टिकट पर सांसद रह चुके हैं। पिछले दो चुनाव संतकबीरनगर से हार चुके थे, इसलिए सपा ने उनकी सीट बदलकर भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा सांसद जंगदम्बिका पाल के सामने चुनौती खड़ी करने की कोशिश की है।


जातिगत समीकरण साधने का प्रयास
सपा के पूर्वांचल में उतारे गए सात प्रत्याशियों में पांच टिकट अन्य पिछड़ा वर्ग को दिए गए हैं। ओबीसी में मौर्य, कुर्मी, निषाद, कुशवाहा और राजभर जाति के एक-एक प्रत्याशी को टिकट देकर जातिगत समीकरण साधने का प्रयास किया है।

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