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तो क्या हैंडपंप से बहेगी पानी की धार
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 03 Jan 2014 10:57 AM IST
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आसमान में उड़ने वाले मंत्रीजी को धरती पर उमड़ी भीड़ से तसल्ली मिली है।
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आरक्षण का झुनझुना और चौधरी साहब के प्रति आदर की भावना कड़ाके की ठंड के बावजूद अच्छी तादाद में लोगों को रैली में खींच लाई।
ठीक-ठाक भीड़ जुटने पर दावे हो रहे हैं कि मुजफ्फरनगर दंगे से रालोद का जनाधार खिसका नहीं।
कौन दावा करेगा कि भीड़ जुटा लेने से क्या पश्चिमी यूपी की उर्वरा भूमि का वाटर लेवल ऊपर उठ पाएगा? क्या हैंडपंप से पानी की धार बहेगी?
इन सवालों के बीच चर्चा तो यह भी हो रही है कि क्या आचार संहिता लगने से पहले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग जाटों को आरक्षण देने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजेगा।
यदि ऐसा नहीं हुआ तो संभावित रिएक्शन पर भी अटकलें लग रही हैं। देखना है कि रैली की कामयाबी से छोटे चौधरी के चेहरे पर आई मुस्कुराहट बरकरार रहती है या चार दिन की चांदनी ही साबित होती है।
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