डॉक्टर पढ़ेंगे, विशेषज्ञ बनेंगे, खर्चा देंगे अखिलेश!
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प्रदेश सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के एमबीबीएस डॉक्टरों को विशेषज्ञता दिलाने जा रही है।
इसके लिए उन्हें सरकारी खर्च पर पीजी डिप्लोमा या डीपीएच कोर्स कराया जाएगा। इसके लिए 31 दिसंबर तक डॉक्टरों को स्वास्थ्य महानिदेशालय में आवेदन करना होगा।
ये परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम इलाहाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, मेरठ व आगरा के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कराए जाएंगे। इनके अलावा लखनऊ के चिकित्सा विश्वविद्यालय व कोलकाता मेडिकल कॉलेज से भी सरकार कोर्स कराएगी।
इनमें सभी प्रकार के विशेषज्ञता के कोर्स शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों में सत्र 2015-16 से प्रवेश दिए जाएंगे।
पढ़ाई के दौरान भी मिलेगा पूरा वेतन
इनमें उन्हीं एमबीबीएस डॉक्टरों को सरकार डिप्लोमा पाठ्यक्रम कराएगी जिनकी उम्र 31 दिसंबर 2014 को 45 वर्ष से अधिक न हो। पांच वर्ष की अनिवार्य सेवा एवं उससे अधिक की शासकीय सेवा करने वाले डॉक्टरों को चयन में वरीयता दी जाएगी।
सरकार ने प्रत्येक अभ्यर्थी से विषयों व मेडिकल कॉलेजों के तीन-तीन विकल्प मांगे हैं। खास बात यह है कि पाठ्यक्रम के दौरान डॉक्टरों को ड्यूटी पर मानते हुए उन्हें वेतन व अन्य भत्ते पहले की तरह मिलते रहेंगे।
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद यदि पांच वर्ष के भीतर डॉक्टर शासकीय सेवाएं छोड़ते हैं तो उनसे 10 लाख रुपये व पीजी कोर्स के दौरान दिए गए वेतन के बराबर की धनराशि स्वास्थ्य विभाग को जमा करनी होगी।
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रशासन अविनाश गौड़ ने बताया कि इस तरह की शर्तें इसलिए लगाई जाती हैं ताकि डॉक्टरों की विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश की जनता को मिल सके। सरकार यह कोर्स कराने में लाखों रुपये खर्च करती है।