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लखनऊः प्रदूषण कम करने के लिए नहीं उठाए जा रहे कारगर कदम, इस इलाके का एक्यूआई पहुंचा 350 पार

Fri, 23 Oct 2020 01:19 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 23 Oct 2020 01:19 PM IST
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air of lucknow became poisonous, AQI of talkatora reached 351
निशांत अस्पताल के पास सड़क पर उड़ती धूल - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ की हवा में तेजी से जहर घुलता जा रहा है। सबसे खतरनाक स्थिति तालकटोरा में है। गुरुवार देर शाम 351 वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ यहां हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई। गोमतीनगर नगर की हवा 290 एक्यूआई के साथ खराब श्रेणी में रही। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो दीपावली तक हवा दमघोंटू हो सकती है।  
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प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए डीएम ने काफी पहले नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, निर्माण एजेंसियों, कृषि विभाग, परिवहन, यातायात, ट्रैफिक पुलिस व औद्योगिक संगठनों से जुड़े जिम्मेदारों को तालमेल के साथ काम करने को कहा था। निर्माण इकाइयों को ग्रीन नेट लगाने, एंटी स्मॉगगन, पीटी जेड कैमरा, सेल्फ डस्ट कंट्रोल ऑडिट और पानी के छिड़काव का पुख्ता इंतजाम कराने को कहा गया। इसमें बरती जा रही लापरवाही से हानिकारक सूक्ष्म कण हवा में मिलकर इसे जहरीला बना रहे हैं। वहीं, जिम्मेदार विभाग के अधिकारी निरीक्षण व सत्यापन नहीं कर रहे हैं।
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सूक्ष्म कण खतरनाक 
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि वाहनों से निकलने वाला धुआं व उड़ने वाली धूल हवा के पीएम-10, पीएम-2.5 और पीएम-1 के औसत मासिक स्तर को निर्धारित मापदंड के मुकाबले 3-4 गुना तक खराब करता है। एक्यूआई का स्तर 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’ , 51 से 100 के बीच यह ‘संतोषजनक’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’  और 301 से 400 पर ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच आ जाने पर ‘अति गंभीर’ माना जाता है
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298 रहा लखनऊ का एक्यूआई

बढ़ते प्रदूषण के चलते गुरुवार को अलीगंज में एक्यूआई 284 रहा। पूरी राजधानी की बात करें तो यह 298 दर्ज किया गया। यह बुधवार को बहुत खराब की श्रेणी (328) था। गुरुवार को इसमें गिरावट तो थी, लेकिन खतरे का निशान माने जाने वाले 300 के नजदीक ही दर्ज हुआ।

70 हजार लीटर पानी रोजाना सड़कों पर छिड़का जा रहा
लखनऊ में जानलेवा होते जा रहे प्रदूषण को कम करने के लिए रोजाना 60-70 हजार लीटर पानी सड़कों पर छिड़का जा रहा है। गुरुवार को भी गोमती नगर, तालकटोरा और अलीगंज क्षेत्र में टैंकरों से पानी का छिड़काव किया गया। चार स्वीपिंग गाड़ियों से रोजाना करीब 150 किलोमीटर सफाई कराई जा रही है।

पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि प्रदूषण को कम करने के लिए एंटीस्मॉग गन भी खरीदी जाएंगी। जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। एंटी स्मॉग गन से 40 फीट ऊंचाई तक पानी चला जाता है। तीन एंटीस्मॉग गन खरीदी जाएंगी। एक स्मॉग गन की कीमत करीब 25 से 30 लाख रुपये है।

स्थलीय सत्यापन कर होगी कार्रवाई

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को बढ़ावा देने के लिए बजट दिया गया है। इससे तीन रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदी जा रही हैं। वहीं, बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कूड़ा जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह मलवा डालने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।  

हवा की लगातार खराब होती सेहत गंभीर मामला है। समय रहते इस पर प्रभावी रोक लगाने को अब औचक निरीक्षण कर स्थलीय सत्यापन होगा। इससे लापरवाही बरतने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा। - अभिषेक प्रकाश, जिलाधिकारी
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