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कंप्यूटर से लाखों गुना तेज डेटा प्रॉसेस करेगी एआई लैब
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अक्षय कुमार
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज (कैस) ने प्रदेश की पहली और देश की पांचवीं अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब तैयार की है। करीब 10 करोड़ की लागत से तैयार इस लैब में सामान्य कंप्यूटर से लाखों गुना तेज डेटा प्रोसेसिंग की जा सकती है। इस लैब का लोकार्पण शनिवार को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी।
यह लैब डीजीएक्स 2 मॉडल की है। इसमें 5 पेटाफ्लोप्स की स्पीड मिलेगी। इसकी ग्राफिक्स प्रॉसेसर यूनिट (जीपीयू) बहुत तेज होती है। एकेटीयू के डीन पीजी प्रो. एमके दत्ता ने बताया कि जिस प्रकार हम बचपन से एक ही चीज देखते आते हैं और उसे आसानी से पहचान पाते हैं, उसी तरह हमारे कंप्यूटर भी हैं। यह भी कमांड आधारित काम करते हैं। अगर इनकी क्षमता से बहुत अधिक लोड इन पर देंगे तो यह बेहतर परिणाम नहीं दे पाएंगे। इसके लिए इनकी स्कैनिंग होनी बहुत जरूरी है। आज हमें जिस तेजी से डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत है, इसमें यदि सामान्य कंप्यूटर से काम करें तो 10 साल का समय लग जाएगा। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब के माध्यम से जटिल चीजों को भी आसानी से एक घंटे में हल किया जा सकता है, क्योंकि इसका लर्निंग प्रॉसेस बहुत तेज है। यह लैब सामान्य कंप्यूटर से लाखों गुना तेजी से काम करेगी।
क्लिनिकल मेडिसिन क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी
इस सुपर कंप्यूटर लैब का उपयोग क्लिनिकल मेडिसिन के क्षेत्र में बहुत बेहतर तरीके से हो सकता है। इसके साथ ही कोई भी हेल्थ केयर एप्लीकेशन बना सकते हैं। बायोटेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, केमिकल या मेकेनिकल इंजीनियरिंग में भी अच्छे परिणाम ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस लैब से सरकारी विभाग, इंडस्ट्री व शिक्षण संस्थान भी बेहतर परिणाम पा सकते हैं।
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अभी देश के चार संस्थानों में लैब
यह अत्याधुनिक सुपर कंप्यूटर एआई लैब अभी आईआईटी जोधपुर, आईआईटी हैदराबाद, सीडैक व एक अन्य प्रतिष्ठित संस्थान में मौजूद है।
कहीं से भी कर सकेंगे उपयोग
प्रो. दत्ता ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब के प्रयोग के लिए किसी को लखनऊ स्थित कैस आने की जरूरत नहीं है। यह लैब एक सर्वर है। हम जिसे भी इसका एक्सेस देंगे वो इसका प्रयोग नोएडा या गोरखपुर कहीं से भी कर सकेगा। इसलिए एकेटीयू से संबद्ध संस्थाओं के विद्यार्थी व शिक्षक अपने संस्थान से ही इसका लाभ ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि एक साल में अलग-अलग ग्रुप बनाकर इसके बेहतर प्रयोग के लिए ट्रेनिंग देंगे। ताकि आने वाले समय में इस पर अच्छा काम हो सके। ज्यादा लोगों के प्रशिक्षित होने से इसका ज्यादा बेहतर परिणाम समाज की बेहतरी के लिए मिल सकेगा।
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लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज (कैस) ने प्रदेश की पहली और देश की पांचवीं अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब तैयार की है। करीब 10 करोड़ की लागत से तैयार इस लैब में सामान्य कंप्यूटर से लाखों गुना तेज डेटा प्रोसेसिंग की जा सकती है। इस लैब का लोकार्पण शनिवार को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी।
यह लैब डीजीएक्स 2 मॉडल की है। इसमें 5 पेटाफ्लोप्स की स्पीड मिलेगी। इसकी ग्राफिक्स प्रॉसेसर यूनिट (जीपीयू) बहुत तेज होती है। एकेटीयू के डीन पीजी प्रो. एमके दत्ता ने बताया कि जिस प्रकार हम बचपन से एक ही चीज देखते आते हैं और उसे आसानी से पहचान पाते हैं, उसी तरह हमारे कंप्यूटर भी हैं। यह भी कमांड आधारित काम करते हैं। अगर इनकी क्षमता से बहुत अधिक लोड इन पर देंगे तो यह बेहतर परिणाम नहीं दे पाएंगे। इसके लिए इनकी स्कैनिंग होनी बहुत जरूरी है। आज हमें जिस तेजी से डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत है, इसमें यदि सामान्य कंप्यूटर से काम करें तो 10 साल का समय लग जाएगा। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब के माध्यम से जटिल चीजों को भी आसानी से एक घंटे में हल किया जा सकता है, क्योंकि इसका लर्निंग प्रॉसेस बहुत तेज है। यह लैब सामान्य कंप्यूटर से लाखों गुना तेजी से काम करेगी।
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क्लिनिकल मेडिसिन क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी
इस सुपर कंप्यूटर लैब का उपयोग क्लिनिकल मेडिसिन के क्षेत्र में बहुत बेहतर तरीके से हो सकता है। इसके साथ ही कोई भी हेल्थ केयर एप्लीकेशन बना सकते हैं। बायोटेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, केमिकल या मेकेनिकल इंजीनियरिंग में भी अच्छे परिणाम ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस लैब से सरकारी विभाग, इंडस्ट्री व शिक्षण संस्थान भी बेहतर परिणाम पा सकते हैं।
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अभी देश के चार संस्थानों में लैब
यह अत्याधुनिक सुपर कंप्यूटर एआई लैब अभी आईआईटी जोधपुर, आईआईटी हैदराबाद, सीडैक व एक अन्य प्रतिष्ठित संस्थान में मौजूद है।
कहीं से भी कर सकेंगे उपयोग
प्रो. दत्ता ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब के प्रयोग के लिए किसी को लखनऊ स्थित कैस आने की जरूरत नहीं है। यह लैब एक सर्वर है। हम जिसे भी इसका एक्सेस देंगे वो इसका प्रयोग नोएडा या गोरखपुर कहीं से भी कर सकेगा। इसलिए एकेटीयू से संबद्ध संस्थाओं के विद्यार्थी व शिक्षक अपने संस्थान से ही इसका लाभ ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि एक साल में अलग-अलग ग्रुप बनाकर इसके बेहतर प्रयोग के लिए ट्रेनिंग देंगे। ताकि आने वाले समय में इस पर अच्छा काम हो सके। ज्यादा लोगों के प्रशिक्षित होने से इसका ज्यादा बेहतर परिणाम समाज की बेहतरी के लिए मिल सकेगा।