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अखिलेश बोले, संसाधन नहीं तो कैसे काम करें डॉक्टर

Sun, 05 Apr 2015 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 05 Apr 2015 10:25 PM IST
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Akhilesh accepts poor facilities in Uttar Pradesh.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह माना कि स्वास्थ्य क्षेत्र में संसाधनों की कमी है। सूबे में संसाधन इस लायक नहीं हैं कि डॉक्टर वहां काम कर सकें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे इस तरह से अस्पताल बनवाएं कि डॉक्टरों को अच्छी सुविधाएं मिल सकें।

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मरीजों को देखने के लिए डॉक्टरों के कमरे काफी छोटे होते हैं। इस कारण बाहर लाइन लग जाती है। मुख्यमंत्री रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के प्रांतीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा, दो विभाग ऐसे हैं जो हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। एक स्वास्थ्य महकमा है तो दूसरा पुलिस। पीएमएस डॉक्टरों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, एक साल में आपने एक करोड़ ज्यादा मरीज देखे हैं। अभी स्वाइन फ्लू का इतना हौवा खड़ा कर दिया गया।
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पता चला कि शहर के सारे मास्क बिक गए। आप लोग ही हैं जिन पर मरीज भरोसा करते हैं। अच्छे डॉक्टर हों तो आधी बीमारी ऐसे ही ठीक हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार से कहा, कुछ ऐसा रास्ता निकालें जिससे ये डॉक्टर भी विदेश में सेमिनार व कार्यशाला में हिस्सा ले सकें। वहां प्रशिक्षण पाने से इनका ज्ञान और बढ़ेगा।

जितनी भी कोशिश करो गांवों में डॉक्टर नहीं

Akhilesh accepts poor facilities in Uttar Pradesh.

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि प्रदेश में न सिर्फ डॉक्टर बल्कि पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। अस्पतालों में अन्य संसाधन भी बेहद कम हैं। अब अस्पताल बनवाने व उसमें उपकरणों की खरीद के लिए अलग-अलग टेंडर की जरूरत नहीं है।

अस्पतालों को टर्न की बेसिस पर बनवाया जाए। अब ऐसी एजेंसियां मौजूद हैं जो पूरा अस्पताल बनवाकर और उसे पूरी तरह सुसज्जित करके देती हैं।

...लेकिन गांवों में नहीं मिलते डॉक्टर
सीएम ने कहा, चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, गांवों में डॉक्टर नहीं मिलते। तैनाती कर दी जाती है लेकिन वे वहां जाते ही नहीं। अभी कुछ लोगों ने सलाह दी कि सरकार को कुछ बसें खरीदनी चाहिए। ये बसें ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टरों को छोड़कर आएं और बाद में उन्हें लेकर आएं। तकनीक के जमाने में इसकी क्या जरूरत।

फिर चुटकी लेते हुए कहा, मोबाइल व जीपीएस के जमाने में सबकी लोकेशन ली जा सकती है। लेकिन यदि डॉक्टरों को सरकार मोबाइल देकर उनकी लोकेशन लेना चाहे तो डॉक्टर अपना फोन ही मरीज को पकड़ा देंगे और खुद नदारद हो जाएंगे। यानी मोबाइल की लोकेशन तो गांव की रहेगी लेकिन डॉक्टर वहां नहीं होंगे।

डॉक्टरों को लखनऊ में रुकने की व्यवस्‍था नहीं

Akhilesh accepts poor facilities in Uttar Pradesh.

मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार लखनऊ के महानगर में ट्रांजिट हास्टल बनवाने में पूरा सहयोग करेगी। पीएमएस संघ इसे बनवाए, जहां भी जरूरत हो सरकार सहयोग करने को पूरी तरह तैयार है। इससे पहले पीएमएस संघ ने हॉस्टल बनवाने के लिए सहयोग मांगा था।

प्रांतीय महासचिव सचिन वैश्य ने कहा था कि डॉक्टरों को लखनऊ में रुकने के लिए कोई अच्छी व्यवस्था नहीं है। गेस्ट हाउस बनवाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने की थी लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं बन सका।

मातृ मृत्युदर में आई कमी: हसन

स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि सूबे में मातृ मृत्युदर में बेहद कमी आई है। पहले यह  प्रति हजार 57 थी, जो अब प्रति हजार 50 हो गई है। टीकाकरण 42 प्रतिशत होता था जबकि अब 62 प्रतिशत हो गया है।

पीएमएस डॉक्टरों को सरकार ने एसीपी का लाभ पहले ही दे दिया है। मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट सपा सरकार ने ही लागू किया है। अस्पतालों में कलर एक्स-रे मशीन व डिजिटल अल्ट्रासाउंड मशीनें लग रही हैं।

पीएमएस संघ ने रखीं ये मांगें

Akhilesh accepts poor facilities in Uttar Pradesh.

-सूबे में आबादी के अनुसार सृजित पदों की संख्या काफी कम है, इसे बढ़ाया जाए

-कार्य करने के घंटे निर्धारित होने चाहिए
-पीएमएस डॉक्टरों की सुविधाएं बढ़ाई जाएं
-राजधानी में डॉक्टरों के रुकने की उचित व्यवस्था हो।

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