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Lucknow News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवारा कुत्तों के लिए शहर में बनेंगे आहार स्थल
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आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केक काटकर जश्न मनाते पशु प्रेमी।
- फोटो : संवाद
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब आवारा कुत्तों के लिए आवासीय समितियों के सहयोग से आहार स्थल (फीडिंग सेंटर) बनाए जाएंगे। लोग इन्हीं आहार स्थल पर कुत्तों को भोजन करा सकेंगे। इस प्रकार के फीडिंग सेंटर आबादी से थोड़ी दूरी पर खाली और एकांत जगहों पर बनाए जाएंगे।
शहर में इस समय अनुमानित करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं। नगर निगम की ओर से एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों के तहत करीब 96 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।
पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सिर्फ काटने वाले कुत्तों को ही पकड़ कर सेंटर में रखा जाएगा। अन्य सामान्य कुत्तों का टीकारण और नसबंदी कर उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाएगा।
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उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह भी प्रावधान है कि काम में बाधा डालने पर आम नागरिक से 25 हजार रुपये और एनजीओ पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए। आदेश के तहत अब आवासीय समितियों के सहयोग से आहार स्थल बनाए जाएंगे। इसके लिए टीम बनाकर सर्वे कराया जाएगा।
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नसबंदी न होती तो शहर में होते चार लाख कुत्ते :
डाॅ. अभिनव वर्मा का कहना है कि शहर में यदि नसबंदी का अभियान न चलता तो इस समय आवारा कुत्तोंं की आबादी करीब चार लाख होती है। एक मादा साल में दो बार बच्चे देती है और एक बार में कम से कम छह से 10 तक बच्चे होते हैं। इनमें से आधे अलग-अलग वजहों से जीवित नहीं रहते हैं, मगर आधे जीवित बच जाते हैं।
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इन वजहों से आक्रामक होते हैं कुत्ते
- जब लोग कुत्तों को छेड़ते हैं।
- जब कुत्तों की जगह बदल जाती है।
- काफी समय तक भूखे रहने पर।
- पिल्लों की सुरक्षा को लेकर।
- प्रजनन के समय कुत्तों का स्वभाव काफी बदल जाता है और छेड़ने पर काटते हैं।
(जैसा कि नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. अभिनव वर्मा ने बताया।)
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इन तरीकों से कर सकते हैं बचाव
- कुत्तों को किसी भी वजह से छेड़े नहीं।
- कुत्तों के प्रति दया का भाव रखें।
- कुत्तों को उचित स्थान पर भोजन दें।
- कुत्ताें की नसबंदी के लिए नगर निगम को सूचना दें।
- कुत्तों के बच्चों को भी न पकड़े और न छेड़ें।
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शहर में इस समय अनुमानित करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं। नगर निगम की ओर से एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों के तहत करीब 96 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।
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पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सिर्फ काटने वाले कुत्तों को ही पकड़ कर सेंटर में रखा जाएगा। अन्य सामान्य कुत्तों का टीकारण और नसबंदी कर उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाएगा।
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उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह भी प्रावधान है कि काम में बाधा डालने पर आम नागरिक से 25 हजार रुपये और एनजीओ पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए। आदेश के तहत अब आवासीय समितियों के सहयोग से आहार स्थल बनाए जाएंगे। इसके लिए टीम बनाकर सर्वे कराया जाएगा।
नसबंदी न होती तो शहर में होते चार लाख कुत्ते :
डाॅ. अभिनव वर्मा का कहना है कि शहर में यदि नसबंदी का अभियान न चलता तो इस समय आवारा कुत्तोंं की आबादी करीब चार लाख होती है। एक मादा साल में दो बार बच्चे देती है और एक बार में कम से कम छह से 10 तक बच्चे होते हैं। इनमें से आधे अलग-अलग वजहों से जीवित नहीं रहते हैं, मगर आधे जीवित बच जाते हैं।
इन वजहों से आक्रामक होते हैं कुत्ते
- जब लोग कुत्तों को छेड़ते हैं।
- जब कुत्तों की जगह बदल जाती है।
- काफी समय तक भूखे रहने पर।
- पिल्लों की सुरक्षा को लेकर।
- प्रजनन के समय कुत्तों का स्वभाव काफी बदल जाता है और छेड़ने पर काटते हैं।
(जैसा कि नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. अभिनव वर्मा ने बताया।)
इन तरीकों से कर सकते हैं बचाव
- कुत्तों को किसी भी वजह से छेड़े नहीं।
- कुत्तों के प्रति दया का भाव रखें।
- कुत्तों को उचित स्थान पर भोजन दें।
- कुत्ताें की नसबंदी के लिए नगर निगम को सूचना दें।
- कुत्तों के बच्चों को भी न पकड़े और न छेड़ें।

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केक काटकर जश्न मनाते पशु प्रेमी। - फोटो : संवाद

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केक काटकर जश्न मनाते पशु प्रेमी। - फोटो : संवाद

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केक काटकर जश्न मनाते पशु प्रेमी। - फोटो : संवाद

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केक काटकर जश्न मनाते पशु प्रेमी। - फोटो : संवाद