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अखिलेश की वजह से हुई करारी हार, यह है प्रमाण!

Sun, 25 May 2014 10:11 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 25 May 2014 10:11 AM IST
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akhilesh has 56 portfolio, but did not perform well

लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद जिस तरह सीएम अखिलेश यादव ने 36 दर्जा प्राप्त मंत्रियों पर गाज गिराया, उससे यह साफ हो गया कि वह बर्खास्त हुए मंत्रियों की कार्यप्रणाली से खुश नहीं थे।

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लेकिन अखिलेश के पास 56 पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी थी, बावजूद इसके यहां भी बेहतर कार्य नहीं हुआ और भाजपा ने इसका फायदा उठाने में देरी नहीं की।

इस तरह देखा जाए तो खुद सीएम भी सपा की हार के कम जिम्मेदार नहीं हैं।

वित्त विभाग पर बढ़ता ही गया कर्ज

akhilesh has 56 portfolio, but did not perform well

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक सीएम अखिलेश यादव के पास 56 पोर्टफोलियो थे, लेकिन विकास के नाम पर ऐसा कुछ भी नहीं ‌हुआ जिससे मोदी की लहर को कम किया जा सके।

सीएम के पास बिजली, वित्त, गृह, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, वन, उच्च शिक्षा समेत और भी कई अहम जिम्मेदारियां थीं। अगर शुरूआत वित्त विभाग से करें, तो इस विभाग पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही गया।

मार्च 2012 में यह कर्ज 2.09 लाख था, वहीं मार्च 2013 में यह बढ़कर 2.19 लाख करोड़ हो गया। इतना ही नहीं, यह बोझ 31 मार्च 2014 तक 2.39 लाख करोड़ के आस-पास अनुमानित रहा।

अखिलेश ने वित्त वर्ष 2014-15 का बजट पेश नहीं किया, हालांकि अब जून में आने वाले विधानसभा सत्र में इसे पेश किया जा सकता है।

रही-सही कसर मुजफ्फरनगर दंगे ने पूरी की

akhilesh has 56 portfolio, but did not perform well

अखिलेश के पास गृह विभाग की भी जिम्मेदारी थी लेकिन वह प्रदेश में सुरक्षित महौल और सौहार्दपूर्ण वातावरण देने में पूरी तरह नाकाम रहे, जिसका नरेंद्र मोदी ने भरपूर फायदा उठा लिया।

अखिलेश के शासन काल में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 100 से भी ज्यादा सांप्रदायिक दंगे हुए। देखा जाए तो प्रदेश की पिछली सरकार में सांप्रदायिक दंगे ना के बराबर हुए।

इसके अलावा, नवंबर 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों ने सपा सरकार की रही-सही कसर भी पूरी कर दी, जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिला।

इस दौरान एसटीएफ, एटीएस और एसआईटी जैसी विशेष सुरक्षा एजेंसियों ने भी बेहतर परफॉर्म नहीं किया, जिससे कहीं न कहीं सपा सरकार को थोड़ा-बहुत सहारा मिल गया होता।

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बिजली विभाग भी रहा नुकसान में

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बिजली जैसे अहम विभाग की जिम्‍मेदारी भी खुद के पास होने के बावजूद भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोगों को बिजली कटौती से निजात नहीं दिला सके।

विभाग में लगातार मांग और पूर्ति के बीच का दायरा बढ़ता गया, जिससे दिन में 15-18 घंटे बिजली गुल रहने लगी।

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नतीजा यह ‌निकला कि मायावती के कार्यकाल में जिन10 नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत हुई थी, उसमें से महज एक पर ही काम शुरू हो सका और बाकी नौ छोड़ दिए गए।

कुछ ऐसा ही हाल उद्योग का भी रहा, जब कई बड़े इंवेस्टर्स ने यूपी से मुंह मोड़ लिया,‌ ‌जिसमें यूएसआईबीसी और आगरा समिट के इंवेस्टर्स शामिल हैं।

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