लखनऊ। फिजियोथेरेपी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। इससे मरीज की चाल, शरीर की मुद्रा और गतिविधियों का आकलन कर जरूरत के अनुसार व्यायाम व उपचार की योजना तैयार की जा सकेगी। बीमारी या चोट के बाद सामान्य गतिविधियों में लौटने में भी मदद मिलेगी। हालांकि, एआई फिजियोथेरेपिस्ट का विकल्प नहीं, बल्कि उपचार में सहायक उपकरण होगा। यह जानकारी लोहिया संस्थान के रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय वर्मा ने दी।
रविवार को संस्थान के प्रेक्षागृह में दो दिवसीय एएसपीटी कॉनक्लेव-2026 का समापन हुआ। इसमें देशभर से फिजियोथेरेपिस्ट, शिक्षक, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने एआई आधारित मूवमेंट एनालिसिस, गैट-पोश्चर असेसमेंट, रोबोटिक तकनीक, लेजर व इलेक्ट्रोथेरेपी पर चर्चा की। केजीएमयू की टीम ने पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन का प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने मरीजों के डेटा की गोपनीयता और उपचार में जवाबदेही को भी जरूरी बताया। डॉ. सूर्यकांत, डॉ. अंकित कुमार, डॉ. शिवम श्रीवास्तव, डॉ. सुबिया हसन और डॉ. मोनिका अवस्थी समेत अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।