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गंगा सफाई पर मोदी को अखिलेश का जवाब
अनिल श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sat, 21 Dec 2013 11:11 PM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी में गंगा की सफाई और नौकरियों में भ्रष्टाचार के भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के आरोपों पर पलटवार किया है।
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अखिलेश ने कहा कि बाहर के प्रदेश के लोगों को यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि गंगा की सफाई कैसे होगी? गंगा की सफाई की बात करने वाले पहले अपना मन साफ करें।
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उन्होंने नौकरियों में भ्रष्टाचार के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया और दोहराया कि सपा ही सांप्रदायिक ताकतों को रोकेगी।
कौशल विकास मिशन के शुभारंभ के बाद यहां पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा उत्तराखंड से निकलती है और पश्चिम बंगाल में समुद्र में जाकर मिलती है।
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सवाल उठाने वालों के यहां कोई गंगा नहीं बहती। गंगा पवित्र है और पानी के बहाव से अपनी गंदगी स्वयं दूर कर लेती है।
यदि साधु-संतों से पूछा जाता तो भी पता चल जाता कि महाकुंभ में गंगा की सफाई हुई थी या नहीं। अखिलेश ने मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि वे साधु-संतों से तो पूछते नहीं। गंगा मैली क्यों हैं, इसका जवाब पहले की सरकारों को देना होगा।
दूसरा, तमाम प्रमुख शहर गंगा किनारे बसे हैं। योजना आयोग, तकनीकी विशेषज्ञों व उद्योग जगत के लोगों को मिल बैठकर इसकी योजना बनानी होगी। यह काम केंद्र के स्तर पर हो भी रहा है।
गुजरात में मेरिट के आधार पर कंप्यूटराइज्ड भर्ती और यूपी में नौकरियों में भ्रष्टाचार को लेकर लगाए गए आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने शिक्षकों का स्थानान्तरण और पुलिस जवानों का ट्रांसफर कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से किया। कहीं कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
कुछ लोग यह सोचते हैं कि देश में उनकी हवा चल रही है। ऐसे लोगों को मान लेना चाहिए कि यूपी में सांप्रदायिक ताकतों को सपा नहीं बढ़ने देगी। उन्होंने दोहराया कि लोकसभा चुनाव के बाद तीसरे मोर्चे की ही सरकार बनेगी, क्योंकि जनता कांग्रेस और भाजपा से ऊब चुकी है।
अपनों द्वारा अफसरों पर निशाना साधने पर सीएम खफा
मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं में मीडिया के जरिये अफसरों पर निशाना साधने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा मीडिया के जरिये अफसरों पर निशाना साधने से जुड़े सवाल पर सीएम ने कहा कि यह प्रवृत्ति ठीक नहीं है।
वह सबके बीच सुलभ हैं। हवा में बात नहीं होनी चाहिए। तथ्य के साथ शिकायत होगी तो कार्रवाई होगी। गोरखपुर में शिकायत सामने आई तो तत्काल कार्रवाई हुई।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को दूसरे प्लेटफार्म पर बात रखने में ज्यादा आनंद आता है, यह उनके संज्ञान में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कौन सा अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहा है, यह बताया जाना चाहिए। लोगों को उचित प्लेटफार्म पर ही बात रखनी चाहिए।
संस्कृत में भी सियासी संदेश
संस्कृत संस्थान का पुरस्कार वितरण समारोह भी सियासत से नहीं बचा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछली सरकार पर हिंदी और संस्कृत के पुरस्कार रोकने का आरोप लगाया।
बसपा सरकार में चार साल तक पुरस्कार नहीं बंटे थे। पिछली सरकार में क्या-क्या घोटाले हुए यह सभी जानते हैं।
जब पुरस्कार रोक लिए तो अंदाजा लगा सकते हैं कि बड़े-बड़े बजट का पैसा कहां चला जाता था। व्यावसायिक शिक्षा बड़ा विभाग है।
केंद्र ने कौशल विकास कार्यक्रम के लिए बड़ा बजट दिया था। जब पुरस्कार के पैसे रोक लिए तो अंदाजा लगाइए कि और पैसा कहां गया होगा?